Saturday, 2 July, 2022
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‘सत्ता विरोधी’ जेएनयू दशकों से भारत को नेता, आईएएस और आईएफएस अधिकारी देता रहा है

निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर से लेकर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत आर राज्य सरकारों में काम कर रहे कई अधिकारी जेएनयू से पढ़ चुके हैं और दशकों से भारतीय शासन व्यवस्था को बदल रहे हैं.

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नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी के शासन व्यवस्था में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़े दो महत्वपूर्ण चेहरे काम कर रहे हैं. इन दो लोगों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर हैं.

लेकिन ये संख्या सिर्फ दो तक हीं सीमित नहीं है. जेएनयू की पहचान सत्ता-विरोधी के तौर पर हो चली है. इसके बावजूद देश की शासन व्यस्था के परिदृश्य को देखें, चाहे वो केंद्र सरकार हो या राज्य की सरकारें, वहां जेएनयू से पढ़ें लोग मिल जाएंगे. उनमें से सभी तो जाने पहचाने चेहरे नहीं हैं लेकिन सभी का भारतीय शासन व्यवस्था में अहम योगदान रहा है.

इस रविवार को जेएनयू फिर से सुर्खियों में आ गया. नकाबपोश लोगों ने छात्रों और अध्यापकों पर हमला किया जिसमें लगभग 34 लोग घायल हो गए. जेएनयू छात्र संघ के साथ अन्य लोगों ने इसके लिए आरएसएस की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर इस हमले का आरोप लगाया वहीं एबीवीपी ने कहा कि हमला करने वाले लोग लेफ्ट संगठन के थे.

जेएनयू से पढ़े काफी लोग राजनीति में हैं जिनमें सीताराम येचुरी और योगेंद्र यादव हैं जिन्होंने कैंपस के राजनीतिकरण की आलोचना की है. सीतारमण और जयशंकर ने भी इस घटना की निंदा की.

रविवार रात निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा, ‘जेएनयू से आई तस्वीरें डरावनी है. जिस जगह को मैं जानती हूं और जो वाद-विवाद के लिए जानी जाती है न कि हिंसा के लिए. मैं आज हुई घटना की निंदा करती हूं. इस सरकार ने पिछले कुछ हफ्तों में जो कुछ कहा है उसके बावजूद विश्वविद्यालयों को छात्रों के लिए एक सुरक्षित जगह के तौर पर चाहता है.’

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जयशंकर ने कहा, ‘जेएनयू में जो कुछ हुआ उसकी तस्वीरें मैंने देखी. इस हिंसा की निंदा करता हूं. यह पूरी तरह विश्वविद्यालय की परंपरा और संस्कृति के खिलाफ है.’


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सरकार में शीर्ष अधिकारी और नीति-नियंता जिनका जेएनयू से संबंध हैं उनमें नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव आर सुब्रमण्यम भी हैं. इन लोगों ने भी कैंपस में हुई हिंसा की निंदा की है.

सुब्रमण्यण ने ट्वीट किया, ‘जेएनयू में हुई हिंसा पूरी तरह शर्मनाक और अस्वीकार्य है. मैं इसकी निंदा करता हूं और हुड़दंगी लोगों के खिलाफ जल्द ही कार्यवाई की मांग करता हूं.’

भारतीय शासन व्यवस्था में जेएनयू से पढ़े लोग

वर्तमान में केंद्र सरकार में आधे दर्जन से ज्यादा सचिव स्तर पर काम कर रहे लोग जेएनयू से पढ़ चुके हैं. जिन्होंने वहां से मास्टर्स और पीएचडी डिग्री की है. इनमें जाने पहचाने चेहरों में सुब्रमण्यम, डीओपीटी सचिव सी चंद्रमौली, अल्पसंख्यक मंत्रालय के सचिव प्रमोद कुमार दास और गुरूप्रसाद मोहापात्रा शामिल हैं.

JNU alumni in India's public life Infographic: Arindam Mukherjee | ThePrint
चित्रण: अरिंदम मुखर्जी/दिप्रिंट

दूसरे सिविल सर्विस अधिकारियों में जो जेएनयू से पढ़ चुके हैं उनमें प्रधानमंत्री मोदी के निजी सचिव राजीव टोपनो (ज्वाइंट सचिव स्तर के अधिकारी) और आईबी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अली रज़ा रिज़्वी हैं.

गैर-आईएएस अधिकारियों में शर्मिला चवाली हैं जो उत्तरी रेलवे में प्रधान वित्तीय सलाहकार के तौर पर कार्यरत हैं.

आईएफएस अधिकारियों में पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दूबे, यूएन में स्थायी भारतीय प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन, यूएन मिशन में भारत की पहली सचिव पोलौमी त्रिपाठी भी जेएनयू से पढ़ चुके हैं.


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आईपीएस अधिकारियों में तमिलनाडु के डीजीपी जेके त्रिपाठी, सिक्किम डीजीपी शंकर राव भी जेएनयू से पढ़ चुके हैं. आईबी के पूर्व चीफ सैयद आसिफ इब्राहिम और रॉ के पूर्व चीफ आलोक जोशी भी जेएनयू के एल्यूमिनाई है.

ओडिशा के मुख्य सचिव असि त्रिपाठी राज्य सरकार में काम कर रहे जाने माने जेएनयू के पूर्व छात्र हैं. केरल के वित्त मंत्री थोमस इसाक और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री और जे एंड बैंक के प्रमुख हसीब द्राबू भी जेएनयू से पढ़ चुके हैं.

पूर्व डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय फाउंडेशन के निदेशक अरविंद गुप्ता और आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान भी जेएनयू के छात्र रह चुके हैं.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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