Monday, 27 June, 2022
होमदेशअर्थजगतयहां ओला फ्यूचर फैक्ट्री में है भविष्य, EV को बढ़ावा देने के लिए AI और महिला वर्कर्स ने मिलाए हाथ

यहां ओला फ्यूचर फैक्ट्री में है भविष्य, EV को बढ़ावा देने के लिए AI और महिला वर्कर्स ने मिलाए हाथ

TN में ओला फ्यूचरफैक्ट्री को जो चीज़ अनोखा बनाती है, वो है इसका आकार, पैमाना, महत्वाकांक्षा, मांग- और ये तथ्य कि इसके स्टाफ में तक़रीबन सभी वर्कर्स महिलाएं हैं.

Text Size:

कृष्णागिरी: ऐसे देश में जहां व्यवसाय करने की आसानी और परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की गति की निजी क्षेत्र में भी बाधाओं, चुनौतियों, बरसों और दशकों के रूप में बात की जाती है, वहां 500 एकड़ की एक फ्यूचर फैक्ट्री, बेंगलुरू की गहमा गहमी और ट्रैफिक की आफत से क़रीब तीन घंटे की दूसरी पर, एक झलक दिखाती है कि अगर सब चीज़ें अपनी जगह सही बैठ जाएं, तो भारतीय मैन्युफेक्चरिंग का भविष्य कैसा हो सकता है.

ये है तमिलनाडु के कृष्णागिरि ज़िले में ओला फ्यूचर फैक्ट्री, जो पड़ोसी कर्नाटक की सीमा के इस पार है, जहां टेक्नोलॉजी कंपनियां दशकों से, भविष्य में क़दम रखने में विश्व दिग्गज कंपनियों की सहायता करती आ रही हैं.

ओला फ्यूचर फैक्ट्री ई-स्कूटर्स यानी बिजली-चालित स्कूटर्स बनाती है, एक ऐसे भविष्य का गतिशीलता समाधान तो तेज़ी से हमारा वर्तमान बन रहा है. उस मायने में ये कोई पथ-प्रदर्शक नहीं है, चूंकि कुछ दूसरी कंपनियां थोड़ा पहले ही इस सवारी पर चढ़ गईं थीं.

लेकिन ओला फ्यूचर फैक्ट्री को जो चीज़ अनोखा बनाती है, वो है इसका आकार, पैमाना, महत्वाकांक्षा, मांग- और ये तथ्य कि इसके स्टाफ में तक़रीबन सभी वर्कर्स महिलाएं हैं. अपनी पूरी क्षमता पर इस फैक्ट्री का लक्ष्य, हर दो सेकंड में एक स्कूटर बनाने का है.

ये सब इस साल जनवरी में शुरू हुआ, जब ओला समूह ने, जो भारत के शहरों में अपनी राइड शेयरिंग सेवाओं के लिए काफी मशहूर है- तमिलनाडु सरकार से ज़मीन ख़रीदी. पिछले हफ्ते, सिर्फ 11 महीने बाद ही, कंपनी ने पहले 100 ओला एस1 ई-स्कूटर तैयार कर दिए.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

ओला समूह के सीईओ और अध्यक्ष भाविश अग्रवाल और उनकी टीम के लिए, इसे समय के खिलाफ दौड़ कहना सरासर कम बयानी होगी.

‘10 लाख से अधिक बुकिंग’

अग्रवाल के अनुसार ओला के ई-स्कूटरों की मांग इतनी अधिक है, कि बाज़ार में विकल्प होने के बावजूद, ओला के एस1 और एस1 प्रो के 10 लाख से अधिक आरक्षण हो चुके हैं. एक ओला ई-स्कूटर बुक कराने का विकल्प, कंपनी के एप और वेबसाइट पर अभी भी खुला है.

जैसा कि अग्रवाल ने बयान किया, लोगों की प्रतिक्रिया ख़ुद भारत के इस गतिशीलता दिग्गज के लिए भी ज़बर्दस्त थी. अब कंपनी के सामने चुनौती है, डिलीवरी शेड्यूल्स के मुताबिक़ ऑर्डर्स को पूरा करना.

एक ताज़ा निर्मित किया हुआ एस1 स्कूटर दिखाते हुए, भाविश अग्रवाल ने दिप्रिंट से कहा, ‘फोर-व्हीलर्स के लिए टेस्ला को छोड़कर, हमारे पास कहीं भी टू-व्हीलर्स के लिए कोई विज़न नहीं है. हम उसे बदलना चाहते हैं.’

11 महीनों में, ओला ने एक पूरी तरह से संचालित निर्माण इकाई की बुनियाद रखी, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन कंपनियों के साथ संबंध बनाए, नज़दीकी संस्थानों से युवा महिला ग्रेजुएट्स को हायर किया, स्टाफ को प्रशिक्षित किया, आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस को उत्पादन के साथ एकीकृत किया, और नए युग के स्कूटर तैयार कर दिए, जिनके लिए उनका दावा है कि वो अपनी सबसे नज़दीकी प्रतिस्पर्धी से 30 प्रतिशत अधिक ताक़तवर है.


यह भी पढ़ेंः NHAI का 2023 के लिए टार्गेट—हर 40-60 km पर ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन, 40,000 किमी हाईवे कवरेज होगा


‘पहली पीढ़ी की करियर महिलाएं’

चाहे पेंट शॉप हो, सब-असेम्बली लाइन हो, वेल्डिंग सेक्शन्स हों, या बैटरी अथवा ट्रीटमेंट सुविधाएं हों- फैक्ट्री में महिलाओं का वर्चस्व है.

ओला के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर वरुण दूबे ने दिप्रिंट से कहा, ‘हम पास के कॉलेजों और डिप्लोमा संस्थानों में गए, और महिला ग्रेजुएट्स को फ्यूचर फैक्ट्री में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया. हमारी बहुत सी स्टाफ पहली पीढ़ी की करियर महिलाएं हैं’.

काफी हद तक महिला श्रमबल में, मैथ्स और साइंस ग्रेजुएट्स की भरमार है, और बहुतों के पास इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा है.

फ्यूचर फैक्ट्री की अधिकतर महिलाएं कृष्णागिरी, धर्मापुरी, और होसूर जैसे छोटे शहरों से आती हैं. ओला फ्यूचर फैक्ट्री में शिफ्ट मैनेजर्स, टेस्ट राइडर्स, असैम्बलर्स और ट्रेनर्स के नाते, अधिकांश युवा महिलाओं के लिए ये पहली नौकरी है.

‘भविष्य की नींव’

निर्माण सुविधा का नाम- ओला फ्यूचर फैक्ट्री- तय करते हुए, भाविश अग्रवाल ने अपनी टीम से कहा कि ‘(ऐसा) इसलिए है कि हम यहां भविष्य की बुनियाद रख रहे हैं’.

इस साल सितंबर में, अग्रवाल ने ऐलान किया कि ओला फ्यूचर फैक्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी, सबसे टिकाऊ, और सबसे आधुनिक टू-व्हीलर फैक्ट्री होगी.

कारख़ाने के आसपास 100 एकड़, और मेगा-ब्लॉक के बीच में दो एकड़ वन आवरण के साथ, फैक्ट्री ने ‘हरियाली लाओ’ के लक्ष्य को साकार कर दिया है.

और, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स पर अधिक निर्भरता के साथ, फैक्ट्री का लक्ष्य है कि इसकी बिजली की 20 प्रतिशत ज़रूरत, छतों पर लगे सोलर पैनल्स से पूरी की जाएगी.

अपनी पूरी क्षमता पर, ओला फ्यूचर फैक्ट्री का इरादा 10,000 महिलाओं को रखकर, हर साल 1 करोड़ ई-स्कूटर्स का उत्पादन करना है. ये संख्या विशाल लग सकती है, लोकिन अग्रवाल की टीम को विश्वास है कि 2023 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा.

फिलहाल अपने इच्छित आकार और क्षमता के एक तिहाई पर काम कर रही ओला फ्यूचर फैक्ट्री, तेज़ी से विस्तार करते हुए अतिरिक्त मैन्युफेक्चरिंग लाइन्स, सप्लायर पार्क्स, और बैटरी सुविधा स्थापित कर रही है.

ई-स्कूटर्स के डिलीवरी शेड्यूल्स को पूरा करने के लिए, स्टाफ हर रोज़ तीन शिफ्टों में काम करता है. कंपनी के अनुसार, इस साल सितंबर में ख़रीद के लिए खोले गए दो दिन के भीतर, कंपनी ने 1,100 करोड़ रुपए मूल्य के ई-स्कूटरों की बिक्री की.

मेगा-ब्लॉक में पैदल चलने से, विद्युत वाहन (ईवी) निर्माण का जल्दी से एक शैक्षिक भ्रमण हो जाता है. अग्रवाल ने दिप्रिंट को बताया, ‘हमें उम्मीद है कि एक बार फैक्ट्री का पूरी क्षमता पर विस्तार हो जाए, तो हम स्टडी टुअर्स शुरू करेंगे’.

इन प्रस्तावित स्टडी टुअर्स के लिए, ओवरहेड प्लेटफॉर्म्स डिज़ाइन किए जा रहे हैं.

एआई (आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस) पहले ही फ्यूचर फैक्ट्री का एक आकर्षण बन चुका है. ‘स्कूटर किट्स’ ले जाने के लिए तैनात मोशन-सेंसर रोबोट्स से लेकर स्वचालित वेल्डिंग जायंट्स तक, स्टाफ और मशीन पूरे सामंजस्य के साथ काम करते हैं.

इस साल फरवरी में, ओला ने अपनी फैक्ट्री पर एबीबी रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन सॉल्यूशंस के साथ साझेदारी का ऐलान किया. भवीश अग्रवाल की टीम को उम्मीद है, कि भविष्य में भी वो अपने स्कूटरों के लिए मोशन सेंसर्स को एकीकृत कर पाएगी.


यह भी पढ़ेंः वायु प्रदूषण: इलेक्ट्रिक वाहन की पॉलिसी अभी तक लागू नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब


मांग और आपूर्ति

16 जनवरी 2021 से, जब ओला ने ज़मीन ख़रीदी, 15 अगस्त तक जब उन्होंने अपना पहला ई-स्कूटर बनाया, और 15 दिसंबर तक जब उन्होंने अपने पहले 100 वाहनों की डिलीवरी शुरू की- ये एक लंबा सफर रहा है.

अग्रवाल ने दिप्रिंट को बताया, ‘हमारे पास 10 लाख से अधिक के आरक्षण हैं.’

लेकिन, ‘आरक्षण’ केवल संभावित ख़रीदार की ओर से ख़रीदने की रूचि का इज़हार होता है.

सितंबर की ख़रीद विण्डो के दौरान वास्तविक बिक्री, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया, क़रीब 1,100 करोड़ रुपए मूल्य की थी. संख्या का अनुमान लगाएं तो फिलहाल ओला के पास, क़रीब 90,000 स्कूटर्स के ऑर्डर्स हैं, जिन्हें कंपनी अगले दो महीनों में पूरा करने की उम्मीद कर रही है.

वरुण दूबे ने कहा, ‘हमारी सेवा सीधे-ग्राहकों-तक मॉडल की है, इसलिए इसमें कोई डीलरशिप्स नहीं हैं. अगर वाहन को सर्विस की दरकार भी है, तो ग्राहक को बस ये करना है कि एप पर एक स्लॉट बुक करे, और हम उसके दरवाज़े पर ही सर्विस मुहैया कराएंगे.’

आरक्षण का विकल्प, ख़रीद विण्डो, भुगतान विण्डो वग़ैरह सब ओला का तरीक़ा हैं, मांग को सरल व कारगर बनाने तथा मैन्युफेक्चरिंग और डिलीवरी शेड्यूल्स का अनुमान लगाने का. ओला का कहना है कि आरक्षण विकल्प से, स्कूटर ख़रीदने वालों को ख़रीद विण्डो के दौरान प्राथमिकता का अंदाज़ा हो जाता है. अगली ख़रीद विण्डो फरवरी में खुलनी तय है.

विद्युत वाहनों को बढ़ावा

भाविश अग्रवाल इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं, कि 2025 तक पेट्रोल से चलने वाले दुपहिया वाहनों को, चलन से बाहर कर दिया जाए.

सरकार की करों की नीची दरें और विद्युत वाहनों पर सब्सिडी, ज़्यादा लोगों को ईवीज़ के बारे में सोचने को प्रोत्साहित कर रही हैं, लेकिन तैयारी का सवाल अभी भी बना हुआ है.

इस महीने संसद के भीतर अपने लिखित जवाब में, केंद्रीय सड़क और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में कुल 8.7 लाख पंजीकृत विद्युत वाहन हैं, जिनमें से 44 प्रतिशत उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में हैं.

अग्रवाल ने कहा कि बेंगलुरू और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में, ई-स्कूटर्स की मांग बहुत अधिक है, लेकिन ओला के पास शहर-वार मांग के आंकड़े नहीं हैं.

बृहत बेंगलुरू महानगर पालिके (बीबीएमपी) कमिश्नर गौरव गुप्ता ने दिप्रिंट से कहा, ‘जो लोग विद्युत वाहन इस्तेमाल करते हैं, वो उन्हें घर पर चार्ज करते हैं, और शहर के अंदर चलाते हैं. इसका मतलब है कि चार्ज ईवी की रेंज के अंदर बना रहता है, और सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग प्वॉयंट्स की ज़्यादा ज़रूरत नहीं है. लेकिन, आपात स्थितियों के लिए हम पार्किंग स्थलों और सरकारी दफ्तरों पर चार्जिंग प्वॉयंट्स स्थापित करने पर ग़ौर कर रहे हैं’.

उन्होंने आगे कहा कि बहुत से मामलों में ईवी निर्माता भी, पेट्रोल बंक्स और टेक कंपनियों जैसे निजी व्यवसायों के साथ मिलकर, चार्जिंग प्वॉइंट्स लगा रहे हैं.

(इस खबर अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


यह भी पढ़ेंः दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 100 चार्जिंग स्टेशन बनाने का टेंडर निकाला


 

share & View comments