अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले की साइबर पुलिस हांगकांग स्थित एक गिरोह के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए इंटरपोल से पर्पल नोटिस लेने की तैयारी कर रही है. इस गिरोह पर फर्जी शेयर बाज़ार और क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजनाओं के जरिए 1.5 लाख भारतीयों से हज़ारों करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है.
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क भारत के सबसे बड़े साइबर निवेश धोखाधड़ी मामलों में से एक है. इसका खुलासा 31 जनवरी को हुआ, जब सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी दिनेश कुमार शर्मा ने अलीगढ़ साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई. शर्मा ने बताया कि निवेश सलाहकार बनकर आए ठगों ने 45 दिनों में उनसे 1.1 करोड़ रुपये ठग लिए.
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमृत जैन ने सोमवार को दिप्रिंट को बताया कि इस महीने की शुरुआत में पांच विशेष जांच टीमों ने उत्तर प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान में एक साथ छापेमारी की. पूछताछ और डिजिटल सबूतों के आधार पर 12 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
पुलिस अब पैसों की कड़ी की जांच कर रही है और गिरोह के एक मास्टरमाइंड की पहचान की गई है. एसपी ने बताया कि वह नोएडा का रहने वाला है और इस समय कैंसर का इलाज करा रहा है.
एसपी ने कहा कि मास्टरमाइंड अस्पताल से ही गिरोह चला रहा था और जांच जारी रहने के कारण उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है.
शिकायत के बाद जांच में सामने आया कि गिरोह ने 600 से ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे, जिनके जरिए देशभर के ऑनलाइन यूजर्स को निशाना बनाया जाता था.
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य निवेश पर 200 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफे का लालच देते थे और भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में थोड़ी रकम वापस भी दिखाते थे. बाद में ठगी की बड़ी रकम कई बैंक खातों, फर्ज़ी कंपनियों और हवाला चैनलों के जरिए हांगकांग भेज दी जाती थी.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क ने अब तक 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है और पकड़े जाने से पहले 1,200 करोड़ रुपये और जुटाने की तैयारी में था.
साइबर पुलिस के अनुरोध पर सभी संदिग्ध व्हाट्सऐप ग्रुप बंद कर दिए गए हैं और बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए गए हैं. पुलिस ने दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, पासबुक और दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.
एसपी ने बताया कि जब आईपी एड्रेस की लोकेशन हांगकांग में होने की पुष्टि हो जाएगी और डिजिटल सबूतों की जांच पूरी हो जाएगी, तब इंटरपोल से पर्पल नोटिस जारी करने का आग्रह किया जाएगा, ताकि भारत से बाहर बैठे गिरोह के सदस्यों का पता लगाया जा सके.
पर्पल नोटिस अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीके, उपकरण और छिपने के तरीकों की जानकारी लेने या देने के लिए मांगा जाता है.
देश के भीतर भी आगे और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है, क्योंकि जांचकर्ता बाकी बचे गिरोह के सदस्यों की पहचान कर रहे हैं.
अमृत जैन ने कहा कि पुराने मामलों के विश्लेषण से पता चला है कि ऐसे गिरोह ज्यादातर सेवानिवृत्त अधिकारियों और बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं. कई साइबर ठगी के मामले रिटायरमेंट के एक साल के भीतर सामने आते हैं.
पुलिस राज्य कोषागार और बैंकों से नाम लेकर हाल ही में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रही है.
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