Monday, 27 June, 2022
होमदेशमनमोहन सिंह बोले- चीन हमारी सीमा पर बैठा है पर केंद्र सच छुपाने में लगा है, MEA ने बयान को बताया राजनीतिक

मनमोहन सिंह बोले- चीन हमारी सीमा पर बैठा है पर केंद्र सच छुपाने में लगा है, MEA ने बयान को बताया राजनीतिक

सिंह ने कहा कि एक तरफ लोग महंगाई और बेरोजगारी झेल रहे हैं, दूसरी तरफ मौजूदा सरकार अपनी गलतियों को स्वीकारने अर सुधारने के बजाय लोगों की समस्या को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री को दोष देना जारी रखे हुए है.

Text Size:

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने गुरुवार को आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी घुसपैठ की सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है.

सिंह ने कहा, ‘उन्हें (भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार) आर्थिक नीति की कोई समझ नहीं है. मुद्दा देश तक सीमित नहीं है. यह सरकार विदेश नीति में भी विफल रही है. चीन हमारी सीमा पर बैठा है और सच्चाई को छिपाने के प्रयास किए जा रहे हैं.’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुद्दा विभाजनकारी राजनीति के कारण आंतरिक तनाव का नहीं है. यह सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है, यहां तक विदेश नीति पर भी.’

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे सच छुपाने के लिए देश को कभी नहीं बांटा.

सिंह ने कहा, ‘एक तरफ लोग महंगाई और बेरोजगारी की समस्य का सामना कर रहे हैं, दूसरी तरफ मौजूदा सरकार जो पिछल साढ़े सात साल से सत्ता में है, जो अपनी गलतियों को स्वीकारने अर उसमें सुधार करने के बजाय लोगों की समस्या को लेकर देश के पहले प्रधानमंत्री को दोष देना जारी रखे हुए है.’

पूर्व प्रधानमंत्री इस बात पर भी जोर दिया कि पीएम मोदी को गरिमा बनाये रखनी चाहिए इसके बजाय की वह देश के इतिहास को दोष दें कोई दूसरे पर दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री का पद विशेष महत्व रखता है. पीएम को गरिमा बनाये रखनी चाहिए बजाय कि अपनी नाकाम से भागकर इतिहास को दोष दें. जब मैं 10 साल तक प्रधानमंत्री था मैंने अपने काम के जरिए बात की. हमने देश की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर गिरने नहीं दी. मैंने भारत की छवि को कमतर नहीं किया.’

पीएम मोदी पर परोक्ष प्रहार करते हुए सिंह ने कहा कि नेताओं को गले लगाने से, या बिना आमंत्रण के बिरयानी खाने से रिश्ते नहीं सुधरते.

सिंह ने आगे भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर ‘फर्जी राष्ट्रवादी और विभाजनकारी नीतियों’ का आरोप लगाया और कहा कि इनकी विदेश नीति विफल रही है.

सिंह ने कहा, ‘इस सरकार का नकली राष्ट्रवाद खोखला और खतरनाक है. उनका राष्ट्रवाद अंग्रेजों की तरह फूट डालो और राज करो की नीति पर आधारित है. संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है.’

भारत और चीन अप्रैल-मई 2020 से फिंगर एरिया, गलवान वैली, हॉट स्प्रिंग्स और कोंगरुंग नाला सहित कई क्षेत्रों में चीनी सेना द्वारा किए गए उल्लंघन को लेकर गतिरोध में लगे हुए हैं.

14 दौर की सैन्य वार्ता के समापन के बाद, भारत और चीन ने दो परमाणु राष्ट्रों के बीच गतिरोध को हल करने के लिए पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर जल्द से जल्द कमांडर स्तर की बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की थी.

एमईए ने मनमोहन के बयान को विशुद्ध तौर पर राजनीतिक बताया

वहीं मनमोहन सिंह के बयान पर एमईए ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का विदेश नीति पर ताजा बयान विशुद्ध रूप से राजनीतिक है, न कि नीतिगत. मनमोहन सिंह ने अपने बयान में जिक्र किया है कि चीन हमारी सीमा पर बैठा है और सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है.

एमईए के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि उनका बयान विशुद्ध रूप से, साफ तौर से एक राजनीतिक बयान है न की नीतिगत. लिहाजा मेरा स्टैंड इस पर यह के इसमें पड़ने की जरूरत नहीं है. बागची का यह बयान तब आया है जब मनमोहन सिंह ने ये कहा कि ‘उन्हें (बेजेपी के नेतृत्व वाली सरकार) को आर्थिक नीति की समझ नहीं है. मुद्दा केवल राष्ट्र तक सीमित नहीं है. सरकार विदेश नीति में विफल है. चीन हमारी सीमा पर बैठा है और सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है.

मनमोहन सिंह के बयान को लेकर बागची ने यह भी कहा कि, ‘जहां तक चीन की बात है तो मामले में तथ्य एकदम साफ हैं. मुझे उन्हें दोहराने की जरूरत नहीं. हम चर्चा कर रहे हैं कि चीन के साथ बातचीत की प्रक्रिया क्या हो. स्थिति कैसे उत्पन्न हुई है. मुझे लगता है कि हमने बार-बार ऐसा कहा है.’

चीन पर मनमोहन सिंह की टिप्पणी तब आई जब भारत और बीजिंग अप्रैल-मई 2020 से फिंगर एरिया, गलवान वैली, हॉट स्प्रिंग्स और कोंगरुंग नाला सहित कई क्षेत्रों में चीनी सेना द्वारा किए गए उल्लंघन को लेकर गतिरोध में लगे हुए हैं.

14 दौर की सैन्य वार्ता के समापन के बाद, भारत और चीन ने दो परमाणु राष्ट्रों के बीच गतिरोध को हल करने के लिए पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर जल्द से जल्द कमांडर स्तर की बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है.

share & View comments