Monday, 27 June, 2022
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रियो की तुलना में टोक्यो ओलंपिक में ज्यादा दबाव था, पर कोच ने मुझे इसे ‘आराम से’ खेलने में मदद की: पीवी सिंधु

दिप्रिंट के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बैडमिंटन चैंपियन पी वी सिंधु ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, पुलेला गोपीचंद और पार्क ताए संग के तहत लिए गये प्रशिक्षण के बीच के अंतर और टोक्यो के लिए उन्होंने कैसा प्रशिक्षण लिया, इस सब के बारे में बात की.

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हैदराबाद: भारत की सबसे बड़ी बैडमिंटन खिलाड़ी पी.वी. सिंधु, जिन्होंने हाल ही में मौजूदा ओलंपिक खेलों के दौरान कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है- के लिए रियो 2016 की तुलना में, टोक्यो 2020 के दौरान दबाव और अपेक्षाएं ज्यादा थीं.

लेकिन जैसा कि उन्होंने दिप्रिंट को एक विशेष साक्षात्कार में बताया, उनके कोच पार्क ताए सांग, जो पिछले एक साल से भी अधिक समय से सिंधु को प्रशिक्षण दे रहे हैं, ने उन्हें शांत रहने में मदद की. उनका कहना था कि ‘उनके दक्षिण कोरियाई कोच ज़्यादा दबाव वाली परिस्थितियों से उन्हें उबारने के लिए हिंदी मुहावरे ‘आराम से’ का उपयोग करते हैं.‘

उन्होने कहा, ‘दबाव के बावजूद, वह हमेशा मुझे शांत महसूस करवाना सुनिश्चित करते हैं. वह कहते रहते हैं, ‘आराम से, बस आगे बढ़ते रहो (जस्ट कीप गोयिंग)’.

टोक्यो में जीते गये अपने कांस्य पदक और इससे पहले रियो 2016 के रजत पदक के साथ, 26 वर्षीय सिंधु ओलंपिक में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं. यह मौका उनके उस स्वर्णिम पल के दो साल बाद आया है जब उन्होने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा करनी वाली पहली भारतीय महिला होने का श्रेय अर्जित किया था.

सिंधु के शक्तिशाली खेल ने उन्हें उस खेल का एक महान खिलाड़ी बना दिया है जो उन्हें कथित तौर पर 10 साल की उम्र में एक अचानक हुई मुलाकात के बाद भा गया था.

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उसके बाद के कई सालों तक इस बैडमिंटन चैंपियन ने पुलेला गोपीचंद, जो हैदराबाद में इस खेल के लिए समर्पित एक प्रसिद्ध अकादमी चलाते हैं और भारत के मुख्य बैडमिंटन कोच के रूप में भी काम करते हैं, के अंदर प्रशिक्षण लिया. लेकिन 2016 के बाद उन दोनों की राहें जुदा हो गईं. उसके बाद से पार्क सिंधु के तीसरे कोच हैं.

गोपीचंद की तुलना में पार्क के तहत लिए गये प्रशिक्षण में अंतर के बारे में पूछे जाने पर, सिंधु ने कहा कि पार्क उनके द्वारा गलतियां किए जाने के बावजूद उन्हें नये-नये स्ट्रोक खेलने के लिए उत्साहित करते रहते हैं.

उनका कहना है, ‘मुझे लगता है कि उस समय, मैं वास्तव में बहुत छोटी थी और मुझे यह भी लगता है कि मैंने पिछले कुछ वर्षों में बहुत कुछ सीखा है. इस बार दबाव और उम्मीद कुछ ज्यादा थी. मैं उनके (पार्क) साथ पिछले एक साल से भी अधिक समय से काम कर रही हूं. (दोनों कोचों के बीच) तुलना करने जैसा कुछ भी नहीं है, लेकिन मैं कहूंगी कि पहले के कोचों से, विशेष रूप से गोपीचंद से, जो अलग बात है वो यह है कि (एक कोच के लिए) किसी खिलाड़ी को समझना बहुत महत्वपूर्ण है और उसके साथ संवाद भी उतना हीं महत्वपूर्ण है.’

वे कहती हैं, ‘उन्होंने (पार्क ताए सांग ने) हमेशा मुझे अभ्यास, खेल और टूर्नामेंट के दौरान कहा- ‘सब ठीक है, अगर आप ग़लतियां भी करते रहते हो फिर भी आप कोशिश करते रहो. बस कोशिश करते रहो’. यह वही चीज़ है जिसे मैंने तब और अब के बीच अलग महसूस किया है.’

सिंधु, जो हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रही हैं, ने राज्य सरकार को उन्हें ऐसा करने की अनुमति देने के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि स्टेडियम में प्रशिक्षण करने के अभ्यास ने उन्हें ‘शटल को नियंत्रित करने’ पर अपना ध्यान केंद्रित करने में मदद की. उनका कहना था कि यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय स्तर का था और इसका माहौल ओलंपिक के दौरान पेश आने वाले स्थितियों जैसा ही था.


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मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर

सिंधु ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर भी बात की. यह एक ऐसा विषय है जो जापानी टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका और अमेरिकी जिमनास्ट सिमोन बाइल्स के हाल ही में सार्वजनिक रूप से इस बारे में बात करने के बाद से खेल जगत में काफ़ी चर्चित हो रहा है.

सिंधु ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान मेडिटेशन (ध्यान/योगा) ने उन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद की. इस महामारी ने प्रशिक्षण और अभ्यास को तो कठिन बना ही दिया था और इसके कारण ओलंपिक को भी एक साल पीछे धकेलना पड़ा था.

पिछले साल नवंबर में, सिंधु ने अपने एक ट्विटर पोस्ट के साथ अपने प्रशंसकों को चौंका दिया, जिसमें उन्होने लिखा था, ‘आई रिटाइर (मैं संन्यास ले रहीं हूं)’. लेकिन जब लोगों ने उस ट्वीट के साथ संलग्न स्लाइड्स को पढ़ा, तो यह पता चला कि वह जिस चीज से संन्यास लेने की बात कर रहीं थीं वह महामारी द्वारा फैलाई गई नकारात्मकता थी.

दिप्रिंट से बात करते हुए, उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने आप को कुछ और चीज़ें करने में व्यस्त रखा- (उस वक्त) ध्यान केंद्रित करना बहुत महत्वपूर्ण था. यह एक कठिन काम था, और पांच साल बाद, हम सब को पता है कि कौन कैसे खेलेगा… दबाव के बीच, शांत रहना बहुत महत्वपूर्ण था और इसके लिए मैं ध्यान करती रही. इससे मुझे अपनी मानसिक शक्ति में सुधार लाने में वास्तव में काफ़ी मदद मिली.’

इस बुधवार को टोक्यो से वापस लौटने पर सिंधु का हैदराबाद में जोरदार स्वागत किया गया. राज्य के खेल मंत्री श्रीनिवास गौड़ ने स्वयं उनका राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वागत और अभिनंदन किया. उन्होंने उन्हें ‘तेलुगु राज्यों का गौरव’ भी बताया.

हैदराबाद में अपने घर में प्रवेश करते ही सिंधु पर फूलों की वर्षा की गई. महीनों बाद घर लौटने वाले इस चैंपियन खिलाड़ी की ‘आरती’ भी उतारी गई.

सिंधु ने कहा कि वह आने वाले दिनों में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करने वाली हैं. उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ आइसक्रीम भी खा सकती हैं.

उनका ‘आइसक्रीम’ वाला बयान उनकी उस वीडियो बातचीत के संदर्भ में था जब सिंधु और उनके परिवार ने जुलाई में टोक्यो जाने से पहले पीएम मोदी के साथ बातचीत की थी. इस बातचीत के दौरान पी एम मोदी ने उनसे पूछा था कि क्या उनके सख्त आहार कार्यक्रम में उन्हें आइसक्रीम खाने की अनुमति है? जब सिंधु ने कहा कि वह इसे कभी-कभार ही खा पाती हैं, तो मोदी ने जवाब दिया था कि जब वह (टोक्यो से) लौटेंगी तो वे उनके साथ आइसक्रीम खाएंगे.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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