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Thursday, 8 January, 2026
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जम्मू मेडिकल कॉलेज से MBBS की मान्यता वापस, मुस्लिम छात्रों के एडमिशन विवाद और ‘सर्वेक्षण’ का असर

पिछले महीने जम्मू में प्रदर्शन हुए जब श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के 50 सीट वाले एमबीबीएस प्रोग्राम में कश्मीर से 42 मुस्लिम छात्रों का एडमिशन हुआ.

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नई दिल्ली: नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को 2025–26 शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति पत्र वापस ले लिया है. इसका कारण संस्थान की सुविधाएं और मेडिकल एजुकेशन के न्यूनतम मानकों की कमी बताया गया है.

दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार, यह कदम एनएमसी की विशेषज्ञ टीम द्वारा किए गए ‘सर्वेक्षण’ का परिणाम है. यह कदम उस समय आया है जब संस्थान के प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद और प्रदर्शन हुए थे.

पिछले महीने जम्मू में प्रदर्शन तब शुरू हुए जब संस्थान के 50 सीट वाले एमबीबीएस प्रोग्राम में कश्मीर के 42 मुस्लिम छात्रों का दाखिला हुआ. बाकी सीटों पर सात हिंदू छात्र और एक सिख छात्र को रखा गया. मेरिट सूची छात्रों के नीट-यूजी प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई थी.

प्रदर्शन मुख्य रूप से हिंदू निवासियों ने जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले किए, जो लगभग 60 भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सहयोगी संगठनों का गठबंधन है. प्रदर्शनकारियों ने प्रवेश सूची वापस लेने और हिंदू छात्रों के लिए सीट आरक्षण की मांग की. उनका कहना था कि कई स्थानीय उम्मीदवारों को प्रवेश नोटिफिकेशन की जानकारी नहीं थी. प्रदर्शन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पुतले जलाने तक की घटना हुई, जिससे कॉलेज के पहले एमबीबीएस प्रवेश के आसपास गहरी समुदाय और राजनीतिक तनाव दिखा.

कर्नल (सेवानिवृत्त) सुखवीर मांकोटिया, श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के संयोजक ने कहा कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में एनएमसी के सामने संस्थान में गड़बड़ियों के मुद्दे उठाए थे. उन्होंने बुधवार को दिप्रिंट से कहा, “हम एनएमसी के इस फैसले का स्वागत करते हैं, जो उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है. इसने उन 50 छात्रों का भविष्य भी बचा लिया.”

उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा, “वहां प्रवेश प्रक्रिया में बड़ी कमी थी, अन्यथा कैसे संभव है कि 50 में से 42 छात्र किसी विशेष समुदाय के हों?”

इस विवाद ने पहले राजनीतिक रूप भी ले लिया था, जब मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने मेरिट-आधारित प्रवेश का बचाव किया और संस्थान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को दोहराया.

हालांकि, एनएमसी, जो भारत में मेडिकल एजुकेशन को कंट्रोल करता है, उसने मंगलवार को कॉलेज को वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली. उन्होंने कहा कि प्रवेशित छात्रों को संघ शासित क्षेत्र के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों पर रखा जाएगा.

जम्मू के उधमपुर ईस्ट सीट से बीजेपी विधायक आर.एस. पठानिया ने इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, “गुणवत्ता पर मात्रा नहीं: एनएमसी ने आवश्यक मानक पूरा न करने के कारण SMVDIME में 50 MBBS सीटों की अनुमति रद्द की. यह गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है.”

राज्यसभा सांसद और बीजेपी के जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष सत शर्मा ने भी इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं जेपी नड्डा जी और सरकार का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने उन 50 छात्रों के करियर को बचाया…”

अब तक संस्थान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

दिप्रिंट ने संस्थान से ईमेल के माध्यम से टिप्पणी मांगी, लेकिन रिपोर्ट के छापे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला. जैसे ही कोई जवाब मिलेगा, इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.

क्यों वापस लिया गया एलओपी

8 सितंबर 2025 को, एनएमसी की मेडिकल असेसमेंट और रेटिंग बोर्ड (MARB) ने SMVDIME को 2025-26 के लिए 50 एमबीबीएस सीटों वाला नया मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए Letter of Permission (एलओपी) दिया था. यह कॉलेज राज्य संचालित श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (SMVD University) से संबद्ध है, जो कटरा में स्थित है और प्रशासनिक रूप से 2024 में काम करना शुरू कर दिया था.

इस अनुमति में कॉलेज को सभी भौतिक, क्लिनिकल और मानव संसाधन मानकों को बनाए रखने, सही प्रवेश डेटा जमा करने और कोर्स, फैकल्टी और अस्पताल सेवाओं की जानकारी वाली पारदर्शी वेबसाइट रखने की शर्त थी.

MARB को यह अधिकार सुरक्षित था कि वह किसी भी समय ‘सर्वेक्षण’ कर सके और यदि मानक पूरे नहीं होते हैं तो एलओपी वापस ले सकता है, जुर्माना लगा सकता है या सीटों की संख्या घटा सकता है.

एनएमसी के अधिकारियों के अनुसार, कॉलेज में कई शिकायतें मिलने के बाद कुछ हफ्तों पहले एक ‘सर्वेक्षण’ किया गया. शिकायतें थीं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी पर्याप्त नहीं हैं.

नाम न छापने की शर्त पर एनएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “टीम ने पाया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और क्लिनिकल सुविधाओं में गंभीर और व्यापक कमी है, जिसके कारण 2025-26 के लिए एमबीबीएस अनुमति वापस ली गई. शिक्षण स्टाफ बहुत कम थे, लैब और रिसर्च सुविधाएं गायब या मानक के नीचे थीं. ऐसी स्थिति में छात्रों को वहां पढ़ने देना संभव नहीं था.”

एनएमसी अधिनियम, 2019 की धारा 28 के तहत, अगर कोई संस्थान तथ्य छुपाता है या नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे निरीक्षण, दंडित, सीटें घटाने या मान्यता रद्द करने का अधिकार एनएमसी को है. एनएमसी नियमावली 2023 के अध्याय V, नियम 29 के तहत आयोग को यह शक्ति है कि वह मेडिकल कॉलेज मानक पूरे न करने पर अनुमति वापस ले या सीटें कम कर सके.

हालांकि, एनएमसी के अधिकारियों ने साफ किया कि एलओपी वापस लेना कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के चयन के विरोध से कोई संबंध नहीं रखता.

उक्त अधिकारी ने कहा, “यह केवल नियम और कानून के आधार पर किया गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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