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Sunday, 8 February, 2026
होमदेशधमाके के कई दिनों बाद भी मेघालय की खदान के बाहर परिजन और सहकर्मी 'शव के इंतिज़ार' में बैठे हैं

धमाके के कई दिनों बाद भी मेघालय की खदान के बाहर परिजन और सहकर्मी ‘शव के इंतिज़ार’ में बैठे हैं

जैसे-जैसे बचाव दल सुरंगों में खुदाई कर रहे हैं, इलाके में 100 से ज़्यादा अस्थायी घर खाली पड़े हैं और ज़्यादातर मज़दूर भाग गए हैं. अंदर फंसे लोगों के सिर्फ़ परिवार वाले ही बचे हैं.

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खलीहरियात: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में एक कोयला खदान के पास चंद्र राय, उम्र 45 साल, पिछले दो दिनों से वहीं बैठे हैं. वह धमाके के वक्त दूसरी खदान पर थे, जो यहां से सिर्फ 30 मिनट की दूरी पर है. उन्होंने कई रेस्क्यू टीमों को आते देखा और कई शवों को ले जाते देखा, लेकिन उन्हें अपने साले का कोई पता नहीं चला. उनकी पत्नी लगातार फोन कर रही है और हालात पूछ रही है.

“वह तीन-चार महीने पहले काम के लिए यहां आया था. रोज़ 1,000 रुपये कमाता था और पैसे घर भेजता था. मैं बस उसके शव का इंतिज़ार कर रहा हूं. वह खदान के अंदर था और फोर्स उसे ढूंढने की कोशिश कर रही है,” राय ने दिप्रिंट से कहा. वह कोयला खनन के लिए खोदे गए एक कुएं के सामने चट्टान पर बैठे थे.

ईस्ट जयंतिया हिल्स में गुरुवार सुबह एक “रैट-होल” कोयला खदान में हुए धमाके में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है. शनिवार को दो और शव बरामद किए गए.

Labourers at the site of the coal mine blast in Meghalaya’s East Jaintia Hills | Praveen Jain | ThePrint
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में कोयला खदान विस्फोट वाली जगह पर मज़दूर | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

रैट-होल माइनिंग में जमीन के नीचे बहुत संकरे सुरंगनुमा रास्ते खोदे जाते हैं, जिन्हें “रैट होल” कहा जाता है. मजदूर इनमें झुककर या रेंगते हुए कोयला निकालते हैं. ज़्यादातर काम हाथ से किया जाता है, लेकिन सुरंग तोड़ने के लिए नियंत्रित धमाकों का भी इस्तेमाल होता है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 12 साल पहले मेघालय में रैट-होल कोयला खनन पर रोक लगा दी थी.

गुरुवार को पास की खदानों में काम कर रहे कुछ मजदूरों ने धमाके की आवाज़ सुनी, लेकिन शुरुआत में उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि ऐसे शोर उनके लिए आम थे. लेकिन जब लोगों की चीख-पुकार सुनी और मौतों की खबर मिली, तो वे सन्न रह गए.

खदान में हुए धमाके वाली जगह पर बचावकर्मी | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

“लोग इकट्ठा हो गए, परिवार आ गए, लेकिन सब बहुत डर गए. जो लोग बाहर थे, वे जल्दी मिल गए, लेकिन जो छोटी खदानों के अंदर थे, वे अब भी लापता हैं,” एक मजदूर ने कहा, जिसने नाम न बताने की शर्त रखी.

“आज हमने इन रैट-होल खदानों के अंदर गहराई से दो शव निकाले हैं. तीन बड़े कुएं खोदे गए थे और उनके अंदर कई छोटी सुरंगें हैं, और उनके भीतर भी सुरंगें हैं. यह एक जाल जैसा है. कुछ हिस्सों में पानी भरा हुआ है, जिससे मुश्किल हो रही है, लेकिन हमारा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है,” मौके पर मौजूद एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर एच. पी. एस. कंडारी ने दिप्रिंट से कहा.

खलीहरियात के सिविल अस्पताल के बाहर हताहतों की सूची के साथ स्थानीय पुलिस | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

यहां काम करने वाले ज़्यादातर मजदूर भारत के अलग-अलग हिस्सों से हैं, जिनमें असम और पश्चिम बंगाल शामिल हैं, साथ ही नेपाल से भी लोग आए हैं. खनन इलाके में बनी 100 से ज़्यादा अस्थायी झोपड़ियां अब खाली पड़ी हैं, क्योंकि ज़्यादातर मजदूर भाग चुके हैं. सिर्फ उन लोगों के परिवार बचे हैं, जो खदान के अंदर फंसे हुए हैं और शवों का इंतिज़ार कर रहे हैं.

कुछ मजदूरों ने कहा कि वे इतनी दूर इसलिए आए थे क्योंकि यहां मिलने वाला कोयला अच्छी गुणवत्ता का है और पैसे भी ठीक मिलते हैं.

“हम इतनी दूर इसलिए आए क्योंकि कोयले की क्वालिटी अच्छी है और पैसा भी अच्छा मिलता है. कभी-कभी दिन-रात काम करके 3,000 रुपये तक कमा लेते हैं,” तारा मुंगेट ने कहा, जो दो महीने पहले खदान में काम करने आए थे.

मुंगेट पहली बार खनन के काम के लिए यहां आए थे, लेकिन अब उसने नेपाल लौटकर कोई और काम ढूंढने का फैसला किया है.

खदान | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

कोयला खदानें घने जंगल के अंदर गहराई में स्थित हैं. रास्ते कोयले की धूल से भरे हुए हैं और बहुत खड़े और उबड़-खाबड़ हैं. वहां पहुंचने के लिए फोर-व्हील ड्राइव गाड़ियों की जरूरत होती है. आम गाड़ियां जंगल के अंदर तक नहीं जा सकतीं.

“हम दो महीने पहले यहां आए थे. खाना और ज़रूरी सामान मिलता था. कुछ लोग अपने परिवार के साथ रहते थे और सब मिलकर खाते थे. अब सब खाली है. जिन्हें गाड़ी नहीं मिली, वे नंगे पांव अपना सामान उठाकर भागे,” मुंगेट ने कहा.

रैट-होल माइनिंग पर एक नज़र

पूरी पहाड़ी पर रैट-होल माइनिंग के निशान हैं. यह कोयला निकालने का एक गैरकानूनी तरीका है. एक क्रेन से एक बड़ा सीधा कुआं खोदा जाता है. मजदूर उस कुएं से नीचे उतरते हैं, कभी-कभी 100 फीट तक. वहां से वे 2 से 3 फीट चौड़ी संकरी सुरंगें खोदते हैं, जब तक कोयले की परत मिलती रहती है.

“मजदूर इन संकरी सुरंगों में रेंगकर कोयला निकालते हैं. एक सुरंग से कई और सुरंगें बनती जाती हैं, जिससे जमीन के नीचे जाल जैसा नेटवर्क बन जाता है. इनमें से कुछ 300 से 400 फीट तक जाती हैं,” मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा.

फिलहाल तीन एनडीआरएफ टीमें मौके पर तैनात हैं और शवों की तलाश कर रही हैं. स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और स्थानीय पुलिस भी मौजूद है. ज़रूरत पड़ने पर मदद के लिए मेडिकल टीमें भी हैं.

A blast device wire at the mining site | Praveen Jain | ThePrint
माइनिंग साइट पर एक ब्लास्ट डिवाइस का तार | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

इलाका घने जंगल के बीच है. चारों तरफ धूल से ढकी पहाड़ियां और पेड़ ही दिखते हैं. रास्ते में सैकड़ों नीले तिरपाल और बांस से बनी झोपड़ियां दिखती हैं, जिनमें से ज़्यादातर अब खाली हैं. एक झोपड़ी के अंदर बांस की लकड़ियों और तख्तों से बने करीब छह अस्थायी बिस्तर लगे हुए थे.

“हम सब काम के बाद साथ में सोते थे. अब बहुत से लोग मर चुके हैं और उनका सामान रह गया है. दवाइयां और कपड़े अंदर पड़े हैं, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं है. कौन आएगा. उनके परिवार बहुत दूर रहते हैं,” मुंगेट ने झोपड़ियों की ओर इशारा करते हुए कहा.

राय और मुंगेट ने कई शवों को खदान से अस्पताल ले जाते देखा. हर बार उनकी सांसें थम जाती थीं, यह सोचकर कि कहीं यह उनका कोई रिश्तेदार न हो. हर बार जब ऐसा नहीं होता, तो उन्हें राहत भी मिलती और दर्द भी फिर से लौट आता.

“अगर मुझे शव मिल गया होता तो शायद आसान होता. अब हर शव के साथ मुझे वही सदमा दोबारा झेलना पड़ता है. मैंने इतने शव देखे हैं. ये मुझे बहुत लंबे समय तक डराते रहेंगे,” राय ने कहा, जब वह उस खदान की ओर देख रहे थे जहां एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

मौके पर बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वाड के अधिकारी | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

इस हादसे पर कई राजनीतिक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है. मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे. हालांकि, पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है.

ब्लास्ट वाली जगह पर माइनिंग दस्ताने | प्रवीण जैन | दिप्रिंट

“पैसा अलग बात है. कोई हमसे मिलने तक नहीं आया. हम गरीब लोग हैं, हमारी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है,” राय ने कहा.

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा द्वारा अवैध खदान चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा करने के तुरंत बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. उनकी पहचान फोर्मे चिरमांग और शमेही वार के रूप में हुई है. दोनों को कोर्ट में पेश किया गया और तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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