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लखनऊ में रोड शो करती प्रियंका गांधी, साथ में हैं राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य, फाइल फोटो/ फोटो- प्रशांत श्रीवास्तव
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लखनऊ: रोड शो या रैली के हिट होने का पैमाना क्या है? रोड शो या रैली हिट भी हो गई तो वोट में तब्दील हो इसकी गारंटी क्या है? सोमवार के रोड शो की तस्वीरें व विजुअल देखकर तो कांग्रेसी खुश हो सकते हैं, लेकिन क्या ये वाकई प्रियंका गांधी का लाॅन्चिंग रोड शो था? समर्थकों की नजरों में रहा होगा, लेकिन जिस ‘वेव’, ‘स्विंग’ या करंट की बात कांग्रेसी कर रहे थे वो आधे रोड के बाद आधा ही हो गया था. शायद इसका अंदाजा राहुल- प्रियंका को भी हो गया था..यूपी कितना मुश्किल है ये वो भी जानते हैं इसलिए जुबां पर 2019 नहीं 2022 है. राहुल को अपने भाषण में कहना पड़ गया कि अब चुनाव जमीनी कार्यकर्ता लड़ेगा.

राहुल ने कहा कि अब चुनाव हेलीकाॅप्टर से आने वाले नेता नहीं लड़ेंगे. राहुल जब ये बोल रहे थे तो कार्यकर्ता तेजी से ताली बजाने लगे कि मानो राहुल ने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया हो. वहीं कई वरिष्ठ नेताओं के चेहरे पर प्रश्न चिन्ह था कि आखिर राहुल का इशारा किस ओर है.

राहुल गांधी ने कहा कि यूपी में कांग्रेस कमजोर नहीं रह सकती. कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जमीनी नेताओं को आगे बढ़ाना होगा. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मैं अखिलेश यादव व मायावती का आदर करता हूं, लेकिन ये भी कह देता हूं कि कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ लड़ेगी और 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सरकार बनाएगी. हम प्रदेश को बदलना चाहते हैं और ये होकर रहेगा. राहुल बोले कि कांग्रेस की शुरुआत यूपी से हुई थी इसलिए यूपी में कांग्रेस को मजबूत करना पड़ेगा.

जमीन पर अब भी मजबूत नहीं कांग्रेस

राहुल, प्रियंका व ज्योतिरादित्य के लिए यूपी इसलिए भी सबसे ज्यादा चैलेंजिंग है कि यहां जमीन पर कांग्रेस संगठन मजबूत नहीं. यूपी कांग्रेस में राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पीएल पुनिया, पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी, निर्मल खत्री, बसपा से आए वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन समेत तमाम दिग्गज नेता हैं, लेकिन 2019 के चुनाव में यूपी में इनकी क्या भूमिका होगी ये अभी साफ नहीं हुआ है. ये नेता भी अभी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं शायद उन्हें भी नहीं पता कि पार्टी की ओर से उन्हें क्या रोल मिलेगा.

कई जिलों में को-आॅर्डिनेशन का कन्फ्यूजन

कांग्रेस में प्रदेश व जिला स्तर पर को-आॅर्डिनेशन में काफी कन्फ्यूजन दिखता है. आगरा, आजमगढ़ समेत 14 जिलों में जिला अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष के अलावा कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं. सूत्रों की मानें तो जिला कमेटी के सदस्यों में भी इस बात का कन्फ्यूजन है कि किसका आदेश मानें और किसका न मानें. वहीं माना जा रहा था कि प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को नई पीसीसी की टीम मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्हें फ्री-हैंड नहीं दिया गया. उन्होंने अपने स्तर पर कुछ बदलाव जरूर किए, लेकिन फिर भी यूपी कांग्रेस के हालात नहीं बदल पाए.

आखिर प्रियंका को क्यों सौपनी पड़ी कमान

पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इसका कारण ये है कि आलाकमान को यूपी से अब रिजल्ट चाहिए. पिछले कई साल से यूपी में कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर रही है. 2014 लोकसभा चुनाव व 2017 विधानसभा चुनाव में कई वरिष्ठ नेता हार गए. संगठन भी कमजोर हो गया. यही कारण है कि चुनाव से कुछ महीने पहले प्रियंका की एंट्री कराई गई है. कांग्रेसियों के हाव-भाव से लग रहा है कि प्रियंकी यूपी कांग्रेस में काफी कुछ बदलने जा रही हैं, जिसका इशारा राहुल ने अपने भाषण में किया. लेकिन संगठन में बदलाव का जमीन पर कितना असर पड़ेगा ये आने वाले वक्त में साफ होगा.


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