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Sunday, 21 July, 2024
होमदेशएक ही 'गांव, गुवांढ, गोत्र' में विवाह पर लगे रोक; हरियाणा में खापों ने लिव-इन को बैन करने की CM से अपील की

एक ही ‘गांव, गुवांढ, गोत्र’ में विवाह पर लगे रोक; हरियाणा में खापों ने लिव-इन को बैन करने की CM से अपील की

हरियाणा में ‘ऑनर किलिंग’ की बढ़ती घटनाओं के बीच, खाप नेताओं ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम में ‘हमारे क्षेत्र, खासकर उत्तर भारत की मान्यताओं की अनदेखी की गई है.’

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चंडीगढ़: हरियाणा में ‘ऑनर किलिंग’ की बढ़ती घटनाओं के बीच, खाप पंचायतों (पारंपरिक जाति-आधारित परिषदों) के प्रतिनिधियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन की मांग की, ताकि एक ही गांव या गोत्र या पड़ोसी गांवों के जोड़ों के विवाह पर प्रतिबंध लगाया जा सके.

मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में खापों ने प्रेम विवाह के पंजीकरण के लिए माता-पिता की सहमति, महिलाओं की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष बनाए रखने और लिव-इन संबंधों पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया को-ऑर्डिनेटर अशोक छाबड़ा ने पुष्टि की कि खाप नेताओं ने ज्ञापन सौंपा है और सैनी ने मांगों की कानूनी रूप से जांच करवाने का वादा किया है. दिप्रिंट ने ज्ञापन की एक प्रति प्राप्त की है.

मलिक खाप के प्रमुख अशोक मलिक, कलकल खाप के प्रमुख राजपाल कलकल, हुड्डा खाप के प्रवक्ता जगवंत हुड्डा, सतरोल खाप के प्रवक्ता फूल सिंह पेटवाड़, कादयान खाप के प्रमुख राजपाल कादयान, नंदल खाप के प्रमुख ओम प्रकाश नंदा, रुहल खाप के प्रमुख जयभगवान रूहल और दलाल खाप के धर्मपाल दलाल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने सर्व जातीय सर्व खाप के बैनर तले सैनी से मुलाकात की और मामले में उनके हस्तक्षेप की मांग की.

मुलाकात के बाद दिप्रिंट द्वारा संपर्क किए जाने पर मलिक ने कहा, “हम चाहते हैं कि हरियाणा सरकार केवल हरियाणा राज्य के लिए हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन करे क्योंकि यह एक राष्ट्रीय अधिनियम है और संभव है कि कुछ अन्य राज्यों में स्थिति हरियाणा जैसी न हो.”

उन्होंने कहा कि खाप नेताओं ने सीएम से कहा कि तीन ‘ग’ – गांव, गुवांढ (पड़ोसी गांव) और गोत्र – राज्य के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, और इनके भीतर विवाह सख्त रूप से वर्जित हैं.

हालांकि, हिंदू विवाह अधिनियम ऐसी शर्तों को मान्यता नहीं देता है और कानून के तहत रोक लगाए जाने वाले संबंधों की संख्या बहुत कम है.

मलिक ने आगे कहा कि खाप नेताओं को लड़कियों की विवाह योग्य आयु को वर्तमान 18 वर्ष से बढ़ाने के प्रस्ताव के बारे में पता चला है, और वे चाहते हैं कि वर्तमान आयु सीमा को बरकरार रखा जाए.

उन्होंने कहा कि पिछले महीने हरियाणा में पारिवारिक सम्मान के नाम पर हत्याओं की बाढ़ ने हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन की तत्काल आवश्यकता का संकेत दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अन्यथा, युवा जोड़ों द्वारा सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन जारी रहेगा और उनके परिवार गुस्से में आकर हताशा में ऐसे काम करते रहेंगे.

हरियाणा में खाप पंचायतें पिछले कई वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप के विरोध में मुखर रही हैं और लंबे समय से हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन की मांग कर रही हैं.

उनकी आपत्तियां पारंपरिक और सांस्कृतिक मान्यताओं की वजह से हैं, जो विवाह को एक पवित्र संस्था के रूप में प्राथमिकता देते हैं और लिव-इन संबंधों को नैतिक रूप से अस्वीकार्य मानते हैं.

वे प्रेम विवाहों का भी विरोध करते रहे हैं, खासकर एक ही गांव या पड़ोसी गांवों के निवासियों, एक ही गोत्र या अलग-अलग जातियों के लोगों के बीच.

‘सामाजिक मानदंडों में गिरावट’

सर्व जाति सर्व खाप द्वारा ज्ञापन में कहा गया है कि परिवार समाज की पहली इकाई है और इसकी शुरुआत विवाह से होती है.

यह दावा करता है, “शुरू में, विवाह की संस्था हिंदू धर्म के विद्वानों, धार्मिक शास्त्रों और संतों द्वारा परिभाषित परंपराओं के अनुसाह होती थी. हालांकि, आज़ादी के बाद, संस्था को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाए गए. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, जो विवाह को नियंत्रित करता है, पूरे देश पर लागू होता है,”

इसमें कहा गया है कि भारत एक विशाल देश है जहां विभिन्न विचारधाराओं और मान्यताओं के लोग रहते हैं.

इसमें कहा गया है, “दुर्भाग्य से हिंदू विवाह अधिनियम बनाते समय हमारे क्षेत्र, खासकर उत्तर भारत की परंपराओं और मान्यताओं को नजरअंदाज कर दिया गया है. इससे सामाजिक बुराइयां बढ़ रही हैं और सामाजिक मानदंडों में गिरावट आ रही है.”

ज्ञापन के अनुसार, खाप पंचायतें सामाजिक ढांचे को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं और इसलिए हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन जरूरी है.

संदिग्ध ऑनर किलिंग

पिछले महीने हरियाणा के हिसार जिले के हांसी में एक नवविवाहित जोड़े तेजवीर सिंह और मीना की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कथित तौर पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन्हें उस समय गोली मारी जब वे एक पार्क में बेंच पर बैठे थे. जोड़े ने भागकर शादी कर ली थी क्योंकि महिला का परिवार इस विवाह के खिलाफ था. पुलिस ने कहा कि वे एक ही जाति के थे और दूर के चचेरे भाई-बहन लगते थे. हत्या के सिलसिले में लड़की के परिवार के ग्यारह सदस्यों पर मामला दर्ज किया गया है.

एक अन्य मामले में, 18 जून को कैथल में एक नाबालिग ने अपनी बड़ी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी. वह अपनी बड़ी बहन से मिलने के बहाने उसके ससुराल पहुंचा था. हत्या के कुछ ही मिनटों बाद वह इंस्टाग्राम पर लाइव आया, इस घटना के बारे में गर्व के साथ सबको बताया और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. कैथल पुलिस के अनुसार, महिला के परिवार ने ही हत्या की साजिश रची थी और नाबालिग को इसे अंजाम देने का निर्देश दिया था.

मृतक कोमल रानी, ​​जो कि गुर्जर समुदाय से थी, ने चार महीने पहले अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के अनिल से शादी कर ली थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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