Cannabis-696x392
प्रतीकात्मक तस्वीर/ब्लूमबर्ग
Text Size:
  • 14
    Shares

नई दिल्ली: भारत में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले सिर्फ किचन के सामान की और फैशन से जुड़ी खरीदारी ही नहीं करते, बल्कि वे साइकोट्रॉपिक या नशीले पदार्थों की भी शॉपिंग कर रहे हैं. यह तथ्य इंटरनेट पर ड्रग्स के लेनदेन के बारे में जारी संयुक्तराष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) की एक रिपोर्ट में उजागर हुआ है.

मंगलवार को नई दिल्ली में जारी 2018 की रिपोर्ट में इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि भारत के लोग कोकीन, हेरोइन, गांजे, मेथाक्वेलोन और केटामीन जैसी मादक दवाएं हासिल करने के लिए ‘अवैध इंटरनेट फार्मेसियों’ का-खास कर डार्कनेट (गुप्त इंटरनेट नेटवर्क) पर – इस्तेमाल कर रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत में नशीले पदार्थों का ऑनलाइन ऑर्डर किए जाने और उनकी डिलिवरी के लिए कूरियर और डाक सेवाओं के इस्तेमाल की प्रवृति के उदाहरण देखे जा सकते हैं, जहां अधिकारियों ने इस तरीके को नशीले पदार्थों के धंधे के उभरते स्रोत के रूप में चिन्हित किया है.’

व्यक्ति के मूड, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करने वाले पदार्थों को साइकोट्रॉपिक पदार्थों की श्रेणी में रखा जाता है.


यह भी पढ़ें: नशे के लिए हिमाचल जाना चाहते है? पर मुख्यमंत्री की मंशा कुछ और ही है


उदाहरण के लिए, संयुक्तराष्ट्र की रिपोर्ट में पिछले साल फरवरी में भारत में बेंज़ोडाइज़ेपाइन वर्ग की दवा नाइट्राज़ेपाम के 200 टैबलेट पकड़े जाने का ज़िक्र किया गया है. दवा की ये खेप अमेरिका से कूरियर पार्सल के रूप में भेजी गई थी.

नाइट्राज़ेपाम नींद की एक ताक़तवर दवा है जो ‘नींद आने के समय को कम करती है और निद्रावस्था की अवधि को बढ़ाती है.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साइकोट्रॉपिक पदार्थों वाली प्रिसक्रिप्शन दवाएं, खास कर ट्रैंक्विलाइज़र या प्रशांतक दवाएं हासिल करने का मुख्य स्रोत कथित रूप से अवैध इंटरनेट फार्मेसियां बन गई हैं.

रिपोर्ट में भारत में ऐसे ड्रग डीलरों की मौजूदगी का भी ज़िक्र है जो कि पूरी दुनिया में अवैध दवाएं बेचते हैं.

संयुक्तराष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में ‘भारत में अधिकारियों ने दो अवैध फार्मेसियों को पकड़ा था जो इंटरनेट पर दवाओं का कारोबार कर रहे थे. उनके पास से नशीले पदार्थों वाले 130,000 टैबलेट बरामद किए गए थे. इस कार्रवाई के दौरान 15 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.’

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘इंटरनेट के ज़रिए नशीली दवाओं के वैश्विक कारोबार पर एक अन्य अध्ययन में डार्कनेट पर ड्रग्स के धंधे में शामिल कुछ कारोबारियों के दक्षिण एशिया में होने के संकेत मिलते हैं. विशेष रूप से, इस अध्ययन में भारतीयों द्वारा 1,000 से अधिक दवाएं 50 गुप्त ऑनलाइन बाज़ारों पर बिक्री के लिए डाले जाने की पहचान की गई.’

भारत का नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कई वर्षों से भारत में इंटरनेट फार्मेसियों के उभार के साथसाथ डार्कनेट के ज़रिए ड्रग्स के कारोबार पर भी नज़र रख रहा है.

डार्कनेट इंटरनेट के उन हिस्सों को कहा जाता है जो सार्वजनिक नहीं हैं और जिन तक विशेष अनुमति या खास सॉफ्टवेयर के ज़रिए ही पहुंचा जा सकता है.

ब्यूरो की 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि अवैध रूप से, लेकिन बिना सामने आए ड्रग्स हासिल करना संभव बनाने वाले डार्कनेटकी नए लोगों को ड्रग्स से जोड़ने की क्षमता चिंता बढ़ाने वाली है.’ रिपोर्ट में उस साल दो अवैध इंटरनेट फार्मेसियों के ब्यूरो के हाथ पड़ने का भी उल्लेख है.

भारत में सर्वाधिक इस्तेमाल गांजे का

रिपोर्ट के अनुसार गांजा या कैनबिस दक्षिण एशिया में, विशेष कर भारत और श्रीलंका में, सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला ड्रग है.

इसके अनुसार, ‘गांजा दक्षिण एशिया में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मादक पदार्थ है, और 2017 में पूरे क्षेत्र में सर्वाधिक मात्रा में इसकी खेपें पकड़ी गईं.’

यूएनओडीसी के अनुमानों के मुताबिक, 2016 में दुनिया भर में गांजे की बरामदगी में भारत का योगदान 6 प्रतिशत या करीब 300 टन का था. अगले एक वर्ष के दौरान बरामदगी में 20 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई.

हालांकि, गांजे की राल या चरस की बरामदगी 2013 से 2017 की अवधि में सालाना 2 से 4 टन के बीच लगभग स्थिर रही.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


  • 14
    Shares
Share Your Views

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here