नई दिल्ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) की जगह लेने वाले विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के लिए यूनियन बजट में 95,692 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया गया है.
कुल मिलाकर ग्रामीण विकास विभाग का बजट 2025-26 में 1,87,754.53 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 1,94,368.81 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें 3.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह घटकर 1,86,995.61 करोड़ रुपये रह गया था. अब वीबी-जी रैम जी का बजट ग्रामीण विकास विभाग के कुल बजट का 49.18 प्रतिशत है.
इसी समय मनरेगा के लिए बजट आवंटन 2025-26 में 86,000 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 30,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह पिछले साल की राशि का करीब एक-तिहाई है. जबकि 2025-26 में इस योजना का संशोधित बजट अनुमान बढ़कर 88,000 करोड़ रुपये हो गया था.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में इस कानून का कोई जिक्र नहीं किया.
मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) और नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इन्फॉर्मेशन (NCPRI) के संस्थापक सदस्य निखिल डे ने कहा कि इस कानून से जुड़े कई पहलू अब भी साफ नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि नए कानून से मनरेगा को खत्म कर दिया गया है, लेकिन अब तक इसे औपचारिक रूप से निरस्त घोषित नहीं किया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि 30,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल बकाया भुगतान निपटाने के लिए किया जाएगा या मनरेगा से वीबी-जी रैम जी में बदलाव के संक्रमण काल के लिए. उन्होंने कहा कि बकाया राशि “काफी ज्यादा” है.
डे ने कहा कि 95,000 करोड़ रुपये वही रकम है, जो वीबी-जी रैम जी बिल के वित्तीय ज्ञापन में दर्ज है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि वीबी-जी रैम जी को अपने डिजाइन के मुताबिक चलाने के लिए राज्यों से 55,000 करोड़ रुपये आने होंगे. लेकिन यह पैसा आएगा कैसे. कई राज्य इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं, खासकर गैर-बीजेपी राज्य. लेकिन मुझे पता है कि बीजेपी शासित राज्यों में भी कई सरकारें पैसे की कमी से जूझ रही हैं, क्योंकि यह छोटी रकम नहीं है और यह एक नई रकम है,” उन्होंने दिप्रिंट से कहा.
अब भी बचे सवाल
डे ने नए कानून को लागू करने को लेकर कई ऐसे सवाल उठाए, जिनका अब तक जवाब नहीं मिला है.
उन्होंने कहा कि एक बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरे राज्य को नए कानून के तहत अधिसूचित किया जाएगा. क्योंकि कानून की धारा 5(1) में कहा गया है कि राज्य सरकार को उन ग्रामीण इलाकों में काम देना होगा, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी.
एक और सवाल यह है कि नए कानून के तहत किस राज्य को कितना पैसा देना होगा. अधिनियम की धारा 4(5) में कहा गया है कि केंद्र सरकार हर वित्तीय वर्ष के लिए राज्यवार मानक आवंटन तय करेगी. डे ने कहा, “राज्यों को इस महीने के अंत तक अपना बजट पेश करना होता है. उससे पहले उन्हें यह पता होना चाहिए कि उनका मानक आवंटन कितना है.”
उन्होंने बताया कि अभी राज्यों की मांग के आधार पर आवंटन किया जाता है. लेकिन नए कानून में केंद्र सरकार मानक आवंटन तय करेगी, यानी केंद्र द्वारा राज्य को दी जाने वाली तय राशि. उन्होंने कहा, “तो यह मानक आवंटन साफ होना चाहिए. उसके बाद ही राज्य अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी की व्यवस्था कर पाएंगे,” उन्होंने दिप्रिंट से कहा.
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