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Monday, 22 July, 2024
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बिहार के IAS अधिकारी की कोचिंग सेंटर्स को चेतावनी, बोले- सरकारी शिक्षकों को नियुक्त करना बंद करें

डीएम को लिखे पत्र में के.के. बिहार के शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पाठक ने चेतावनी पर ध्यान देने से इनकार करने वाले निजी कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही.

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पटना: बिहार के शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव उन कोचिंग संस्थानों पर नकेल कस रहे हैं, जो सरकारी शिक्षकों की नियुक्त कर कर रहे हैं और स्कूल समय सेंटर चला रहे हैं.

31 जुलाई को लिखे एक पत्र में आईएएस अधिकारी के.के. पाठक ने निजी कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए बने एक कानून का हवाला देते हुए सभी जिला मजिस्ट्रेटों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि स्कूल समय के दौरान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कोचिंग संस्थान संचालित न हों.

उन्होंने 31 जुलाई को लिखे पत्र में कहा, जिसकी एक प्रति दिप्रिंट के पास है, “आप जानते हैं कि बिहार कोचिंग संस्थान (कोचिंग और विनियमन) अधिनियम, 2020 मौजूद है. लेकिन अब तक, इस कानून के तहत कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है.”

पाठक ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कानून लागू करना जरूरी है कि छात्र स्कूलों तक पहुंचें.

उन्होंने बताया कि कोचिंग संस्थानों का समय स्कूल के घंटों के साथ टकराता है, जिसके कारण कक्षाओं में उपस्थिति कम होती है, खासकर कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं में.

पाठक के मुताबिक, उन्हें यह भी जानकारी थी कि सरकारी स्कूल के शिक्षक अपनी जगह कोचिंग संस्थानों में पढ़ा रहे हैं.

उन्होंने डीएम से सभी कोचिंग संस्थानों की एक सूची बनाने और 31 अगस्त तक उनके मालिकों की एक बैठक आयोजित करने को कहा ताकि उन्हें सूचित किया जा सके कि वे केवल स्कूल समय से पहले या बाद में ही काम कर सकते हैं और सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को नियुक्त नहीं कर सकते.

उन्होंने कहा कि कानून 31 अगस्त के बाद लागू किया जाएगा और आदेशों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी.

शिक्षक संघों ने पाठक के इस कदम का स्वागत किया है.

शिक्षक संघ के अध्यक्ष आशुतोष राणा ने कहा, “छात्रों द्वारा कक्षाएं छोड़ने की समस्या केवल कस्बों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी मौजूद है.”

उन्होंने आगे कहा, “शिक्षकों को खाली कक्षाओं या कम उपस्थिति का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके छात्र कोचिंग संस्थानों या निजी ट्यूशन में होते हैं.” उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ सरकारी शिक्षक कोचिंग संस्थानों में पढ़ाते हैं.

उन्होंने कहा, पाठक का पत्र “बिहार के स्कूलों के कायाकल्प में एक सकारात्मक कदम” था.


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विभाग को हिलाकर रख दिया

पाठक जून के पहले सप्ताह में बिहार शिक्षा विभाग में शामिल हुए और तब से उन्होंने विभाग को हिलाकर रख दिया है.

जुलाई में, पाठक ने 25,000 से अधिक स्कूलों के लिए एक निगरानी प्रणाली स्थापित की, यह सुनिश्चित किया कि शिक्षक कक्षाओं में हों, और अनुपस्थित पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी.

वह स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के लिए भी सड़क पर उतरे हैं.

नाम न छापने की शर्त पर विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “प्रभाव जादुई रहा है.”

अधिकारी ने आगे कहा, “स्कूलों से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक अपने स्कूलों में वापस आ गए हैं. मुझे पता चला है कि कुछ महिला शिक्षक जो दिल्ली में अपने परिवारों के साथ रहती थीं, कक्षाओं में उपस्थित होने के लिए वापस चली गईं. पाठक बिहार के स्कूलों की समस्याओं को जानते हैं और उनके पास इसका समाधान भी है.” “वह शिक्षकों को स्कूलों में वापस ले आए और अब यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि छात्र भी कक्षाओं में उपस्थित हों.”

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें)

(संपादन: अलमिना खातून)


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