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Monday, 24 June, 2024
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श्रीकांत त्यागी का केस अकेला नहीं, नोएडा में बाहुबलियों के खिलाफ शिकायतों की फेहरिस्त काफी लंबी है

नोएडा के निवासी और पुलिस वाले श्रीकांत त्यागी से 'डरने' की बात करते हैं. लेकिन ऐसे 'छुटभैया नेता' लंबे समय से अपनी असल ताकत से बढ़-चढ़कर शक्ति प्रदर्शन करते रहे हैं.

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नोएडा के ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में खड़े गए ताजा विवाद का केंद्र बनने वाले श्रीकांत त्यागी को हमेशा से पता था कि वह किसी न किसी तरह से बच निकलेगा. वह घटना जिसमें उसने एक महिला के साथ दुर्व्यवहार और उस पर शारीरिक हमला किया, उसके पड़ोसियों, बिल्डिंग के गार्ड्स और आरडब्ल्यूए कर्मचारियों के साथ उसकी हरदम होते रहने वाली भिड़ंतों की नवीनतम कड़ी है. नोएडा हाउसिंग सोसाइटी के निवासी भी त्यागी के द्वारा अपने राजनीतिक सहयोगियों और ‘कृपा चाहने वालों’ के साथ उसके बार-बार लगाए जाने वाले उन ‘दरबारों’ से परेशान थे जहां आने वाले मर्द अक्सर महिलाओं को घूरते रहते थे.

नोएडा के सेक्टर 39 पुलिस स्टेशन के एक निरीक्षक ने उनका नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘नोएडा में सभी पुलिस अधिकारी जानते थे कि वे श्रीकांत त्यागी को छू नहीं सकते. हम जानते थे कि वह बच जाएगा और फिर हमसे अपना बदला लेगा, इसलिए पीड़ित की तुलना में उसकी टीम में बने रहना ही बेहतर है.‘

लेकिन त्यागी राजनीतिक जुड़ाव वाले ऐसे लोगों में अकेला नहीं है, जो अनियंत्रित शक्ति और दण्ड से मुक्ति का आनंद उठाते रहे हैं. तथाकथित ‘छुटभैया नेताओं’ – हिन्द्दी पट्टी में उन राजनीतिक आकांक्षा वाले नेता के लिए लोकप्रिय शब्द जो नियमित रूप से नेटवर्क बनाते रहते हैं, बड़े लोगों का नाम गिनाया करते हैं और क्षेत्र स्तर के वरिष्ठ राजनेताओं के साथ तस्वीरें प्रदर्शित करते रहते हैं – के खिलाफ शिकायतों की एक लंबी सूची है. और भूमि अतिक्रमण, जिस बारे में त्यागी पर भी आरोप है, उनके लिए सत्ता के सहारे गड़बड़ी करने का एकमात्र तरीका नहीं है. पार्टी स्टिकर के साथ कारों के एक बेड़े में घूमने, चुनावी रैलियों में भीड़ जुटाने, अपने आदमियों के खिलाफ पुलिस में दर्ज मामलों में हस्तक्षेप करने से लेकर बार में हंगामा करने और सड़कों पर लड़ाई करने तक, ये स्वयंभू नेता हमेशा सुनिश्चित करते हैं कि उनका शक्ति प्रदर्शन उनकी वास्तविक ताकत से कहीं बड़ा हो.

मगर त्यागी के ‘बाहुबली राज’ पर पिछले हफ्ते, उसके द्वारा एक महिला को गाली देने का वीडियो वायरल होने के ठीक चार रोज बाद, ठप्पा लगा दिया गया. उसे गिरफ्तार करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इस मुकदमे ने उसके पक्ष-विपक्ष में विरोध को हवा दी है और जहां सोसाइटी के लोगों ने उसके खिलफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, वहीँ त्यागी समुदाय के सदस्य उसके समर्थन में सामने आ गए हैं.

लेकिन कई लोगों को अभी भी डर है कि वह जल्द ही बाहर आ जाएगा और इसलिए वे उसके काले कारनामों के बारे में बात करते हुए खुद की पहचान बताने में संकोच करते हैं. ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी के एक गार्ड ने याद करते हुए बताया कि कैसे त्यागी ने एक बार उसके साथ दुर्व्यवहार किया था क्योंकि वह ‘त्यागी साहब को सलाम करना भूल गया था’.

उस गार्ड ने कहा, ‘वह कुछ भी कर सकता था. वह हम सभी को धमकाता था. सोसाइटी में हर कोई उससे डरता था.’


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‘राजनैतिक संपर्कों’ की शक्ति

त्यागी जैसे राजनीतिक कार्यकर्ता अक्सर पुलिसिया शिकायतों को अपने गले की माला और सत्ता के श्रृंगार के रूप में पहनते हैं. त्यागी के खिलाफ गुंडा एक्ट, रंगदारी, दंगा करने और शांति भंग समेत कुल नौ मामले दर्ज हैं. लेकिन उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था.

ग्रैंड ओमेक्स की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की सचिव महिमा जोशी ने कहा, ‘उसकी पत्नी बिना किसी बात वाले मुद्दों पर पड़ोसियों के साथ झगड़ा करती रहती थी और फिर हथियारबंद गुर्गों के साथ उनके घरों में धावा बोल देती थी.’ उन्होंने कहा कि यहां के निवासियों ने साल 2019 में ही त्यागी के अतिक्रमण के खिलाफ शिकायत की थी और नोएडा प्राधिकरण ने उसे नोटिस भी जारी किया था, लेकिन वह इससे भी नहीं डरा. त्यागी सोसाइटी के ‘कॉमन एरिया में राजनीतिक बैठकें’ भी करता था. जोशी ने आगे कहा, ‘उसकी बैठकों में आने वाले मर्द महिलाओं को घूरा करते थे. हमने बहुत सारी शिकायतें दर्ज की थीं लेकिन सोसाइटी के प्रशासन और सुरक्षा दल ने भी उस पर कभी कार्रवाई नहीं की. वे उससे बहुत डरते थे. जब हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा, तभी जाकर निवासियों ने हस्तक्षेप किया.‘

मामले के जांच अधिकारी के मुताबिक त्यागी के पास छह एसयूवी, जिन पर भाजपा का स्टिकर लगा है, और पांच हथियारबंद गुर्गे हैं. ग्रैंड ओमेक्स के निवासियों का कहना है कि मंगलवार को हुई उसकी गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी ने उसके घर पर लगा भाजपा का झंडा उतार लिया था. पुलिस और ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी के निवासियों द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार त्यागी अपने राजनीतिक संबंधों के दिखावे, और कथित रूप से उनका दुरुपयोग करने से भी, कभी नहीं कतराता था.

वह नियमित रूप से अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट पर वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करता रहता था.

पिछले हफ्ते की घटना और इसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने के बाद गौतमबुद्धनगर के सांसद महेश शर्मा सहित कई भाजपा नेता बड़ी मुश्किल से खुद को त्यागी से अलग करने की कोशिश में थे, और उनका कहना था वह कभी उनकी पार्टी का सदस्य नहीं था.

‘स्कॉर्पियो की जगह फॉर्च्यूनर ने ली’

लेकिन काफी लंबे अरसे तक, त्यागी कई लोगों को यह समझाने में कामयाब रहा कि वह वास्तव में नोएडा में भाजपा का उभरता सितारा है. यहां तक कि स्थानीय पुलिस भी इस बात पर विश्वास करने लगी और उसके खिलफ की गई शिकायतों को आगे बढ़ाने से कतराती रही.

फेज 2 पुलिस स्टेशन के एक सब-इंस्पेक्टर, जिसने यहां तैनात होने के बाद से ‘सत्ता के नाम पर गड़बड़ी फ़ैलाने के ऐसे सैकड़ों मामलों का सामना किया है’ ने कहा, ‘साल 2016 में, नोएडा के निवासी स्कॉर्पियो से डरते थे. अब उसकी जगह फॉर्च्यूनर ने ले ली है.’ राजनीतिक दल से ऐसे तत्वों को काबू में रखने की चाहत वाले इस अधिकारी ने कहा, ‘ये स्वयंभू नेता सत्ताधारी पार्टी के अनुसार अपनी वफादारी बदलते रहते हैं. एसयूवी खरीदना और उस पर पार्टी के झंडे लगाना उनके लिए शक्ति प्रदर्शित करने का एक तरीका होता है. उन्होंने कहा, ‘उन्हें पुलिस की भी कोई परवाह नहीं है.‘

इन नेताओं द्वारा अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए बार एक और माकूल जगह है. नोएडा सेक्टर-18स्थित एक बार में काम करने वाले वेटर 39 वर्षीय रमन शर्मा ने याद करते हुए कहा, ‘मैं 2016 के उस दिन को कभी नहीं भूलूंगा जब एक राजनीतिक दल का एक कार्यकर्ता लगभग 1 बजे बार में आया और शराब पीने की जिद की. एक घंटे के बाद, मैंने उससे वहां से जाने का अनुरोध किया क्योंकि बहुत देर हो चुकी थी. उसने मेरी तरफ देखा, मेरे चेहरे पर एक गिलास पानी फेंका, अपनी बंदूक निकाल टेबल पर रख दी.’

शर्मा ने कहा, ‘मैं डर से कांप रहा था. हमने अपने बंद होने के समय के काफी बाद तक उसे शराब परोसी. उसने पैसे भी नहीं दिए और चला गया.’

ऐसे मामलों का एक दुष्परिणाम यह है कि नोएडा में क्लबों और बारों को बदनामी मिलती है.

नोएडा सेक्टर 38 के गार्डन गैलेरिया मॉल में स्थित एक क्लब, मिनिस्ट्री ऑफ़ साउंड. के एक कर्मचारी ने कहा, ‘हमने सुनिश्चित किया कि हम उस तरह की बदनामी को बदल दें. लेकिन सभी तरह के सुरक्षा उपाय करने के बाद भी, यह राजनीतिक संबद्धता वाले लोग हैं जो नशे में आते हैं और हमारे मेहमानों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं.’

इस कर्मचारी ने कहा, ‘पिछले साल, भगवा कुर्ते पहने हुए सात लोग एक दिन हमारे क्लब में आए. बाकी मेहमान थोड़े असहज हो गए थे. कुछ घंटों के बाद, उन मर्दों ने डांस फ्लोर पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया. जब उन महिलाओं के पुरुष साथियों ने बीच-बचाव किया, तो इन लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उनसे पूछा कि क्या वे उनके राजनीतिक संबंधों से वाकिफ भी हैं. मेरे प्रबंधक और मैंने हाथ जोड़कर मेहमानों से कोई शिकायत दर्ज न करने का अनुरोध किया. कुछ ही मिनटों के भीतर अन्य सभी मेहमान चले गए और केवल वे सात लोग नाचते रहे. नोएडा में अब यह बहुत सामान्य बात है. पुलिस भी कोई मदद नहीं करती.’

एक और प्रतिष्ठा है दांव पर

बहुत सारे आलोचक ग्रैंड ओमेक्स की इस घटना के मद्देनजर सीएम योगी आदित्यनाथ की तथाकथित ‘अपराध पर सख्त’ होने वाली प्रतिष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं.

मायावती के नेतृत्व वाले बसपा के कार्यकाल के दौरान मंत्री रहे वेदराम भाटी ने कहा, ‘भाजपा कहती है कि उन्होंने यूपी से गुंडों का सफाया कर दिया है, लेकिन हकीकत कुछ और है. हमारे समय के दौरान, हमने सुनिश्चित किया कि पार्टी से जुड़े लोगों के अंदर भी कानून का डर हो.’

लेकिन श्रीकांत त्यागी को गिरफ्तार करने में आदित्यनाथ सरकार द्वारा दिखाई गई तेज प्रतिक्रिया सीएम की ‘कानून और व्यवस्था’ की राजनीति में बहुत कुछ दांव पर लगे होने को प्रदर्शित करती है. और भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ त्यागी की तस्वीरें सामने आने के बाद भी उसके साथ संबंधों से इनकार करने वाले नेताओं की प्रतिक्रिया, यह दिखाती है कि पार्टी के लिए अपने सीएम की छवि को बरकरार रखना कितना महत्वपूर्ण है. नोएडा के भाजपा विधायक पंकज सिंह ने कहा, ‘त्यागी भाजपा का नेता नहीं था. लेकिन अगर होता तो भी तो उसे बख्शा नहीं जाता. हम इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा नहीं देते हैं. हमने त्यागी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और जो कोई भी भाजपा के नाम का इस्तेमाल सत्ता का दुरुपयोग करने के लिए करेगा, उसके मामले में भी ऐसा ही करेंगे.’

( इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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