scorecardresearch
Thursday, 9 April, 2026
होमदेशAI-171 प्लेन क्रैश के पीड़ित परिजनों ने PM मोदी को लिखा पत्र, ब्लैक बॉक्स डेटा पब्लिक करने की अपील

AI-171 प्लेन क्रैश के पीड़ित परिजनों ने PM मोदी को लिखा पत्र, ब्लैक बॉक्स डेटा पब्लिक करने की अपील

यह पत्र, जिसे AAIB, DGCA और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजा गया है, में कहा गया है कि अगर डेटा को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम उसे पीड़ितों के परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाना चाहिए.

Text Size:

अहमदाबाद: एयर इंडिया के विमान हादसे में 260 लोगों की मौत के दस महीने बाद, पीड़ित परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग की है.

एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171, जो बोइंग 787-8 विमान था और लंदन जा रही थी, 12 जून 2025 को यहां सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में गिर गई.

विमान में आग लग गई, जिसमें 242 में से 241 यात्रियों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई.

गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से करीब 30 पीड़ित परिवार शनिवार को अहमदाबाद में मिले और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CVR और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी ‘ब्लैक बॉक्स’ का डेटा जारी करने की मांग की, ताकि हादसे की सच्चाई सामने आ सके.

उन्होंने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि हादसा क्यों हुआ और क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी.”

इस पत्र की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी गई. पत्र में कहा गया है कि अगर ब्लैक बॉक्स डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे पीड़ित परिवारों को निजी तौर पर दिखाया जाए.

निलेश पुरोहित, जिन्होंने अपने 24 साल के बेटे को इस हादसे में खो दिया, ने कहा, “मेरा घर अब खाली लगता है. कोई भी मुआवजा इस कमी को पूरा नहीं कर सकता. हमें पैसे नहीं चाहिए, हम सिर्फ जानना चाहते हैं कि क्या हुआ.”

कई लोगों के लिए दर्द इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उन्हें लगता है कि संस्थाओं से उन्हें पूरा सहयोग नहीं मिल रहा.

वासद की किंजल पटेल, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया, ने एयर इंडिया की उस वेबसाइट के इस्तेमाल में दिक्कत बताई, जो हाल ही में परिवारों को सामान ढूंढने में मदद के लिए बनाई गई है.

उन्होंने कहा, “इसमें 25,000 से ज्यादा सामान सूची में हैं, लेकिन तस्वीरें साफ नहीं हैं. कुछ भी ढूंढना लगभग नामुमकिन है.”

दूसरे लोगों ने संचार के आसान साधनों की कमी की शिकायत की. खेड़ा के रोमिन वोरा, जिन्होंने अपनी मां, भाई और बेटी को खो दिया, ने बताया कि जो लोग डिजिटल साधनों से परिचित नहीं हैं, उन्हें काफी परेशानी हो रही है.

उन्होंने कहा, “सिर्फ एक ईमेल आईडी है और जवाब आने में 15 दिन तक लग जाते हैं. गांवों के कई लोग ईमेल चलाना भी नहीं जानते.”

उन्होंने यह भी कहा कि वेबसाइट पर निजी सामान को सार्वजनिक रूप से दिखाना ठीक नहीं है और यह संवेदनहीन लगता है.

एयरलाइन की तरफ से जवाब का इंतिजार है.

AAIB ने पिछले साल जुलाई में अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट दे दी थी और उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट जून में, हादसे की पहली बरसी के आसपास, पेश की जाएगी.


यह भी पढ़ें: कल्याणवाद और भविष्य के भ्रम चाहे जितने हों, वे भारतीयों की गरीबी दूर नहीं कर सकते: बीएस सान्याल


 

share & View comments