Monday, 27 June, 2022
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रामनवमी पर JNU हॉस्टल मेस में ‘चिकन’ को लेकर भिड़े ABVP-वामपंथी छात्र; FIR दर्ज

नॉन-वेज भोजन को लेकर नाराज करीब 30-40 एबीवीपी सदस्यों ने कथित तौर पर हंगामा किया, और परिसर में मौजूद छात्रों पर हमला किया. हालांकि, एबीवीपी का दावा है कि वामपंथी छात्रों ने रामनवमी की पूजा में बाधा डाली थी.

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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस के एक हॉस्टल में रविवार शाम रामनवमी के मौके पर चिकन बनने को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के लगभग 30-40 कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कथित तौर पर हंगामा किया और कुछ छात्रों पर हमला कर दिया. इस घटना में घायल होने के कारण पांच छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

कैंपस छात्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र इकाई एबीवीपी से जुड़े लगभग 30 छात्र हॉस्टल की कैंटीन में मांसाहारी भोजन को लेकर आपत्ति जता रहे थे.

मामले में सेक्शन 323 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 509 (किसी महिला की लज्जा का अनादर करने की कोशिश), 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. एबीवीपी के छात्रों ने भी पुलिस को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है.

दूसरी तरफ, एबीवीपी की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि उसके सदस्यों ने परिसर में एक पूजा का आयोजन किया था, जिसे वामपंथी छात्रों ने बाधित कर दिया था.

घायलों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की छात्र शाखा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कई सदस्य शामिल हैं. उनमें से एक अख्तरिस्ता एक पीजी स्टूडेंट हैं, जिनके सिर में ईंट मारे जाने से चोट लगी है. छात्राओं ने यह आरोप भी लगाया कि उनका यौन शोषण किया गया.

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एबीवीपी ने ट्वीट कर इस पूरी हिंसा के लिए वामपंथी छात्रों को जिम्मेदार ठहराया है.

घटनास्थल—कावेरी हॉस्टल—में मौजूद जेएनयू छात्र और आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने दिप्रिंट को बताया, ‘हमारे संगठन की एक छात्रा पर ईंट से हमला किया गया था, और अन्य पर ट्यूबलाइट, फ्लावरपॉट और डंडों से हमला किया गया.’ बालाजी ने यह दावा भी किया कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ), वसंत कुंज नॉर्थ सहित कई पुलिस अधिकारियों ने मौजूद होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई.

वहां मौजूद छात्रों के मुताबिक, रविवार को रामनवमी के मौके पर मेस में डिनर के लिए चिकन आने को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी. आरोप है कि इन छात्रों ने पहले मेस अधिकारियों से खाना कैंसल करने को कहा और फिर चिकन लेकर आए फूड कांट्रैक्टर के साथ मारपीट भी की और खाना लौटा दिया.

दिप्रिंट ने इस पूरे मामले पर जेएनयू प्रवक्ता पूनम कुमारी से फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज के जरिये संपर्क का प्रयास किया, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. यूनिवर्सिटी की तरफ से बयान जारी होने के बाद यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी. जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने हिंसा की घटना की ‘कड़े संभव शब्दों में’ निंदा की है.

दक्षिण पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनोज सी. ने देर रात दिप्रिंट से बातचीत में तत्काल पुलिस कार्रवाई नहीं होने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि स्थिति को 20-25 मिनट के भीतर नियंत्रण में ले आया गया था.

उन्होंने कहा, ‘रात लगभग 8.15 बजे विरोध हिंसक होने के बाद एक पीसीआर (पुलिस नियंत्रण कक्ष) कॉल आई थी. अगले 15 मिनट में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया. एक बार यूनिवर्सिटी और दोनों समूहों की तरफ से शिकायत दर्ज किए जाने के बाद हम मामला दर्ज करेंगे.’ साथ ही कहा, ‘मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’

डीसीपी ने कहा, ‘स्थिति अब नियंत्रण में है. कुछ छात्रों को मामूली चोटें लगी हैं. उनमें से पांच को अस्पताल ले जाया गया है और उनकी स्थिति में सुधार है. हमने कैंपस में तैनाती बढ़ा दी है. छात्र अब शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हैं.’ अधिकारी ने आगे कहा कि झड़प में दोनों पक्षों के छात्र घायल हैं, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने हिंसा रोकने की कोशिश की थी.


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एबीवीपी और मेस कमेटी का बयान

दिप्रिंट ने एबीवीपी और मेस कमेटी दोनों की तरफ से जारी बयान देखे हैं. मेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि ‘कावेरी हॉस्टल के बाहर के छात्रों (अनिवासियों) ने छात्रावास समिति के सदस्यों के साथ न केवल गाली-गलौज की बल्कि उन पर हमला भी किया.’

बयान में यह बताते हुए कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, कहा गया है, ‘हम तत्काल सामान्य स्थिति की बहाली का अनुरोध करते हैं, जिसमें कावेरी हॉस्टल का पूर्व-निर्धारित डिनर मेन्यू शामिल है.’

इसमें जेएनयू प्रशासन से ‘गुंडों और दंगाइयों’ के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया गया है.

दूसरी ओर, एबीवीपी के बयान में दावा किया गया है कि कावेरी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने रामनवमी के मौके पर पूजा का आयोजन किया था, जिसमें ‘बड़ी संख्या में जेएनयू के सामान्य छात्रों’ को हिस्सा लेना था.

यह पूजा 3.30 बजे शुरू होनी थी, लेकिन वामपंथी छात्रों के हंगामे के कारण यह शाम करीब 5 बजे ही शुरू हो पाई.

यह बताते हुए कि कैसे छात्रावास में इफ्तार का आयोजन ‘बहुत शांति से और मिलजुलकर’ हो रहा था, एबीवीपी का कहना है कि इसने ‘एक बार फिर इस तथ्य को स्थापित किया कि जेएनयू में एक सूक्ष्म भारत बसता है जहां विभिन्न पहचान वाले शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहते हैं.’

इसमें कहा गया है, ‘हालांकि, वामपंथी इस तथ्य को पचा नहीं पा रहे हैं. न देश में, न कैंपस में. वे देश को तोड़ने की योजना बना रहे हैं, और यहां भी उन्होंने ‘मांसाहारी भोजन’ को लेकर छात्रों के बीच हंगामे की योजना बनाई.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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