Saturday, 4 December, 2021
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आईवीएफ के जरिए मां बनने की अधिकतम उम्र होगी 50 वर्ष, सरकार करेगी नियम कड़े

आईवीएफ तकनीक और एआरटी क्लीनिकों की सेवाओं को कानून के दायरे में लाने के लिए सरकार ने एक मसौदा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल 2019 तैयार किया है.

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नई दिल्ली: मोदी सरकार संसद के आगामी सत्र में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन (एआरटीआर) बिल 2019 पेश करने जा रही है, जिसमें आईवीएफ तकनीक का उपयोग कर मां बनने की चाहत रखने वाली महिला की अधिकतम उम्र 50 वर्ष तक रखने का प्रावधान रखा गया है.

इस बिल का मकसद इस तकनीक को नियंत्रित और निगरानी करना, इसको करने वाले लैब्स की पूरी निगरानी और मापदंड के आधार पर इन्हें लाइसेंस देना शामिल होगा. दिप्रिंट से बात करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा ‘इस मसौदे को कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिलने के बाद और कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में रखा जाएगा.’ हाल ही में सरकार सरोगेसी कानून भी लाई थी ताकि इस क्षेत्र की अनियमितताओं और महिलाओं को शोषण से बचाया जा सके.

आईवीएफ तकनीक पर हाल में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी की मंगयम्मा ने 74 साल की उम्र में  मां बनने की खबर ने नए सिरे से इस मामले पर बहस शुरू कर दी थी. बहस इस बात पर हो रही थी कि क्या ऐसा करना इस तकनीक का दुरुपयोग है, जिसने मां बनने की इच्छा रखने वाली कई महिलाओं को आशा की नई किरण दिखाईं है.

हालांकि, यह पहली घटना नहीं है जब इस तकनीक का उपयोग कर किसी बुजुर्ग महिला को मां बनाया गया हो. डॉक्टरों ने भी इस मामले में एक उम्र तय किए जाने की बात कही है.

मंगयम्मा के 74 साल की उम्र में मां बनने से जहां उन मां-बाप के आंखों में नई आशा की किरण भर दी है जिनको बच्चों की चाहत है पर वे सामान्य तरीके से गर्भधारण नहीं कर पा रहे. उनको इस मामले से ये संकेत भी मिले कि इस पद्धति से गर्भधारण की कोई आयु सीमा नहीं है. पर मेडिकल की दुनिया मे इस बात पर बहस गर्म है कि क्या इतनी बड़ी उम्र में गर्भधारण सही है या इस तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है. इस पर डॉक्टर भी एकमत लगे कि एआरटी तकनीक पर नियम बनाए जाने की ज़रूरत है. डॉक्टरों ने यह भी माना कि 50 से अधिक उम्र की किसी महिला को मां बनाना इस तकनीक का गलत इस्तेमाल है.

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आईवीएफ तकनीक के जरिए 60 से लेकर 70 से अधिक उम्र की महिला की मां बनाए जाने के सवाल पर देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने दिप्रिंट को बताया, ‘एआरटी क्लीनिकों की सेवाओं को कानून के दायरे में लाने के सरकार ने एक मसौदा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल 2019 तैयार किया है. इस मसौदे को कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिलने के बाद और कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में रखा जाएगा.’

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित विधेयक में एआरटी के माध्यम से तकनीक के हो रहे उपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी, साथ ही बांझपन के शिकार दंपत्ति के शोषण को भी रोका जा सकेगा. बता दें कि सरकार इस तकनीक से बच्चे पैदा करने की अधिकतम आयु 50 साल करने जा रही है.

वहीं दूसरी तरफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक के हो रहे दुरुपयोग को लेकर इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी ने भी कानून लाने की बात कही है. सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ एम गौरी देवी ने बयान जारी कर कहा है, ‘असिस्टेड रिप्रोडक्शन तकनीक रेगुलेशन बिल 2017, चैप्टर चार, पारा 37, सब पारा 7 ए के अनुसार, आईवीएफ तकनीक से मां बनने जा रही महिला की आयु 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए और 45 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए.’

क्या कहना है सूनी गोद भरने में जुटे डॉक्टरों का

एससीआई आईवीएफ हॉस्पिटल तकनीक की निदेशक डॉ शिवानी सचदेवा ने दिप्रिंट से कहा,’ इतनी बड़ी उम्र में किसी महिला को मां बनाना तकनीक का ‘दुरुपयोग’ है.’

शिवानी कहती हैं कि आईसीएमआर की साफ गाइडलाईन है जिसमें साफ-साफ लिखा गया है कि ‘अगर कोई जोड़ा बच्चा गोद लेना चाहता है तो महिला की उम्र-50 वर्ष और पुरुष की आयु 55 वर्ष होनी चाहिए.’

‘यहां तो एक महिला नौ महीने तक अपने पेट में बच्चे को पेट में रखने जा रही है इसमें उसका स्वस्थ होना और तंदरुस्त होना बहुत ज़रूरी है. और जब बच्चे के गोद लेने वाले माता-पिता की उम्र तय है तो आईवीएफ तकनीक से मां बनने की चाहत रखने वाली मां की उम्र भी तय की जानी चाहिए.’

उन्होंने कहा कि सरकार को आईवीएफ तकनीक से मां बनने के इच्छुक माता-पिता के लिए एक गाइडलाइन बनाने की ज़रूरत है. यह सिर्फ डॉक्टरों की वाहवाही की बात नहीं है, हम एक समाज में रहते हैं जिसका एक आचरण है जिसमें हर औरत की चाहत होती है कि वह मां बने और वह इस सुख को पाने के लिए किसी भी हद तक जाती है. लेकिन अगर सरकार की तरफ से गाईडलाइन नहीं है तो हम डॉक्टरों को ही एक स्टॉप लाइन खींचनी चाहिए.

नरचर आईवीएफ सेंटर में मोटापा और आवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर अर्चना धवन बजाज बताती हैं, ‘इतनी अधिक उम्र में किसी भी महिला को मां बनने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की ज़रूरत नहीं है. आदर्श उम्र 47-50 है लेकिन अगर महिला बहुत अधिक फिट है तो 52-53 की उम्र तो लिमिट होनी चाहिए.’

वहीं पिछले 24 वर्षों से आईवीएफ, सेरोगेसी से हजारों जोड़ों को मां-बाप बनने का ख्वाब पूरा करने वाले दिल्ली आईवीएफ रिसर्च सेंटर के डॉ अनूप गुप्ता कहते हैं, ’74 की उम्र बहुत अधिक है.’

‘यह मां बनने की उम्र नहीं है. साथ ही डॉक्टर यह भी कहते हैं ये क्रांतिकाल है.’

‘लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि एक पति-पत्नी जिसे अपना बच्चा नहीं है वह अपने बच्चे की चाहत में कुछ भी करने को तैयार है. लेकिन जब तक सरकार की तरफ से इस ओर कोई गाइडलाइन नहीं बन जाती है तब तक डॉक्टरों को खुद से ही अपने मरीजों को लेकर एक कैप लगाना होगा.’

इंफर्टिलिटी की बढ़ती समस्या

देश में तेजी से युवाओं में बढ़ती इनफर्टिलिटी दर पर इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर) का कहना है कि ‘अभी भारतीय जनसंख्या की करीब 10 से 14 फीसदी आबादी इनफरटाइल (मां-बाप बनने की स्थिति में नहीं है) है.’

सोसाइटी का यह भी कहना है कि ‘शहरी इलाकों में छह जोड़ों में से एक जोड़ा इससे प्रभावित है और करीब 27.5 मिलियन जोड़े फिलहाल बच्चे की चाहत में जुटे हैं और वह इस तकनीक की मदद चाहते हैं.’

लेकिन अगर डॉक्टरों की मानें तो बदलती लाइफस्टाइल से आज का युवा तेज़ी से इनफर्टिलिटी का शिकार हो रहा है. डॉक्टर शिवानी बताती हैं कि ‘उनके पास कुछ मामले ऐसे भी आए हैं जिसमें 25 साल की लड़की में भी अंडे ठीक से नहीं बन पा रहे हैं. वहीं नौकरी का बढता दवाब, प्रदूषण और अधिक उम्र में मां पिता बनना भी इसका मुख्य कारण है.’

बता दें कि मंगयम्मा का 74 साल की उम्र में मां बनने का मामला पहला नहीं है इससे पहले पंजाब अमृतसर की दलजिंदर कौर ने 72 साल की उम्र में लड़के को जन्म दिया था. 2016 में मां बनने वाली कौर ने तीन बार इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट लिया था जिसमें अंडे किसी और महिला के थे.

वहीं अनगिनत बुजुर्ग महिला को इस तकनीक ने मां बनने की खबरों से भरी परी वेब दुनिया में 2006 का मामला भी सामने आया जब 2006 में 70 साल की महिला राजो देवी के मां बनने पर सुर्खियां बटोरी थी.

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