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गोवा में एक कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर | पीटीआई
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नई दिल्ली: लंबी बीमारी के बाद रविवार शाम मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया है. पिछले तीन दिनों से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी. आज शाम उन्होंने आखिरी सांस अपने पणजी स्थित घर में ली. चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे पर्रिकर को पूरा देश उनकी सादगी की वजह से याद करेगा. वह राजनेता से मिलें या फिर आम लोगों से वह अपनी छाप छोड़ देते थे. पिछले कुछ दिनों से पर्रिकर की तस्वीरें जो सामने आई उसमें उनकी नाक में लगी नली देश को विचलित कर रही थी. चुनाव के इस मौसम में भाजपा के लिए मनोहर पर्रिकर का जाना एक बड़ी छती के रुप में देखा जा रहा है.

मनोहर पिछले डेढ साल से अधिक वर्षों से बीमार थे फिर भी उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा था. हाल ही में गोवा का बजट पेश करने से पहले मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि परिस्थितियां ऐसी हैं कि मैं न तो इतनी देर तक खड़ा रह सकता हूं, और न ही पूरा बजट ही पेश कर सकता हूं. लेकिन मैं सदन को कहना चाहता हूं मैं जोश में और पूरी तरह से होश में हूं. जिस तरह से मनोहर पर्रिकर ने बीमारी के हालात में भी गोवा में पुल निर्माण से लेकर सदन की कार्रवाई को संभाला वह उनकी जिजीविषा को दिखाता था.


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मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद राजनीतिक महकमें में शोक की लहर दौड़ गई है. पक्ष और विपक्ष, हर नेता उन्हें उनकी सादगी की वजह से याद कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर मनोहर पर्रिकर के निधन पर दुख जताया है. पीएम ने लिखा कि मैं बुहत दुखी हूं, वहीं राहुल गांधी ने भी लिखा कि मनोहर पर्रिकर के जाने से बहुत ही दुखी हूं. राहुल ने आगे लिखा कि गोवा का सबसे चहेता बेटे थे परिकर.

13 दिसंबर 1955 को जन्मे पर्रिकर आईआईटी बांबे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन किया. वह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जो आईआईटी से ग्रैजुएट थे. परिकर को याद करते हुए उनके साथी सुरेश प्रभु, रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी तक उन्हें उनकी सादगी के लिए याद कर रहे हैं. सभी को मनोहर परिकर की एक याद जो आ रही है वह है उनकी रबड़ की चप्पल, हाफ शर्ट और पैंट.

पहली बार 1994 में पणजी विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे. इसके बाद उन्होंने पीछे पलट कर नहीं देखा. वह लगातार चार बार इस सीट से जीते, गोवा में मनोहर पर्रिकर ही थे जिन्होंने गोवा को गोवा बनाया.

पर्रिकर भले ही बीमार थे लेकिन वह बीच बीच में घर पर ही पूरा ऑफिस का काम किया करते थे. आज जब मनोहर लंबी बीमारी से लड़ते हुए जा चुके हैं लेकिन जब उनके आखिरी दिन की बात करें जो एक डायलॉग जो अंतिम दिनों में वह पब्लिक मीटिंग में आए तो उन्होंने पूछा ‘हाउज़ द जोश’ उस दौरान उनकी सभा में आए थे सभी ने जोश में उतनी ही बुलंद आवाज में उसका जवाब दिया था.

मनोहर परिकर पैनक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थे. उनका इलाज अमेरिका से लेकर मुंबई और दिल्ली के एम्स तक में हुआ. पर्रिकर का आखिरी कार्यकाल भी विवादों में भी रहा. एक तरफ उनकी बीमारी के बाद जिस तरह से राजनीति में हलचल मची रही वहीं पिछले दिनों वह राहुल गांधी के साथ मिलने को लेकर भी विवाद में रहे.

राहुल गांधी ने पर्रिकर के बहाने पीएम को घेरने की कोशिश की थी. राहुल ने ट्वीट कर लिखा था मैं पर्रिकर जी से मिला, पर्रिकर जी ने उन्हें बताया कि राफेल डील बदलते समय पीएम ने हिंदुस्तान के रक्षामंत्री ने नहीं पूछा था. पर्रिकर राहुल के इस आरोप पर गुस्सा हो गए थे और उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी थी और कहा था कि कांग्रेस नेता को एक अस्वस्थ व्यक्ति से अपनी मुलाकात का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना ठीक नहीं है. पर्रिकर ने अपने खत में लिखा था कि मुझे दुख हो रहा है कि आपने हमारी मुलाकात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया. मेरे साथ बिताए गए पांच मिनट में आपने न तो राफेल पर कुछ कहा और न हीं इसके संबंध में कोई चर्चा ही हुई ती. इस बीच पर्रिकर कुछ फाइलों के साथ सामने आए थे.


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