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Friday, 14 June, 2024
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ममता के ‘करीबी’ को राशन ‘घोटाले’ में ED ने किया गिरफ्तार, कौन हैं TMC मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी पर्यावरण मंत्री मलिक को 20 घंटे की पूछताछ के बाद शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वह अस्पताल में भर्ती हैं.

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कोलकाता: शुक्रवार दोपहर को उस वक्त बड़ा ड्रामा सामने आया, जब खचाखच भरी विशेष एमपी/एमएलए अदालत में पश्चिम बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया.

जब न्यायाधीश ने उन्हें ईडी की हिरासत में दिया, तो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता को उल्टी होने लगी, वह अपनी कुर्सी से गिर गए और बेहोश हो गए. उनकी बेटी मदद के लिए चिल्लाते हुए उसकी ओर दौड़ी. कोलकाता स्थित आवास पर 20 घंटे की पूछताछ के बाद पर्यावरण मंत्री को कथित राशन वितरण घोटाले से जुड़े मामले में शुक्रवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया.

यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने के कुछ घंटों बाद हुई. इस दौरान ईडी उनके मंत्री से पूछताछ कर रही थी और उनके आवास पर छापेमारी कर रही थी. उन्होंने दावा किया, “बालू (मलिक) को शुगर (मधुमेह) है. अगर उनकी मौत हो गई तो हम सीबीआई और ईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. वे लोगों पर अत्याचार करते हैं और उनसे लोगों के नाम लेने के लिए कहते हैं. यह अत्याचार है.”

65 वर्षीय मलिक को 6 नवंबर तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वह अस्पताल में भर्ती हैं.

बनर्जी के करीबी सहयोगी मलिक को प्यार से “बालू” कहा जाता है. लगभग हमेशा अपनी पहचान वाली सफेद शर्ट, पतलून और जूते पहनने वाले, कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना के ताकतवर नेता 2011 में बंगाल में तृणमूल के सत्ता में आने के बाद से लगातार 10 वर्षों तक राज्य के खाद्य मंत्री रहे हैं. 2021 में , उन्हें पर्यावरण मंत्रालय दिया गया. खाद्य मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कथित घोटाला हुआ था.

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मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि मलिक मटुआ समुदाय के लोग उनकी ताकत हैं और वह उनके बीच काफी लोकप्रिय हैं, जिसका राज्य के लगभग 50 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव है. इस समुदाय को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल में भाजपा के राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के रूप में प्रतिनिधित्व मिला. इससे टीएमसी के अंदर अनुसूचित जाति समुदाय का महत्त्व और ज्यादा बढ़ गया.

बर्धमान के मोंटेश्वर में जन्मे, तृणमूल के दिग्गज नेता मलिक अगूरी समुदाय से हैं जिसके बारे में माना जाता है कि यह एक योद्धा समुदाय है जिसके पूर्वज राजस्थान से हैं. एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने दिप्रिंट को बताया कि वह उन कई नेताओं में से एक थे जिन्होंने बनर्जी का समर्थन करने के लिए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था, जिनसे उनकी मुलाकात छात्र राजनीति के दिनों में हुई थी.

एक टीएमसी विधायक ने कहा, “बालू ने कभी भी कैमरे पर बात नहीं की जब तक कि यह उनके निर्वाचन क्षेत्र या जिले से संबंधित न हो. वह ममता योग्य सैनिक की तरह हैं. वास्तव में, 2019 में जब सांसद काकोली घोष दस्तीदार मलिक के जिले से पीछे चल रहे थे, तो उन्होंने घोषणा की थी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन 2021 में उन्हें टिकट दिया गया.”


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टीएमसी में मल्लिक

तृणमूल नेताओं के अनुसार, 2011 के चुनावों के करीब, मल्लिक ने ही बनर्जी को मटुआ कुलमाता बीनापानी देवी या बोरो मां से मिलवाया था. उस वक्त वह उत्तर 24 परगना के जिला अध्यक्ष थे. 2011 में, मटुआओं ने टीएमसी को आशीर्वाद दिया, जो अंततः राज्य में वामपंथी शासन को पलट कर पहली बार सत्ता में आई.

ममता की पहली कैबिनेट में मल्लिक को खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय दिया गया था. उनके कार्यकाल में सरकार ने न केवल डिजिटल राशन कार्ड बल्कि गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिए 2 रुपये में 1 किलो चावल की लोकप्रिय राशन योजना भी शुरू की. उन्हें इस योजना के तहत कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

महामारी के दौरान उन्हें तब झटका लगा जब राशन डीलरों ने खाद्यान्न की आपूर्ति न होने के कारण दुकानों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. 2020 में, उन्हें टीएमसी जिला अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया और 2021 में, खाद्य मंत्रालय से हटाकर पर्यावरण मंत्रालय और गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया. हालांकि, बदलाव का कोई कारण नहीं बताया गया.

विधायक ने कहा, “मलिक अक्सर विवादास्पद टिप्पणियां करते थे जिससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ती थी. फटकार लगने के बाद उन्होंने सोच समझकर शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया. लेकिन पार्टी ने पार्थ चटर्जी (जिन्हें कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तारी के बाद पार्टी पदों से निलंबित कर दिया गया था) के मामले के विपरीत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.“

(संपादनः शिव पाण्डेय)

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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