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Friday, 16 January, 2026
होमदेशअस्थायी इमारतों से छुटकारा: यूपी के 10 जिलों में होंगे एकीकृत अदालत परिसर

अस्थायी इमारतों से छुटकारा: यूपी के 10 जिलों में होंगे एकीकृत अदालत परिसर

सीजेआई परियोजना के पहले चरण (1,630 करोड़ रुपये) की आधारशिला रखेंगे. इस योजना के तहत कॉन्फ्रेंस हॉल, आवास, जिम, वकीलों के चैंबर, प्रतीक्षालय और नई तकनीक से लैस आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे.

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नई दिल्ली: स्थापना के कई दशक बाद, उत्तर प्रदेश के 10 जिलों को आखिरकार एक-एक स्थायी एकीकृत अदालत परिसर मिलेगा, जहां सभी अधीनस्थ अदालतें एक ही छत के नीचे होंगी.

फिलहाल ये अदालतें अस्थायी ढांचों में चल रही हैं, जिनमें से कुछ किराए की इमारतों में काम कर रही हैं. कई जगह वकीलों के लिए बार रूम या वादकारियों के लिए प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं.

दो चरणों वाली इस परियोजना का उद्देश्य 10 जिलों में अत्याधुनिक न्यायिक सुविधाएं विकसित करना है.

पहले चरण का उद्घाटन शनिवार को चंदौली में होगा, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ छह जिलों—चंदौली, हाथरस, महोबा, औरैया, शामली और अमेठी, के लिए एक साथ आधारशिला रखेंगे.

इस बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया, प्रस्तावित एकीकृत अदालत भवन वकीलों, अदालत कर्मचारियों और वादकारियों के लिए सुविधाजनक और उपयोगकर्ता-अनुकूल कार्य वातावरण प्रदान करेगा.

सूत्र ने कहा, “इन परिसरों की योजना इस तरह बनाई गई है कि एक ही भवन में सभी तरह की अदालतें—आपराधिक, दीवानी, मोटर दुर्घटना, विशेष अदालतें—समाहित हों. यह हरित, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार एकीकृत अदालत परिसर होगा, जिसमें सभी सुविधाएं एक साथ मिलेंगी.”

यह परियोजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और इलाहाबाद हाईकोर्ट का संयुक्त प्रयास है. छह जिलों को कवर करने वाले पहले चरण की अनुमानित लागत 1,630 करोड़ रुपये से अधिक है.

यूपी सरकार के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि इनमें से कई जिले मायावती सरकार और उससे पहले की सरकार के दौरान बनाए गए थे. 25 साल से ज्यादा समय से अस्तित्व में होने के बावजूद, किसी भी जिले में अपना अदालत परिसर नहीं था. अदालतें अलग-अलग जगहों पर फैली हुई थीं—कहीं एक कोने में, तो कहीं दूसरी जगह.

इन जिलों में सही न्यायिक ढांचा उपलब्ध कराने से पहले सरकार ने इनके विकास की प्रक्रिया शुरू की. इसके तहत पहले पुलिस लाइनें स्थापित की गईं और फिर जिला जेलों का निर्माण किया गया.

क्योंकि किसी भी जिले के लिए न्यायिक ढांचा बेहद जरूरी होता है, इसलिए इसके बाद हाईकोर्ट के कहने पर एकीकृत अदालत परिसर बनाने की योजना बनाई गई.

इन अदालत भवनों में 250 सीटों की क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर, मनोरंजन केंद्र जैसे मीटिंग रूम, मध्यस्थता कक्ष, योग कक्ष, जिम, रसोई सहित डाइनिंग और सूट शामिल होंगे.

वकीलों के चैंबर, वादकारियों के लिए प्रतीक्षालय और पार्किंग क्षेत्र भी इन नए परिसरों में होंगे. ये सभी परिसर ऑनलाइन सुनवाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स के इस्तेमाल के लिए नई तकनीक से लैस होंगे.

286.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली चंदौली जिला अदालत में 37 कोर्ट रूम होंगे. हाथरस में 44 कोर्ट रूम बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग 322.31 करोड़ रुपये खर्च होंगे. महोबा में 37 कोर्ट रूम 287.42 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे, जबकि शामली में 23 कोर्ट रूम होंगे, जिन पर 240.22 करोड़ रुपये खर्च होंगे. औरैया में 37 कोर्ट रूम 278.66 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे और अमेठी में 17 कोर्ट रूम पर करीब 220.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

सूत्रों ने बताया कि इन परिसरों का डिजाइन ऐसा है कि भविष्य में यदि जजों और अदालत कर्मचारियों की संख्या बढ़ती है, तो उन्हें भी समायोजित किया जा सकेगा.

सूत्र ने आगे कहा, “जैसे-जैसे ज्यादा नागरिक अदालतों का रुख कर रहे हैं, भविष्य में यहां और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति हो सकती है. प्रस्तावित योजना में इस संभावना को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जगह का प्रावधान किया गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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