Tuesday, 5 July, 2022
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मोहाली विस्फोट जांच का फोकस ‘पुराने रूसी निर्मित’ रॉकेट से चलने वाले ग्रेनेड और ‘खालिस्तानी आतंकवादी’ पर

'गैंगस्टर से खालिस्तानी आतंकवादी' बने हरविंदर सिंह रिंडा को सोमवार को मोहाली में पंजाब पुलिस के खुफिया कार्यालय पर हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.

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नई दिल्ली: खुफिया एजेंसियों को सोमवार को मोहाली में पंजाब पुलिस की खुफिया शाखा मुख्यालय पर रॉकेट से चलने वाले ग्रेनेड (आरपीजी) को स्थानीय तौर पर खरीदे जाने का संदेह है. साथ ही, कथित पाकिस्तान स्थित खालिस्तान आतंकवादी हरविंदर सिंह रिंडा और उसके निर्देश पर काम कर रहे एक स्थानीय कैंप या गिरोह के शामिल होने पर भी  संदेह जताया गया है. पंजाब पुलिस इसी एंगल से मामले की जांच कर रही है.

पंजाब पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. मामले को जल्द ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सोैंप दिए जाने की संभावना है.

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने बताया कि रूस में बने आरपीजी-22 के गोले में विस्फोट नहीं हुआ था, जिसकी वजह से इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन विस्फोट से इमारत की खिड़कियां टूट गईं. उनके मुताबिक ग्रेनेड ‘पुराना’ लग रहा था. हथियार की फायरिंग रेंज 700 मीटर है.

एक पुलिस सूत्र ने बताया, ‘यह एक पुराने ग्रेनेड की तरह लग रहा था. हालांकि आने वाले दिनों में फोरेंसिक टीम इस बारे में बेहतर तरीके से बता पाएगी. वे जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे.’

पुलिस ने उस लॉन्चर का भी पता लगा लिया है जिसे खेत से ग्रेनेड दागने के लिए इस्तेमाल किया गया था. सूत्रों ने कहा कि इलाके से बरामद सीसीटीवी फुटेज से सामने आया है कि दो लोगों ने एक कार के अंदर से हमला किया था. दो दर्जन से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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सूत्रों के मुताबिक, ‘ग्रेनेड छत से टकराया और एक कुर्सी पर गिर गया. हमें लॉन्चर मिल गया है. जांच की जा रही है कि हथियार कहां से आया और इसमें किन लोगों का हाथ है. हमने संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.’

पुलिस सूत्रों ने यह भी पुष्टि की कि 1990 के दशक में कश्मीर में और पंजाब में कभी पहले आरपीजी का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन हाल के दिनों में इससे कम ही हमले किए गए हैं. यह हथियार काफी भारी है और इसे लॉन्च करना भी काफी पैचीदा है. इसके अलावा हथियार की कम दक्षता के कारण इसकी जगह हथगोले का इस्तेमाल किया जाने लगा है.

हमले के बाद प्रतिबंधित अमेरिका स्थित खालिस्तान समर्थक समूह ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) ने कथित तौर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को चेतावनी जारी की है.

एसएफजे नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून ने एक असत्यापित ऑडियो संदेश में कहा, ‘यह ग्रेनेड हमला शिमला पुलिस मुख्यालय पर हो सकता था’

एसएफजे की ये धमकी हिमाचल में ‘खालिस्तानी’ झंडों पर कार्रवाई के बाद आई है.


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‘द रिंडा कनेक्शन’

हरविंदर सिंह रिंडा को पुलिस सूत्रों ने ‘गैंगस्टर के बाद बना एक खालिस्तानी आतंकवादी’ बताया है. रिंडा मूल रूप से पंजाब के तरनतारन का रहने वाला है. इसे पंजाब पुलिस विस्फोट का मास्टरमाइंड बता रही है. सूत्रों ने कहा, रिंडा के फिलहाल पाकिस्तान में होने का संदेह है.

सूत्रों के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि उसके निर्देश पर ही पंजाब में सक्रिय गिरोह ने धमाका किया था. रिंडा पंजाब में ड्रग्स, पैसा और हथियार मुहैया करा रहा है.

सूत्रों ने बताया कि रिंडा हिस्ट्रीशीटर है. उसके खिलाफ हत्या, डकैती, जबरन वसूली और सुपारी से लेकर हत्या के कई मामले दर्ज हैं. माना जाता है कि उसके खालिस्तान समर्थक आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ नजदीकी संबंध हैं.

सूत्रों ने अनुसार, पंजाब पुलिस ने हाल ही में रिंडा से जुड़े तीन संगठनों का भंडाफोड़ किया था.

सूत्र ने कहा, ‘एक ग्रुप ने पिछले साल 7 नवंबर को नवांशहर में अपराध जांच एजेंसी (सीआईए) पुलिस स्टेशन पर एक ग्रेनेड से हमला किया था. इस संगठन के संबंध रिंडा कैंप से था. इसी तरह के एक अन्य हमले में 9 मार्च को नूरपुर बेदी-नंगल मार्ग पर रोपड़ के कलमा मोड़ में पुलिस चौकी पर हमला किया गया. हमले में थाने की बगल वाली दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी. उनका कैंप पंजाब में बहुत सक्रिय है. साथ ही ड्रग्स और हथियारों की आपूर्ति में शामिल रहा है.’

हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान में पिछले हफ्ते पंजाब से चार लोगों को हथियार और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया था. उन पर ‘एक बड़े आतंकी रैकेट’ के ‘सहायक’ के रूप में काम करने का संदेह था. सूत्रों ने दावा किया कि चारों लोग कथित तौर पर रिंडा कैंप से जुड़े थे.

सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जून में कोलकाता में पंजाब पुलिस ने जयपाल सिंह भुल्लर और उसके सहयोगी जसप्रीत सिंह को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था. मोहाली कार्यालय पर किया गया हमला, बदले की कार्रवाई हो सकती है. भुल्लर और सिंह पर हत्या और जबरन वसूली के साथ-साथ नशीली दवाओं की तस्करी के कई मामलों दर्ज थे. उसपर क्रमशः 10 और 5 लाख रुपए का इनाम था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक भुल्लर रिंडा के लिए काम करता था.


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7000 से ज्यादा मोबाइल डेटा खंगाले

सोमवार के हमले में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पंजाब पुलिस ने उस क्षेत्र में उस दिन शाम 7 बजे से रात 8 बजे के बीच सक्रिय 7000 से ज्यादा मोबाइल फोन के डेटा हासिल किए और उनकी जांच की. इसी समय विस्फोट किया गया था.

एक दूसरे सूत्र ने बताया ‘हम जानते हैं कि वो दो आदमी थे जिन्होंने एक स्विफ्ट कार के अंदर से ग्रेनेड लॉन्च किया था. हमने अब उन मोबाइल फोन के डेटा तक पहुंच प्राप्त कर ली है जो उस विशेष समय में आस-पास के क्षेत्र में सक्रिय थे. हो सकता है संदिग्ध उस समय फोन का इस्तेमाल कर रहे हों. इससे उनकी पहचान में मदद मिलेगी.’

सूत्र ने कहा, ‘जिस रास्ते से हमलावरों ने भागने की कोशिश की थी, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी एक्सेस किया गया है. हमले में इस्तेमाल की गई कार और उसके मालिकों की पहचान भी की जा रही है. हम मामले को सुलझाने के करीब हैं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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