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Wednesday, 29 May, 2024
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आग से सुरक्षा, काउंसलर, 16 साल से कम उम्र में दाखिला नहीं — कोचिंग सेंटरों के लिए नई सरकारी गाइडलाइंस

शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइंस अनियमित कोचिंग इंडस्ट्री के बारे में कई परेशानियों को दूर करने की कोशिश करती हैं, जिसमें फीस का स्ट्रक्चर, कदाचार और ट्यूटर्स की क्वालिफिकेशन जैसे मुद्दे शामिल हैं.

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नई दिल्ली: कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए 16 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित करने से लेकर केंद्रों में पर्याप्त बुनियादी ज़रूरतें निर्धारित करने, आग के सुरक्षा मानकों को पूरा करने और स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ के लिए प्रशिक्षित काउंसलर्स तक — शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइंस अनियमित कोचिंग इंडस्ट्री के बारे में कई परेशानियों के बारे में बात करती हैं.

16 जनवरी को जारी किए गए दिशानिर्देश — जो फीस के स्ट्रक्चर और ट्यूटर्स की क्वालिफिकेशन जैसे मुद्दों को भी संबोधित करते हैं — केवल ऑफलाइन कोचिंग सेंटर्स पर लागू होते हैं. इनका पालन नहीं करने पर ऐसे संस्थानों को दंड का सामना करना पड़ेगा और रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है.

दिशानिर्देशों का कोचिंग इंडस्ट्री, स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और ट्यूटर्स पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिसका बजट 58,000 करोड़ रुपये से अधिक है. अधिकारियों के मुताबिक, इस ढांचे से निजी कोचिंग सेंटरों के अनियंत्रित विस्तार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

सरकारी एडवाइज़री में कहा गया है, “निजी कोचिंग सेंटरों से संबंधित मुद्दे, विशेष रूप से छात्र आत्महत्या के बढ़ते मामलों में सलाह, आग से जुड़ी घटनाएं, सुविधाओं की कमी के साथ-साथ पढ़ाने के तरीकों के संदर्भ समय-समय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं.”

इन गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि अगर किसी कोचिंग सेंटर की एक से अधिक ब्रांच हैं, तो हरेक को स्वतंत्र रूप से रजिस्टर्ड करवाना होगा. “एक कोचिंग सेंटर की कई ब्रांच होने की स्थिति में, हरेक को एक अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा और हरेक ब्रांच के रजिस्ट्रेशन के लिए एक अलग आवेदन जमा करना होगा.”

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नेक्स्ट आईएएस के संस्थापक बी. सिंह और जिन माता-पिता और इंडस्ट्री विशेषज्ञों से दिप्रिंट ने बात की, उन्होंने कोचिंग इंडस्ट्री के लिए गाइडलाइंस जारी करने की सरकार की पहल की सराहना की, लेकिन फीस और ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों पर प्रभाव सहित कुछ चिंताएं भी उठाईं.

सिंह के अनुसार, एक अलग ब्रांच का रजिस्ट्रेशन मुश्किल होगा क्योंकि दिल्ली बुनियादी ढांचे संसाधनों की कमी वाला शहर है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि कईं सारे रजिस्ट्रेशन्स की ज़रूरत होगी. इससे भ्रष्टाचार शुरू हो सकता है क्योंकि रजिस्ट्रेशन करवाना इतना आसान नहीं होगा.”

नई गाइडलाइंस का अनुपालन करने की लागत स्पष्ट नहीं है और कुछ लोगों को चिंता है कि — दिशानिर्देशों के अधिक फीस पर रोक लगाने के बावजूद फीस में बढ़ोतरी हो सकती है.

सतीश जिनका बेटा दिल्ली में नीट की कोचिंग ले रहा है, ने कहा, “जब भी हम किसी स्टूडेंट की आत्महत्या की खबर देखते थे तो हमें बहुत चिंता होती थी. ये दिशा-निर्देश उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायक होंगे, लेकिन अगर फीस बढ़ती है, तो यह हमारे जैसे मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक समस्या होगी.”

कोचिंग इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा, “इन गाइडलाइंस का इरादा अच्छा है. हालांकि, कुछ चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है. सबसे पहले, अनुपालन लागत अस्पष्ट बनी हुई है. साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार कोचिंग संस्थानों को किसी भी सेवा में सुधार के लिए कोई सहायता प्रदान करेगी या नहीं.”

दिप्रिंट मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस की प्रमुख विशेषताओं के बारे में आपको बता रहा है.


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‘16 साल से कम उम्र में दाखिला नहीं’

नई गाइडलाइंस के तहत आयु सीमा 16 साल है, इसमें यह भी लिखा है कि स्टूडेंट्स केवल अपनी माध्यमिक स्कूल की परीक्षाओं के बाद ही दाखिला ले सकते हैं — जिसका मतलब है कि कक्षा 11 और 12 के छात्र, जेईई और नीट कोचिंग सेंटरों के लिए मुख्य लक्ष्य समूह, अब इसके लिए पात्र नहीं हो सकते हैं. इसके अलावा, ये भी कहा गया है कि कोचिंग का समय स्कूल के समय के साथ नहीं होना चाहिए.

इसके अलावा, “कोई भी कोचिंग सेंटर ग्रेजुएशन से कम योग्यता वाले ट्यूटर्स को नियुक्त नहीं करेगा. संस्थान कोचिंग सेंटरों में दाखिले के लिए माता-पिता को भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकते.”

नीट की कोचिंग लेने वाले डॉक्टर अतुल कुमार के मुताबिक नई गाइडलाइंस से कुछ बदलाव आ सकता है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “ये बच्चे बहुत कम उम्र में अपने घरों से बाहर निकलते हैं और इस प्रतिस्पर्धा के बाज़ार में कूद जाते हैं. उनमें से कुछ 12वीं कक्षा पूरी करने के एक साल बाद कोचिंग छोड़ देते हैं, लेकिन कई दोनों जारी रखते हैं. इन गाइडलाइंस के बाद हमें कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है, लेकिन प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है और लोग अपना कारोबार चलाने का कोई नया तरीका निकाल लेंगे.”

हालांकि, गाइडलाइंस केवल ऑफलाइन कोचिंग के लिए हैं. कुमार ने कहा, “ऑनलाइन में 5,000-6,000 रुपये में कोर्स उपलब्ध हैं. मुझे नहीं लगता कि उनके लिए कुछ है.”

सिंह ने यह भी कहा कि ऑनलाइन कोचिंग सेंटरों के लिए कोई स्पष्टता नहीं है कि क्या उन्हें स्कूल के घंटों के दौरान चलाया जा सकता है या नहीं. उन्होंने कहा, “अगर ये गाइडलाइंस केवल ऑफलाइन कोचिंग के लिए हैं, तो मेरा मानना है कि इसमें स्पष्टता होनी चाहिए और उन लोगों के बारे में क्या जो हाइब्रिड कोर्स चलाते हैं?”


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फीस स्ट्रक्टर और कदाचार

नई गाइडलाइंस कोचिंग संस्थानों द्वारा कदाचार के मुद्दे पर भी बात करते हैं, जिसमें कहा गया है कि किसी भी उल्लंघन के लिए उन पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है या उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है.

यह निर्दिष्ट किया गया है कि सेंटर नैतिक अधमता से जुड़े अपराधों के लिए सजा के इतिहास वाले किसी भी ट्यूटर को नियुक्त नहीं कर सकते हैं.

गाइडलाइंस संस्थानों को कोचिंग की गुणवत्ता, सुविधाओं या उनके छात्रों द्वारा प्राप्त परिणामों के बारे में झूठे या भ्रामक दावे करने से रोकती हैं.

पिछले साल सितंबर में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भी झूठे विज्ञापन और जुर्माने के लिए कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किया था.

बुनियादी ढांचा, सेफ्टी और छात्र कल्याण

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि कोचिंग संस्थानों को पर्याप्त जगह — एक कक्षा में प्रत्येक छात्र को न्यूनतम 1 वर्ग मीटर आवंटित करना — और बुनियादी ढांचा प्रदान करना होगा और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने होंगे. कोचिंग सेंटर भवन को फायर सेफ्टी कोड, भवन सुरक्षा कोड और अन्य मानकों का पालन करना होगा और उपयुक्त अधिकारियों से अग्नि और भवन सुरक्षा सर्टिफिकेट भी लेने होंगे.

यह ऐसे कई कोचिंग सेंटरों में आग लगने की सूचना मिलने के बाद आया है. पिछले साल, दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक संस्थान में आग लगने पर स्टूडेंट्स ने खुद को बचाने के लिए बिजली के तार का इस्तेमाल किया और खिड़कियों से कूद गए.

मुखर्जी नगर में रहने वाले यूपीएससी अभ्यर्थी श्याम शर्मा ने दिप्रिंट को बताया, “मुखर्जी नगर के इंस्टीट्यूट में जब आग लगी तो मैं पास ही था. यहां कई कोचिंग सेंटर इन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं और इसमें बड़ा जोखिम है. देखना होगा अब क्या बदलता है. कई संस्थानों में पढ़ने के लिए सैकड़ों स्टूडेंट्स एक साथ छोटे-छोटे हॉल में बैठते हैं.”

2019 में सूरत के एक इंस्टीट्यूट में आग लगने से 22 स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी.

दिशानिर्देश इस बात पर भी जोर देते हैं कि संस्थानों को अपने स्टूडेंट्स पर पढ़ाई के लिए बहुत अधिक दबाव न डाल कर उनके मेंटल हेल्थ को सुनिश्चित करना होगा और “संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में स्टूडेंट्स को लक्षित और निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए” एक तंत्र बनाना होगा.

इसमें प्रशिक्षित काउंसलर्स की नियुक्ति शामिल होगी. दिशानिर्देशों में कहा गया है, “मनोवैज्ञानिकों, काउंसलर्स के नाम और उनके सेवाएं देने के समय की जानकारी सभी स्टूडेंट्स और पैरेंट्स को दी जा सकती है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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