नई दिल्ली: बुधवार को दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया, क्योंकि उसने चीन में बने रोबोटिक डॉग “ओरियन” को अपनी खुद की खोज बताकर पेश किया था. विवाद के केंद्र में रहीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने बाद में सफाई दी और कहा कि रोबोट के मालिकाना हक को लेकर उनके बयान को “गलत समझा गया”.
ग्रेटर नोएडा स्थित यूनिवर्सिटी ने भी इस दावे से दूरी बना ली कि उसने यह मशीन बनाई है. इस घटनाक्रम के तुरंत बाद सिंह के लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘ओपन टू वर्क’ लिखा दिखा.
कम्युनिकेशन की प्रोफेसर सिंह ने अपने लिंक्डइन बायो में दावा किया है कि वह भाषा के जरिये लोगों से जुड़ने, उन्हें प्रेरित करने और आगे बढ़ाने की क्षमता रखती हैं.

उनके लिंक्डइन बायो में लिखा है, “भाषा, बोलने की कला और मंच पर उपस्थिति की स्वाभाविक क्षमता के साथ, मैंने वर्षों तक लोगों को उनकी आवाज खोजने और खुद को साफ और प्रभावी तरीके से व्यक्त करने में मदद की है. मेरा मानना है कि सही समय पर सही शब्द सच में सब कुछ बदल सकते हैं.”
क्या है विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब पांच दिन के इस कार्यक्रम के वीडियो सामने आए, जिनमें गलगोटियास यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि रोबोटिक डॉग को उसके सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित प्रोडक्ट के रूप में पेश करते दिखे. इस सेंटर की प्रमुख सिंह हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स से जुड़ी पहल में यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करती हैं.
वीडियो में सिंह कहते हुए सुनाई दीं, “यह ओरियन है. इसे गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विकसित किया है.”
ये क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. बाद में यूजर्स ने बताया कि यह इनोवेशन चीन की कंपनी यूनिट्री ने विकसित किया है और इसे व्यावसायिक रूप से बेचा जा रहा है. इसकी कीमत 2,800 डॉलर है. इसके बाद सिंह के दावे गलत साबित हो गए.
विवाद बढ़ने पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यूनिवर्सिटी को पवेलियन खाली करने का निर्देश दिया. इसके बाद सिंह ने सफाई दी, जो उनके लिंक्डइन बायो में किए गए दावों से अलग थी.
सिंह ने कहा, “विवाद इसलिए हुआ क्योंकि बात शायद साफ तरीके से नहीं कही गई. मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं कि शायद मैं इसे ठीक से समझा नहीं पाई. यह बहुत ऊर्जा और उत्साह में और बहुत जल्दी कहा गया, इसलिए शायद मैं उतनी स्पष्ट और प्रभावी नहीं लग पाई जितनी मैं आम तौर पर होती हूं.”
पत्रकारों से आत्मविश्वास के साथ बात करते हुए सिंह ने कहा कि उनका इरादा कभी यह दावा करने का नहीं था कि यूनिवर्सिटी ने रोबोडॉग “निर्मित” किया है. उन्होंने कहा, “मैंने सभी से कहा है कि हमने इसे अपने छात्रों के सामने इसलिए पेश किया ताकि वे प्रेरित हों और खुद इससे बेहतर कुछ बना सकें.”
गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने एक औपचारिक बयान जारी किया, जो सिंह के दावों से अलग नजर आया. यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसने “कभी यह दावा नहीं किया कि उसने रोबोडॉग बनाया है.” उसने इसे “चलती फिरती क्लासरूम” बताया, जिसे छात्रों को दुनिया भर की तकनीक से परिचित कराने के लिए खरीदा गया है.
यूनिवर्सिटी ने बयान में कहा, “हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि यह रोबोटिक प्रोग्राम हमारे उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके जरिए हम छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सीखने, वैश्विक स्तर पर उपलब्ध टूल और संसाधनों का उपयोग कर वास्तविक कौशल विकसित करने और लागू करने का मौका देना चाहते हैं, क्योंकि एआई टैलेंट विकसित करने की तत्काल जरूरत है.”
प्रोफेसर नेहा सिंह कौन हैं?
सिंह उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटियास यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. वह नवंबर 2023 से यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई हैं.
वह एआई और रोबोटिक्स के क्षेत्र में यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करती हैं और कई शैक्षणिक और तकनीकी मंचों पर सक्रिय रूप से हिस्सा ले चुकी हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, गलगोटियास यूनिवर्सिटी से पहले वह ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं.
उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालया से एमबीए किया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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