Thursday, 2 February, 2023
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RBI गवर्नर ने कहा- डिजिटल करेंसी से कारोबार और लेन-देन के तरीके में आएगा बड़ा बदलाव

आरबीआई प्रमुख ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण का संपूर्ण डिजिटलीकरण साल 2023 तक राष्ट्रव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा.

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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) से व्यापार करने के तरीकों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. बुधवार को फिक्की के बैंकिंग कॉन्फ्रेंस एफआईबीएसी को संबोधित करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि कल हमने अपनी डिजिटल मुद्रा, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) परियोजना का परीक्षण शुरू किया. यह वास्तव में हमारे देश में मुद्रा के इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था. आगे यह और ऐतिहासिक बनेगा. जहां तक पूरी अर्थव्यवस्था के कामकाज का संबंध है, यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी. आरबीआई प्रमुख ने आगे कहा कि आरबीआई दुनिया के उन कुछ केंद्रीय बैंकों में से है जिन्होंने यह पहल की है.

एफआईबीएसी एक वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन है, जो फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा आयोजित किया जाता है.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि निकट भविष्य में सीबीडीसी को पूरी तरह लॉन्च करने की इच्छा है. सीबीडीसी केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए मुद्रा नोटों का एक डिजिटल रूप है.

दास ने घोषणा की कि सीबीडीसी परीक्षण का रिटेल हिस्सा इस महीने के अंत में लॉन्च किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हम सीबीडीसी को पूर्ण रूप से लॉन्च करने के लिए अलग तारीख की घोषणा करेंगे लेकिन यह तारीख क्या होगी, मैं अभी नहीं बता पाउंगा. इसे बड़े पैमाने पर लॉन्च किया जाएगा इसलिए हम बहुत सावधानी से आगे बढ़ना चाहते हैं. यह पहली बार हो रहा है. हम बहुत जल्दी में नहीं होना चाहते, हम अनुभव से सीखना चाहते हैं.

आरबीआई प्रमुख ने आगे कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण का संपूर्ण डिजिटलीकरण साल 2023 तक राष्ट्रव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा. हमारा प्रयास है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो यह न सिर्फ केसीसी ऋण बल्कि एसएमई ऋणों के लिए भी लॉन्च किया जाएगा. हम उम्मीद करते हैं कि 2023 तक यह पूरे भारत में लॉन्च हो जाएगा.

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आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋणों को एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण पायलट परियोजना के तहत सितंबर 2022 में मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के चयनित जिलों में क्रमशः यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और फेडरल बैंक जैसे भागीदार बैंकों के साथ मिलकर संबंधित राज्य सरकार के सहयोग से शुरू किया है.

दास ने कहा कि केसीसी ऋण के डिजिटलीकरण हो जाने से क्रेडिट प्रक्रिया में तेजी तथा वंचित ग्रामीण आबादी में ऋण प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. जब इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा तो इसमें पूरी तरह से लागू होने पर, इसमें देश की ग्रामीण ऋण वितरण प्रणाली को बदलने की क्षमता है.


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