नई दिल्ली: मौजूदा ग्लोबल हालात और ऊर्जा से जुड़ी अनिश्चितता को देखते हुए, केंद्र सरकार ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी केरोसिन की सप्लाई की अनुमति दे दी है, जिन्होंने पहले खुद को “केरोसिन मुक्त” घोषित किया था.
रविवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बेहतर गुणवत्ता वाला केरोसिन तेल बांटा जा सकेगा. यह कदम उन इलाकों में खाना पकाने और रोशनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है, जहां सामान्य परिस्थितियों में केरोसिन का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था.
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “यह नोटिफिकेशन खास तौर पर उन राज्यों के लिए है जिन्होंने खुद को ‘केरोसिन मुक्त’ घोषित किया था. इसलिए इसमें यह बताया गया है कि जरूरत पड़ने पर इन इलाकों में केरोसिन कैसे सप्लाई किया जाएगा.”
इस नोटिफिकेशन के तहत, हर जिले में अधिकतम दो फ्यूल स्टेशन—खासकर सरकारी तेल कंपनियों के—5000 लीटर तक केरोसिन स्टोर कर सकते हैं. यह व्यवस्था सिर्फ घरों में खाना बनाने और रोशनी के लिए होगी और 60 दिन या अगले आदेश तक लागू रहेगी.
यह फैसला सरकार के उस पहले के निर्णय के बाद आया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी नियमित तिमाही सप्लाई से अलग 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन देने की बात कही गई थी.
सरकार ने LPG की मांग में अचानक बढ़ोतरी की भी बात कही, जिसका कारण घबराहट में की गई बुकिंग बताया गया. सुजाता शर्मा ने कहा, “पिछले दो दिनों में करीब 1.04 करोड़ LPG बुकिंग हुई हैं, जिनमें से लगभग 92 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हो चुकी है.”
कमर्शियल LPG के बारे में सरकार ने कहा कि इसकी उपलब्धता काफी बढ़ाई गई है. “जैसा कि आप जानते हैं, सरकार ने कमर्शियल LPG की उपलब्धता करीब 70 प्रतिशत बढ़ा दी है. इसमें ढाबों, रेस्टोरेंट, इंडस्ट्रियल कैंटीन और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी जा रही है,” शर्मा ने कहा.
डिस्ट्रिब्यूशन की सीमा में ढील देने के बाद, कमर्शियल LPG की सप्लाई बढ़कर रविवार तक 41,000 टन हो गई, जो 26 मार्च को 30,000 टन थी.
उर्वरक उत्पादन प्रभावित, लेकिन स्टॉक पर्याप्त
वहीं, उर्वरक विभाग ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण देश में यूरिया उत्पादन पर असर पड़ा है. संयुक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि उत्पादन में शुरुआत में रोजाना 30,000 से 35,000 टन की कमी आई.
इसके बावजूद, सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन से पहले कुल उपलब्धता पर्याप्त है.
उन्होंने कहा, “आगामी खरीफ सीजन के लिए कुल जरूरत 390 लाख टन है, जबकि पिछले साल इसी सीजन में 361 लाख टन की बिक्री हुई थी.” उन्होंने यह भी बताया कि अभी स्टॉक 180 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले साल 147 लाख टन था, यानी स्थिति “मजबूत” है.
सरकार ने कहा कि अप्रैल और मई आमतौर पर स्टॉक बढ़ाने के महीने होते हैं, और अब खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी उर्वरक मंगाने की कोशिश की जा रही है. “सरकार रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है,” शर्मा ने कहा.
आने वाला LPG कार्गो
क्षेत्रीय तनाव के बीच, भारत के दो LPG जहाज—BW Tyr और BW Elm—करीब 94,000 मीट्रिक टन गैस लेकर 31 मार्च और 1 अप्रैल को भारत पहुंचने वाले हैं. ये जहाज क्रमशः मुंबई और न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर लगेंगे.
हालांकि, समुद्री रास्तों में दिक्कतें अभी भी बनी हुई हैं. पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अभी 18 भारतीय जहाज, जिनमें 485 भारतीय नाविक हैं, होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में फंसे हुए हैं.
इसके अलावा, भारत आने वाले तीन विदेशी LPG जहाज, चार कच्चे तेल के जहाज और तीन LNG जहाज भी इसी क्षेत्र में फंसे हुए हैं.
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