Thursday, 20 January, 2022
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HC ने पंचतंत्र का हवाला दिया, सभी मामलों में पूर्व पंजाब DGP सुमेध सैनी की गिरफ्तारी पर फरवरी 2022 तक रोक लगाई

शुक्रवार का आदेश एक याचिका पर आया, जो सैनी ने 2018 में दायर की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उनके खिलाफ दायर किसी भी मामले की सुनवाई, CBI या पंजाब से बाहर की किसी भी स्वतंत्र जांच एजेंसी को दी जाए.

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नई दिल्ली: ये देखते हुए कि पूर्व पंजाब डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की कई मामलों में संलिप्तता, राज्य में आगामी असेम्बली चुनावों से पहले ‘एक राजनीतिक चाल हो सकती है’, पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही सभी जांचों, और अभी तक दर्ज और संभावित रूप से दर्ज हेने वाले सभी मामलों में, उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.

ये आदेश पंजाब में विधानसभा चुनाव होने तक प्रभावी रहेगा, जो फरवरी 2022 में होने हैं.

न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान ने 46 पन्नों का अपना आदेश पंचतंत्र की एक कहानी से शुरू किया, जिसमें एक बंदर एक गांव में घुस आता है, जहां एक भीड़ उसे घेर लेती है, जिसके बाद गांव का सरपंच उसके बचाव के लिए आता है. कहानी में सरपंच कहता है कि भीड़ ने बंदर से दूर रहने के कोई स्वीकार्य कारण नहीं दिए हैं, और वो पूरी घटना को ‘अन्याय’ क़रार देता है.

कोर्ट ने कहानी और सैनी मामले के बीच समानता बताते हुए कहा, ‘भारत में न्याय प्रणाली ऐसे ही काम करती है, जहां अदालत सुनवाई के अधिकार का पालन करती है, यानी बिना सुने किसी की भी निंदा नहीं की जानी चाहिए. याचिकाकर्ता की हालत उसी कहानी जैसी लगती है, जहां इस अदालत ने विभिन्न आदेश जारी करके, याचिकाकर्ता के अधिकार की रक्षा की है’.

कोर्ट के विपरीत आदेशों के खिलाफ जाकर, पिछले महीने सैनी को गिरफ्तार करके, ‘कोर्ट से आगे निकलने का प्रयास करते, पंजाब पुलिस अधिकारियों की धृष्टता’ का संज्ञान लेते हुए, जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान ने शुक्रवार को आदेश दिया ‘केस की परिस्थितियों और पंजाब राज्य के हाथों (राजनीतिक आधार पर) याचिकाकर्ता को पहुंचाई गई तकलीफ को असाधारण मानते हुए, सभी लंबित, दर्ज या संभावित रूप से दर्ज होने वाले मामलों में, याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक रहेगी…जब तक पंजाब सूबे में आम चुनाव नहीं हो जाते, जो फरवरी 2022 में निर्धारित हैं’.

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लेकिन कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि सैनी बिना उसकी अनुमति के, फरवरी 2022 तक देश छोड़कर नहीं जा सकते.

मामले की अगली सुनवाई अब 13 दिसंबर को होगी.


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‘द्वेष, दुर्भावना, परोक्ष अभिप्राय’

1982 बैच के आईपीएस अधिकारी सैनी, मार्च 2012 में 54 साल की उम्र में पंजाब के सबसे युवा डीजीपी बन गए थे. वो शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष और सूबे के पूर्व उप-मुख्यमंत्री, सुखबीर बादल की आंखों का तारा थे, और उन्हें पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का आश्रित भी माना जाता था.

लेकिन, गुरू ग्रंथ साहब के अपवित्रीकरण के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से, घटिया ढंग से निपटने के आरोप में उन्हें इस पद से हटा दिया गया. जून 2018 में सैनी रिटायर हो गए और उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक और घाव पदक (पराक्रम मेडल) से सम्मानित किया गया. लेकिन उनके खिलाफ कम से कम आधा दर्जन मामले दर्ज हैं.

शुक्रवार का आदेश उस याचिका पर आया, जो उन्होंने 2018 में दायर की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उनके खिलाफ दायर किसी भी मामले की सुनवाई, CBI या पंजाब से बाहर किसी भी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी को दी जाए.

उन्होंने कहा था कि उन्हें डर है कि ‘पंजाब सूबे में सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी की ओर से, द्वेष, दुर्भावना और परोक्ष अभिप्राय के चलते, उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाया जा सकता है’.

हाईकोर्ट ने तब अक्टूबर 2018 में उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा दे दी, जिसे फिर सितंबर 2020 में बढ़ाकर, उनके सेवा काल से जुड़ी किसी भी घटना को, उसके दायरे में कर दिया गया.

लेकिन, इस साल 18 अगस्त को उन्हें, सितंबर 2020 में दर्ज एक मामले में फिर गिरफ्तार कर लिया गया. एक दिन बाद हाईकोर्ट ने ‘केस की चर्चा किए गए तथ्यों और परिस्थितियों, तथा नज़रबंद की अवैध गिरफ्तारी’ के मद्देनज़र उनकी रिहाई के आदेश दे दिए.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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