Saturday, 28 May, 2022
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कोविड-19 के मद्देनज़र टेस्टिंग किट्स और दवाइयों की पहचान के लिए विज्ञान मंत्रालय ने योजना बनाने को कहा

डीएसटी की विज्ञान और इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड उन प्रोजेक्ट्स को देख रही हैं जो कोविड-19 से निपटने में जरूरी स्वास्थ्य उपायों को बता सकते हैं.

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नई दिल्ली: विज्ञान और तकनीक मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विज्ञान और तकनीक विभाग (डीएसटी) ने नए सिरे से उन प्रोजेक्टस के लिए प्रपोजल मांगे हैं जो कोरोनावायरस महामारी से निपटने में मदद कर सकते हैं.

डीएसटी की विज्ञान और इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड उन प्रोजेक्ट्स को देख रही हैं जो कोविड-19 से निपटने में जरूरी स्वास्थ्य उपायों को बता सकते हैं.

इस तरह के कई प्रोजेक्ट्स के प्रपोजल पहले भी जारी हो चुके हैं लेकिन इस बार डीएसटी छोटे समय अवधि के प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहा है जो इस महामारी से निपटने के लिए तत्काल उपाय सुझा सके. इन प्रोजेक्ट्स की समय अवधि एक साल होगी जो पिछले प्रोजेक्ट्स की तुलना में 2 साल कम है.

बोर्ड चाहता है कि शोधार्थी कम लागत वाले, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक किट्स, सार्स कोवी-2 के मोलिक्यूलर टार्गेट की पहचान के लिए कम्प्यूटेशनल तरीकों का इस्तेमाल करे और पहले से मौजूद दवाइयों की पहचान करे जो इस वायरस के खिलाफ काम आ सकती है.

बोर्ड यह भी चाहता है कि शोधकर्ता पोषण की खुराक के नैदानिक परीक्षण का संचालन करें जो वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकता है.

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जिन भी प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलेगी उसे 25 लाख रुपए तक का अधिकतम फंड दिया जाएगा और इसे जमा कराने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल होगी.

एसईआरबी के सचिव संदीप वर्मा ने दिप्रिंट को बताया कि स्थिति को देखते हुए प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन और फंडिग पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा.

मंत्रालय कई प्रोपोजल जारी कर चुका है

विभिन्न विभागों के जरिए विज्ञान और तकनीक मंत्रालय कई प्रोपोजल पहले भी जारी कर चुका है.

एसईआरबी ने पहले कोविड-19 और श्वास से जुड़े वायरस संक्रमण के लिए बनाए गए विशेष इंटेंसिफिकेशन ऑफ रिसर्च इन हाई प्रायोरिटी एरिया (आईआरएचपीए) के अंतर्गत प्रोपोजल के लिए आमंत्रण की शुरुआत की थी.


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मंत्रालय के तहत आने वाली वैधानिक टीडीबी बोर्ड ने भी भारतीय कंपनियों और इंटरप्राइजे़ज को कोविड-19 के मरीजों के लिए होम-बेस्ड रेस्पीरेटरी सिस्टम ईजाद करने के लिए प्रपोजल देने के लिए कहा था.

इस घोषणा में कहा गया था, ‘प्रोपोजल में तकनीक नवोन्मेषी उपाय जैसे कि कम दाम वाले मास्क, स्कैनिंग यंत्र, बड़े क्षेत्र के लिए सेनिटाइजिंग तकनीक और बिना संपर्क के एंट्री की व्यवस्था, रैपिड डायग्नोस्टेक किट्स, ऑक्सीजेनेटर्स और वेंटिलेटर्स शामिल होंगे.’

इसी तरह, बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने भी डायग्नोस्टिक के विकास, वैक्सीन, नोवेल थेरापेयोटिक्स, दवाइयों और कोविड-19 के फैलने से बचाने के लिए उपाय करने के लिए प्रपोजल मांगे थे.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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