Saturday, 2 July, 2022
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‘तिहाड़ से फोन और इंस्टाग्राम से किया पीछा’: पुलिस ने कहा, बिश्नोई ने जेल से ही करवाई मूसेवाला की हत्या

पंजाब के एडीजीपी प्रमोद बान ने बताया, बिश्नोई ने 'पुलिस को गुमराह करने की साजिश' रची और अपने भाई व एक करीबी को देश से भगाने का इंतजाम किया ताकि वे विदेश में रहते हुए हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचा सकें.

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नई दिल्ली: पिछले अगस्त में मोहाली में युवा अकाली दल के नेता विक्की मिड्दुखेरा की गोली मारकर हत्या करने के चार दिन बाद, लॉरेंस बिश्नोई ने कथित तौर पर सिग्नल और विकर मी ऐप का इस्तेमाल कर तिहाड़ जेल से कनाडा के गैंगस्टर गोल्डी बरार को फोन किया था.

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने दिप्रिंट को जानकारी दी कि जेल में बंद गैंगस्टर ने बराड़ को बताया कि वह गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या करके मिद्दुखेड़ा की मौत का बदला लेना चाहता था. 28 वर्षीय गायक की 29 मई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

सूत्रों के मुताबिक, माना जाता है कि बिश्नोई ने जेल में रहते हुए एक सुनियोजित साजिश बनाई ताकि वह और उसके सहयोगियों का नाम किसी भी तरह से सिद्धू मूसेवाला की हत्या से न जुड़े. उसने अपने भाई और एक करीबी सहयोगी के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाकर, उन्हें विदेश भेजा ताकि वे बिना किसी की नजर में आए हत्या की साजिश को अंजाम तक पहुंचा सकें और बंदूक खरीदने के लिए उसके साथियों के पास रंगदारी के पैसे पहुंचे हैं या नहीं ये सुनिश्चित कर सकें. वह व्यक्तिगत रूप से मूसेवाला की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया की मदद ले रहा था.

दिल्ली पुलिस ने पहले ही आरोप लगाया था कि मूसे वाला की हत्या के पीछे बिश्नोई मास्टरमाइंड था. पंजाब पुलिस ने गुरुवार को कहा कि गैंगस्टर ने अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है.

पंजाब के एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘ उसने पहला कॉल गोल्डी बरार को किया. दोनों ने हमले की साजिश और हत्या की साजिश को कैसे अंजाम दिया जाएगा इस पर बात की थी. उसने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि उसने सिग्नल और विकर मी के जरिए बात की थी’

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जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि पूछताछ के दौरान बिश्नोई ने कहा कि मूसेवाला के गीतों ने उसे परेशान कर दिया था. उसे लगा कि 2020 में रिलीज हुआ मूसेवाला का एक गीत, ‘बंबिहा बोले’, उसके गिरोह के कट्टर प्रतिद्वंदी, बंबिहा गिरोह के समर्थन में था.

बिश्नोई को संदेह था कि मूसेवाला बांबिहा गिरोह का करीबी है जिसने कथित तौर पर उसके दोस्त मिद्दुखेड़ा की हत्या की साजिश रची थी. सूत्रों के मुताबिक गैंगस्टर ने पूछताछ के दौरान बताया कि मिद्दुखेड़ा की हत्या के बाद से उसकी रातों की नींद हराम हो गई थी.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘बंबिहा बोले’ एक लोक गीत है जिसे दो गायकों ने रीक्रिएट किया था. वैसे इस वीडियो में मूसे वाला की बजाय दूसरा गायक गब्बर संगरूर ज्यादा नजर आया है. गब्बर एक पंजाबी फिल्म निर्माता है जिन्होंने गायक के साथ पहले काम किया था. उन्होंने आगे कहा, ‘बंबिहा का मतलब है ‘पक्षी’

पहले उद्धृत अधिकारी ने बताया, ‘बिश्नोई ने पूछताछ के दौरान कहा कि उसके पास सिद्धू मूसेवाला के खिलाफ अपने आरोपों के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था लेकिन वह मिद्दुखेड़ा की हत्या के बाद से काफी परेशान चल रहा था और बांबिहा गिरोह पर पलटवार करना चाहता था. इसलिए उसने मारने का आदेश दिया’ अधिकारी के अनुसार, मृतक गायक और बंबिहा गिरोह के बीच या उनके संपर्क में होने का अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है.

मूसेवाला के तत्कालीन प्रबंधक शगुनप्रीत का नाम मिद्दुखेड़ा की हत्या की जांच के दौरान सामने आया था, लेकिन वह कथित तौर पर जल्द ही देश छोड़कर भाग गया. पंजाब पुलिस के एक सूत्र ने कहा, ‘जब बताया गया कि शगुनप्रीत का नाम आया है, तो बिश्नोई ने कहा कि उन्हें पहले से ही उसकी संलिप्तता पर संदेह था’

सूत्र के अनुसार, ‘ उसने कहा कि मूसे वाला के गाने और बंदूक संस्कृति के संदर्भ बिश्नोई गिरोह के लिए एक ताना थे, जो बांबिहा गिरोह का कट्टर प्रतिद्वंद्वी है. उसे लगा कि मूसे वाला बांबिहा गिरोह का साथ दे रहा है और ये कांग्रेसी नेता अब उस गिरोह की और मदद करेगा. वह लगातार कहता रहा कि मूसे वाला हमारे खिलाफ था.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बिश्नोई ने एक हथियार डीलर का इंतजाम किया और तिहाड़ से अपने गिरोह के सदस्यों को हथियार खरीदने के लिए कई कॉल किए.

पंजाब पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) प्रमोद बान ने मीडियाकर्मियों को बताया, ‘बिश्नोई ने पुलिस को गुमराह करने और अपने भाई अनमोल बिश्नोई और करीबी सहयोगी सचिन थापन को बचाने की साजिश रची. उसने हत्या से पहले उन्हें देश से बाहर जाने का पूरा इंतजाम किया. यह उसके मर्डर प्लान का एक हिस्सा था.

सूत्रों ने कहा कि अनमोल और थापन दुबई के रास्ते अमेरिका भाग गए. अनमोल जनवरी में चला गया था और माना जा रहा है कि वह फिलहाल मैक्सिको में है, जबकि थापन ने अप्रैल में देश छोड़ दिया था.


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बिश्नोई ने इंस्टाग्राम रील से किया मूसे वाला का पीछा

सूत्रों ने दिप्रिंट को आगे बताया कि बिश्नोई ने कथित तौर पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए मूसे वाला का नियमित रूप से पीछा किया और इंस्टाग्राम रीलों से उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी. हालांकि, गैंगस्टर ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह केवल मेक्रो प्लानिंग में शामिल था, जबकि भुगतान और रसद की व्यवस्था गिरोह के अन्य सदस्यों और बरार ने की थी.

एक अन्य पुलिस सूत्र ने कहा, ‘यह पूछे जाने पर कि क्या गिरोह ने मूसेवाला को जबरन वसूली के लिए कॉल किया था, बिश्नोई ने कहा कि बराड़ ने ऐसा किया होगा और उसे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.’ एक अन्य पुलिस सूत्र ने बताया, ‘बिश्नोई किसी लोकप्रिय व्यक्ति को मारकर अपना दबदबा कायम करना चाहता था.’

दिल्ली पुलिस ने गायक की हत्या में कथित रूप से शामिल दो शूटर को गिरफ्तार किया है, जबकि चार अन्य की पहचान कर ली गई है. उन्हें हिरासत में लिया जाना बाकी है. हमले में दो कारों और कई अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, इन हथियारों को पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा गिराए जाने का संदेह है.

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने कहा कि हथियारों और अन्य रसद के ट्रांसपोर्टेशन पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च किए गए थे.

‘फर्जी पासपोर्ट’ के साथ विदेश भेजे गए सहयोगी

एडीजीपी बान ने बताया, ‘अपनी इस योजना को पूरा करने के लिए उसने (बिश्नोई) अपने भाई अनमोल बिश्नोई और सचिन थापन के लिए दिल्ली आरपीओ (क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय) से फर्जी पासपोर्ट जारी करवाए और उन्हें इस हत्या से पहले देश से भगा दिया. वे वहां से बिना किसी की नजरों में आए कॉर्डीनेट कर सकते थे और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा सकते थे.’

दिप्रिंट द्वारा एक्सेस किए गए पासपोर्ट से संकेत मिलता है कि अनमोल ‘भानु प्रताप’ के नाम से देश छोड़कर भागा था, जबकि थापन ‘तिलक राज तोतेजा’ के रूप में विदेश गया था.

एडीजीपी ने कहा कि अनमोल के खिलाफ 18 मामले दर्ज हैं और अक्टूबर 2021 में जोधपुर जेल से जमानत पर रिहा हुआ था, जबकि थापन के खिलाफ 12 मामले दर्ज हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘इस सांठगांठ में अधिकारियों की भूमिका की एक गहरी जांच की जाएगी. इसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के लिए आरपीओ दिल्ली से फर्जी विवरणों पर पासपोर्ट बनाने और देश से भागने का प्रबंधन करने वाले अधिकारी शामिल हैं.’

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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