नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नोबेल विजेता अमर्त्य सेन को नोटिस जारी होने पर हंगामा मच गया. कांग्रेस ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) से माफी मांगने की मांग की है.
उनके चचेरे भाई शांतभानु सेन ने मीडिया से कहा कि सेन को नोटिस इसलिए भेजा गया कि उनके और उनकी मां के बीच उम्र में 15 साल का अंतर बताया गया है.
उन्होंने कहा, “यह साफ तौर पर अमर्त्य सेन का उत्पीड़न है. उन्होंने पहले भी वोट दिया है. नोटिस में कहा गया कि अमर्त्य सेन और उनके माता-पिता के बीच 15 साल का अंतर है, लेकिन असल में उनकी मां और उनका अंतर 19 साल और आधा है. मुझे नहीं पता ऐसा नोटिस कैसे जारी हो सकता है. उन्हें 16 जनवरी तक दस्तावेज़ जमा करने को कहा गया है. यह जानबूझकर उत्पीड़न है.”
कांग्रेस ने इस नोटिस को “दुखद” बताया और कहा कि ईसीआई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए.
कांग्रेस के एक्स पोस्ट में लिखा, “चुनाव आयोग ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन से उनकी नागरिकता साबित करने को कहा है. इसके लिए उन्हें औपचारिक नोटिस भेजा गया. ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख को धूमिल किया और वह भी केवल इसलिए कि वह अपने बॉस मोदी को खुश करना चाहते हैं.”
SIR की धांधली को समझिए 👇
चुनाव आयोग ने नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को अपनी नागरिकता साबित करने को कहा है। बाकायदा इसके लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है।
ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगा दिया है, वो भी सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने मालिक मोदी को खुश करना है।…
— Congress (@INCIndia) January 7, 2026
त्रिनमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी नोटिस पर सवाल उठाया और एक्स पर लिखा, “नोबेल विजेता को किसी संदेह से ऊपर होना चाहिए, सही है ना? लेकिन अगर वे बंगाली हैं? तो उन पर सुनवाई नोटिस ऐसे थोपे जाते हैं जैसे वह कोई आम अपराधी हों.”
A Nobel laureate should be above any suspicion, right? But what if he's a Bengali? Then he'll be slapped with hearing notices as if he were some common criminal.
Amartya Sen, whose groundbreaking works form the bedrock of modern economics, who has brought unparalleled glory to… pic.twitter.com/bzp37QORF9
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) January 7, 2026
राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने कहा, “यह @BJP4India और @ECISVEEP की SIR प्रक्रिया का निंदनीय और शर्मनाक तमाशा है. वे हमारे आइकॉन को मिट्टी में घसीटेंगे, हमारी शान को धूमिल करेंगे और किसी भी नीच काम तक जाएंगे, अगर यह उनके बांगला-विरोधी एजेंडे के लिए ज़रूरी हो.”
मंगलवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था.
हालांकि, न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने ईसी सूत्रों के हवाले से कहा कि सेन को उनकी नाम की स्पेलिंग गलती के कारण बुलाया गया है और उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होने की ज़रूरत नहीं है.
एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा, “स्पेलिंग की यह गलती तकनीकी है और मतदाता की पात्रता पर इसका कोई असर नहीं है. हमारे अधिकारियों को ऐसे मामलों को प्रशासनिक स्तर पर हल करने का निर्देश दिया गया है ताकि अनावश्यक विवाद न हो.”
क्रिकेटर शमी को भी नोटिस
क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को भी SIR के तहत सुनवाई के लिए बुलाया गया. सूत्रों के अनुसार, शमी को नोटिस इसलिए मिला क्योंकि उनका नामांकन फॉर्म गलत भरा गया था और अधूरा था.
नोटिस में कहा गया था कि उन्हें सोमवार को सुनवाई के लिए आना होगा, लेकिन शमी बंगाल टीम के साथ विजय हजारे ट्रॉफी खेल रहे थे. इसलिए उनकी सुनवाई को फिर से तय किया गया.
SIR प्रैक्टिस के तहत पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं—राज्य के कुल मतदाताओं का 7.6 प्रतिशत को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से हटा दिया गया.
हटाए गए 58.2 लाख मतदाताओं में से 24.16 लाख (3.15%) मृत पाए गए, 32.65 लाख (4.26%) स्थान बदलने या घर पर न होने के कारण, और 1.38 लाख (0.18%) मतदाता कई जगहों पर नामांकित पाए गए. कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 7.08 करोड़ ने इस अभ्यास के लिए फॉर्म जमा किए थे.
दावे और आपत्तियां 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक की जा रही हैं. नोटिस जारी करने, सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया 16 दिसंबर से 7 फरवरी तक साथ-साथ चल रही है.
SIR राज्य में विवाद का कारण बना रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा और इसे रोकने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि “इस प्रक्रिया के दौरान गंभीर गड़बड़ियां, प्रक्रियागत उल्लंघन और प्रशासनिक खामियां देखी जा रही हैं.”
जवाब में बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कुमार को पत्र लिखा कि SIR रोकने की उनकी अपील “हार मानने के बराबर” है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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