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Wednesday, 21 February, 2024
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गाजियाबाद गैंगरेप मामले में आरोपियों और पड़ोसियों को झूठे केस में फंसाया, ‘साजिश’ रचने का आरोप

38 वर्षीय एक लड़की के कथित अपहरण और गैंगरेप की जांच कर रही पुलिस ने बताया कि मामला 'मनगढ़ंत' है. झूठी कहानी बनाने के पीछे संपत्ति विवाद मुख्य मकसद था.

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गाजियाबाद: पुलिस ने मंगलवार को सामने आए 38 साल की महिला के कथित अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले को ‘मनगढ़ंत’ बताते हुए कहा कि महिला और पांच आरोपित व्यक्तियों में से एक के साथ संपत्ति को लेकर विवाद था. उन्हें फंसाने के लिए ये ‘साजिश’ रची गई थी.

पुलिस ने गुरुवार को कथित साजिश के सिलसिले में तीन लोगों- आजाद, गौरव और अफजल को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, आजाद कथित तौर पर महिला को जानता था और अन्य दो आजाद के परिचित थे. सूत्रों ने बताया कि महिला की मेडिकल जांच रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

जांच अधिकारी आलोक दूबे ने दिप्रिंट को बताया कि अभी तक पांच शुरुआती संदिग्धों में से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है. उनमें से केवल शाहरुख नाम के एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

गाजियाबाद के एसपी (अपराध) दीक्षा शर्मा ने दिप्रिंट को बताया, ‘जांच के दौरान कुछ तथ्यों ने संदेह पैदा किया था. फिर पुलिस ने ‘बलात्कार’ पीड़िता के एक परिचित को बुलाया, जिसने अपने कबूलनामे के दौरान खुलासा किया कि यह एक साजिश थी.’

एसपी शर्मा ने कहा कि कथित अपराध का मुख्य मकसद विवादित संपत्ति को हथियाना था, जिसके लिए अदालत में दो दीवानी मामले चल रहे हैं.

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दिप्रिंट ने दिल्ली के कबीर नगर स्थित विवादित घर का भी दौरा किया, जहां शमीना नाम की एक महिला अपनी बेटी शायदा के साथ रहती है. शमीना ने महिला द्वारा आरोपी बनाए गए पांच में से दो व्यक्तियों- जावेद और शाहरुख को अपना बेटा बताया.

दिप्रिंट से बात करते हुए शमीना ने कहा कि उन्हें जावेद के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है और शाहरुख पुलिस हिरासत में है. उसने कहा कि वे उस महिला को नहीं जानते जिसके भाई ने उसके बेटों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार की शिकायत की थी.

दिप्रिंट से पुलिस ने कहा कि उनके पास गिरफ्तार किए गए लोगों के कबूलनामे और सबूत हैं, जिससे उन्हें इस निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद मिली कि आरोप मनगढ़ंत थे. इनमें कथित अपराध किए जाने से पहले ही मीडिया में प्रचार करने की योजना बनाने वाले आजाद के फोन से मिले सबूत, आरोपी की जीपीएस लोकेशन का अपराध स्थल पर नहीं होना और एक लाल ऑल्टो कार की बरामदगी शामिल है, जिसे कथित तौर पर ‘क्राइम सीन’ सेट अप करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. महिला ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि उसका एक स्कॉर्पियो कार में अपहरण किया गया था. इसकी एक प्रति दिप्रिंट के पास है.

दिप्रिंट ने महिला के भाई से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसका नंबर बंद आ रहा था.

एक अन्य मीडिया हाउस से बात करते हुए भाई ने कथित तौर पर कहा था कि उसे पुलिस द्वारा हाल ही में की गई गिरफ्तारी के बारे में कोई सूचना नहीं है. साथ ही उसने यह भी कहा कि पुलिस अपहरण और सामूहिक बलात्कार का ‘खंडन’ कर रही है, संभवतः दबाव में ऐसा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संपत्ति उनकी बहन की है और घर के बिजली बिल भी वही देती है. उन्होंने कहा कि महिला द्वारा आरोपित पांच लोगों ने घर पर ‘जबरन कब्जा कर लिया’ और अदालती मामले को वापस लेने की धमकी दे रहे हैं.

कथित अपहरण और गैंगरेप की खबर, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, ने बुधवार को दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को भी प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया था. उन्होंने इसकी तुलना 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले से की और वरिष्ठ अधीक्षक को नोटिस जारी किया. पुलिस (एसएसपी), गाजियाबाद ने मामले में की गई कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी का विवरण मांगा.

मालीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक पत्र लिखा, तब से वह भी मामले की उच्च स्तरीय जांच की बात कह रहे हैं.

पुलिस ने कहा, ‘निर्भया जैसा मामला नहीं’

गाजियाबाद के पुलिस अधीक्षक (सिटी-1) निपुण अग्रवाल ने बुधवार को कहा, ‘पीड़िता ने दावा किया कि उसके साथ बलात्कार करने के बाद आरोपी ने उसके गुप्तांगों में लोहे की रॉड डाल दी थी. लेकिन जब पुलिस ने मेरठ के एक अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने की कोशिश की तो उसने मना कर दिया.

एसपी शर्मा ने दिप्रिंट से कहा, ‘पुलिस पहले महिला को एमएमजी अस्पताल (गाजियाबाद में) ले गई, लेकिन उसने वहां एक महिला डॉक्टर से भी जांच कराने से इनकार कर दिया. वह जीटीबी अस्पताल में इलाज चाहती थी.’

शर्मा ने कहा कि उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है और वह निगरानी में है. ‘बाहरी वस्तु’ और बलात्कार किट को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक साइंस लैब प्रयोगशाला (FSL) टेस्ट के लिए भेज दी गईं है. पुलिस रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद एक बयान जारी करेगी.

दिप्रिंट को मिली एफआईआर में महिला के भाई ने शिकायत में कहा कि उसकी बहन ने उसे बताया था कि 16 अक्टूबर की रात उसके जन्मदिन पर गाजियाबाद से जाने के बाद दिल्ली-आश्रम रोड पर एक ऑटो का इंतजार कर रही थी. उसने आरोप लगाया कि कुछ समय बाद, उसे दीनू, शाहरुख, जावेद और ढोला नाम के चार लोगों ने बंदूक की नोक पर जबरन एक स्कॉर्पियो में बिठाया और उसे एक अज्ञात स्थान पर ले गए, जहां औरंगजेब नाम का एक व्यक्ति पहले से मौजूद था. प्राथमिकी में कहा गया है कि सभी कथित तौर पर महिला को पहले से जानते थे.

उसने आरोप लगाया कि उन्होंने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और उसे प्रताड़ित किया. जब वह बेहोश हो गई तो उसके हाथ-पैर बांधकर जूट के बैग में डाल दिया और उसे किसी जगह पर ‘डंप’ करने के लिए एक कार में भर कर ले गए.

सीएम को लिखे अपने पत्र में मालीवाल ने लिखा, ‘महिला ने एक भयावह घटना सुनाई, जिसके आधार पर आयोग ने उसका मामला उठाया और 19.10.2022 को यूपी पुलिस को नोटिस जारी किया’ पत्र की एक कॉपी दिप्रिंट के पास है.

पत्र में लिखा था ‘डीसीडब्ल्यू ने सर्वाइवर की मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिकॉर्ड को एक्सेस किया था. उसमें लिखा था कि महिला को रस्सी से बांधा गया, उसके स्तनों पर काटने के निशान थे, उसकी जांघों और गर्दन पर खरोंच थी, खून बह रहा था और लगभग 5-6 सेमी लंबी एक ‘लोहे की छड़’, उसके प्राइवेट पार्ट से निकाली गई थी.’

मालीवाल ने घटनाक्रम को ‘चौंकाने वाला और बेहद परेशान करने वाला’ करार दिया. उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि महिला को ये चोटें किसने पहुंचाई हैं.

उन्होंने कहा कि संदेह से परे अगर यह साबित हो जाता है कि महिला उस व्यक्ति के खिलाफ साजिश रचने में सक्रिय रूप से शामिल थी और वह पीड़ित नहीं बल्कि अपराधी है, तो उसके और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 (झूठी सूचना देना) के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.


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गिरफ्तारियां और विवादित घर

दिप्रिंट इस ‘साजिश’ के बारे में जानने के लिए गाजियाबाद के नंदग्राम पुलिस स्टेशन पहुंचा.

एसपी शर्मा के मुताबिक उन्हें पहला शक आजाद की गवाही से आया. उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘शुरू में उसने घटनास्थल के पास होने से इनकार किया था. लेकिन जब पुलिस महिला के पास पहुंची और सबूतों से भी पता चला कि अपराध के समय वह घटनास्थल के आस-पास ही था.’

अधिकारी ने दावा किया कि कथित अपराध होने से पहले ही उन्हें मीडिया में इस बात को फैलाने के उनके फोन पर सबूत मिले. उन्होंने कहा कि साजिश में मदद के लिए उसने जिन लोगों से संपर्क किया, उन्होंने भी अपराध कबूल कर लिया और इसकी पुष्टि करने के लिए उनके पास सबूत हैं.

फिर पुलिस ने लाल रंग की ऑल्टो कार को बरामद किया, जिसका उन्होंने ‘साजिश’ रचने में इस्तेमाल किया था. पुलिस ने कहा कि लाल ऑल्टो के मालिक गिरफ्तार व्यक्तियों में से एक है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कौन है.

Shamina with her daughter Shayda at the house in Kabir Nagar, Delhi | Credit: Praveen Jain, ThePrint
कबीर नगर, दिल्ली के अपने घर पर शामिया अपनी बेटी शायदा के साथ | फोटो: प्रवीण जैन, दिप्रिंट

कबीर नगर में शमीना ने दिप्रिंट को बताया कि वह पिछले 35-40 सालों से विवादित घर में रह रही है. शमीना के परिवार ने आजाद से 10 प्रतिशत ब्याज पर 2 लाख रुपये का कर्ज लिया था और कहा था कि वह उसे हर महीने 20,000 रुपये की किश्तों में पैसा वापस कर देगी.

शमीना ने कहा, ‘आज़ाद ने हमें अपने ‘साले’ से पैसे दिलवाए और मुझसे लगभग एक साल पहले पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर करवा लिए थे.’ उन्होंने कहा कि उसने पूरे पैसे वापस कर दिए हैं लेकिन अभी तक डॉक्युमेंट नहीं मिले हैं.

उनकी बेटी शायदा ने कहा कि वह ‘अनपढ़’ हैं और आज़ाद ने धोखे से उनसे ‘कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर’ करवाए थे. शमीना ने यह भी दावा किया कि यह उनका घर है और वे इसके बिजली का बिल और हाउस टैक्स का भुगतान भी कर रहे हैं.

शमीना ने कहा, ‘मेरे बेटों (जावेद और शाहरुख) को पहले चोरी के मामलों में फंसाया गया और जेल भेज दिया गया. लेकिन मुरादनगर पुलिस स्टेशन से उन्हें रिहा कर दिया गया क्योंकि आरोप गलत थे.’ शायदा के अनुसार, आज़ाद ने ही चोरी की थी और वह कई बार जेल भी जा चुका है.

शमीना ने यह भी कहा कि गाजियाबाद पुलिस वर्तमान मामले में मददगार रही है और पड़ोसियों ने भी उसका साथ दिया है. ऐसी ही एक पड़ोसी शबीला ने दिप्रिंट को बताया, ‘यहां तक कि पड़ोसियों का भी नाम इसे झूठे केस में लिया गया, ढोला, दीनू और औरंगजेब शमीना के परिवार की मदद करते रहते थे तो उन्हें भी इसमें (एसआईसी) घसीटा लिया गया.’

शमीना ने कहा, ‘वे हमें धमका रहे हैं ताकि वे हमसे घर छीन सकें.’

गाजियाबाद पुलिस ने बुधवार को कहा था कि महिला के आरोप के बाद चार लोगों को हिरासत में लिया गया है.

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, जब पूछा गया कि क्या इन चारों को क्लीन चिट दी जाएगी, तो मेरठ के महानिरीक्षक प्रवीण कुमार ने कहा, ‘हमें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है … प्रथमदृष्टया, इस मामले में ऐसा नहीं लगता कि कोई घटना हुई थी. ऐसे में सबूत मिलने का सवाल ही नहीं उठता.’

महिला के अपहरण किए जाने के दावे पर अधिकारी ने कहा, ‘नहीं, वह अपनी मर्जी से तय जगह पर गई थी.’

दिप्रिंट ने मालीवाल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन इस रिपोर्ट को प्रकाशित होने तक उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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