Monday, 24 January, 2022
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जितेंद्र त्यागी का इस्तीफा,यूपी BJP और कोविड केस में उछाल-इस हफ्ते उर्दू प्रेस में छाई रहीं ये खबरें

दिप्रिंट का राउंड-अप बता रहा है कि उर्दू मीडिया ने बीते हफ्ते विभिन्न घटनाओं को कैसे कवर किया और कुछ खबरों को लेकर उनका संपादकीय रुख क्या रहा.

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नई दिल्ली: देशभर में अब जबकि कोविड एक बार फिर लोगों के जीवन और आजीविका पर बड़ा खतरा बनकर मंडराने लगा है, इससे जुड़ी खबरें अधिकांश प्रमुख उर्दू अखबारों के पहले पन्नों पर छाई रहीं. लेकिन स्थिति पहले से थोड़ी अलग जरूर रही जब पूरे-पूरे हफ्ते केवल इसकी खबर ही प्रमुखता से कवर की जाती थी. इस हफ्ते इसे तमाम अन्य मुद्दों को लेकर जारी सरगर्मियों के बीच पहले पन्ने पर अपनी जगह बनानी पड़ी, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों में हेट स्पीच के मामले, पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में ‘चूक’ को लेकर जारी सियासी आरोप-प्रत्यारोप और इन सबसे बढ़कर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम शामिल रहे.

दिप्रिंट अपने साप्ताहिक राउंडअप में आपको बता रहा है कि कोविड में तेज उछाल के बीच विविध और राजनीतिक सरगर्मियों से भरे इस हफ्ते में उर्दू अखबारों ने किन खबरों को अपने पहले पन्ने पर जगह दी और कुछ प्रमुख समाचार पत्रों ने इन पर क्या संपादकीय रुख अपनाया.

धर्म संसद और जितेंद्र त्यागी

हरिद्वार धर्म संसद में कथित हेट स्पीच का मुद्दा पूरे सप्ताह उर्दू अखबारों के पन्नों पर छाया रहा, शुक्रवार को जितेंद्र त्यागी—जो पहले वसीम रिजवी के नाम से जाने जाते थे—की गिरफ्तारी की खबर को सियासत और इंकलाब दोनों ने पहले पन्ने पर जगह दी. इंकलाब ने इस पर लिखा कि गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का नतीजा है.

10 जनवरी को कथित हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जमीयत उलमा-ए-हिंद, पत्रकार कुर्बान अली और अन्य की तरफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करने के फैसले के बावजूद शायद ही किसी दिन यह मुद्दा पहले पेज पर सुर्खियों में न रहा हो.

13 जनवरी को एक संपादकीय में इंकलाब ने लिखा कि मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में जांच क्या करेगी, क्योंकि घृणास्पद भाषणों के सबूत तो सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक स्तर पर उपलब्ध हैं. इसने आरोप लगाया कि अगर पुलिस कार्रवाई करना चाहती तो उन वीडियो के आधार पर ऐसा कर सकती थी, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्हें ‘राज्य सरकार की तरफ से अनुमति नहीं दी गई.’

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उत्तर प्रदेश चुनाव

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा में मची भगदड़ की खबर भी पूरे सप्ताह उर्दू अखबारों की सुर्खियों में रही, इसके साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से लगाई गई घोषणाओं की झड़ी को भी प्रमुखता दी गई.

सियासत ने चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची पर अपनी खबर के कवरेज के दौरान 14 जनवरी को पहले पन्ने पर लिखा कि 40 फीसदी टिकट महिलाओं को और 40 प्रतिशत टिकट युवाओं को देने का पार्टी का फैसला ‘ऐतिहासिक’ है. अखबार ने पूर्व मंत्री और पाला बदलकर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान को भी तरजीह दी कि यूपी विधानसभा चुनाव ‘भाजपा के ताबूत में आखिरी कील’ साबित होगा.

एक दिन पहले, इंकलाब ने मंत्री दारा सिंह चौहान के भाजपा छोड़ने की खबर को सेकेंड लीड बनाया था. अखबार ने इसे यूपी में भाजपा की संभावनाओं के लिए एक और झटका करार दिया. साथ ही मौर्य के खिलाफ वारंट की खबर को भी पहले पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी.

उसी दिन रोजनामा ने अपने संपादकीय में लिखा कि चुनावी मौसम राजनेताओं के लिए निष्ठाएं बदलने का समय है, लेकिन इस तरह के कदमों के पीछे असली उद्देश्य उनका निजी स्वार्थ और नई पार्टी के साथ अपनी जीत की संभावनाएं बढ़ाना ही है. अखबार ने यह भी कहा कि अगर यूपी में नेताओं का भाजपा छोड़ने का सिलसिला जारी रहा तो राज्य विधानसभा चुनाव की राह पार्टी के लिए आसान नहीं होगी.

13 जनवरी को सियासत के संपादकीय में कहा गया था कि भाजपा में मची भगदड़ से निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के नेतृत्व पर ही सवाल खड़े करेगी और इससे केंद्रीय नेतृत्व को भी अपना दखल बढ़ाने का मौका मिल सकता है.

रोजनामा ने 10 जनवरी को एक अन्य संपादकीय में लिखा कि भले ही चुनाव महंगाई, बेरोजगारी और कोविड जैसे मुद्दों पर लड़े जाएंगे लेकिन अंतिम नतीजे ही बताएंगे कि मतदाता इन मुद्दों को कितनी अहमियत देते हैं.

12 जनवरी को रोजनामा और इंकलाब दोनों ने बसपा सुप्रीमो मायावती और महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को अपने पहले पन्ने की खबरों में जगह दी.

कोविड/ओमिक्रॉन का संक्रमण फैला

देशभर में कथित तौर पर नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के कारण कोविड के मामलों में उछाल पूरे सप्ताह पहले पन्नों पर सुर्खियों में रहा.

8 जनवरी को इंकलाब के पहले पन्ने पर कोविड केस दैनिक आधार पर एक लाख के पार पहुंच जाने की खबर को प्रमुखता से छापा गया. साथ ही इसमें महामारी की स्थिति पर चुनाव आयोग की तरफ से स्वास्थ्य मंत्रालय को ‘आगाह’ किए जाने की सूचना को भी जगह दी गई.

रोजाना नए मामले 1.5 लाख के पार पहुंच जाने के बीच 10 जनवरी को सियासत ने इसे अपने पहले पन्ने की लीड बनाया जिसमें देशभर के अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बच्चों के लिए टीकाकरण में तेजी लाने पर जोर देने की खबर को प्रमुखता दी गई. दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक बैठक के बाद 12 जनवरी को इंकलाब ने दिल्ली में कोविड संबंधी पाबंदियां कड़ी किए जाने और साथ ही अगले दो दिन राजधानी के लिए बेहद अहम की चेतावनी संबंधी खबर को प्रमुखता से छापा. इसने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने टीकाकरण में तेजी लाने का वादा किया है.

उसी दिन, सियासत ने फाइजर की इस घोषणा को अपने फ्रंट पेज पर जगह दी कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ एक वैक्सीन मार्च तक बाजार में आ जाएगी. इसने दिल्ली सरकार के इस विश्लेषण पर भी एक रिपोर्ट दी जिसमें बताया गया था कि राजधानी में 146 मौतों में से 11 लोग ऐसे थे जिन्हें दोनों टीके लग चुके थे.

पंजाब में पीएम की ‘सुरक्षा में चूक’

पंजाब में प्रधानमंत्री की ‘सुरक्षा में चूक’ का मुद्दा इस हफ्ते भी प्रमुखता से छाया रहा.

इंकलाब ने 9 जनवरी को अपने संपादकीय में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को इस घटना से संबंधित सभी दस्तावेज अपनी कस्टडी में लेने का निर्देश दिए जाने की सराहना की और कहा कि चूक की जांच पूरी तरह पक्षपातरहित तरीके से किया जाना बेदह अहम है. एक दिन पहले अखबार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खबर को पहले पन्ने पर छापा था.

मामले में जांच समिति के गठन संबंधी शीर्ष कोर्ट के फैसले पर अपनी 11 जनवरी की फ्रंट पेज रिपोर्ट में सियासत ने सब हेडिंग के साथ लिखा था कि कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पंजाब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए जाने पर नाराजगी जताई है. रोजनामा ने अगले दिन जांच समिति के नेतृत्व का जिम्मा जस्टिस इंदु मल्होत्रा को दिए जाने संबंधी खबर छापी.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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