Friday, 27 May, 2022
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‘गौ-तस्करी’ मामले में 3 मुस्लिम युवक गोली लगने से घायल, गाजियाबाद पुलिस से सवाल- ‘आखिर फायरिंग क्यों?’

यूपी के गाजियाबाद में पुलिस ने गुरुवार को मवेशी तस्करी के तीन आरोपियों पर गोली चलाने की अपनी कार्रवाई को सही ठहराया और कहा कि भागने की कोशिश करते हुए पहले संदिग्धों की तरफ से फायरिंग की गई थी, जिसमें उनका एक सिपाही घायल हो गया.

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गाजियाबाद: गाजियाबाद पुलिस ने गुरुवार सुबह करीब 4.30 बजे हुई एक कथित ‘मुठभेड़’ में मवेशी तस्करी के संदेह में तीन लोगों – सद्दाम, कासिम और जीशान – को गोली मारकर घायल कर दिया. तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है. एक गाय जिसे तीन लोग कथित रूप से ले जा रहे थे, को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

गाजियाबाद (शहर) के पुलिस अधीक्षक निपुण अग्रवाल के मुताबिक, पहले संदिग्धों की तरफ से फायरिंग की गई और एक कांस्टेबल को घायल कर दिया. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने बचाव में तीनों को गोली मारी थी.

एसपी ने बताया, ‘पुलिस को विजय नगर पुलिस स्टेशन में सूचना मिली थी कि कुछ गौ तस्कर एक सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो में गाय भरकर ले जा रहे हैं. पुलिस ने स्कॉर्पियो का पीछा किया तो उन्होंने गाड़ी तेजी से भगा दी. इस वजह से उनकी (संदिग्धों की) कार अनियंत्रित होकर एक पेड़ से टकरा गई. पुलिस ने आरोपियों को सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन गौ-तस्करों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी और एक कांस्टेबल को घायल कर दिया. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की जिसमें वे तीनों घायल हो गए.’

हत्या और चोरी के प्रयास के लिए भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, और यूपी गोवध रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत चार एफआईआर दर्ज की गई हैं.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तीनों आरोपी गोहत्या के पिछले मामलों में भी शामिल थे. इन मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. सूत्रों ने कहा कि पुलिस ने हाल के मामले में गिरफ्तारी के बाद, पुराने मामलों के तार उनसे जोड़े हैं.

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दिप्रिंट से बात करते हुए, सद्दाम और कासिम के परिवार वालों ने पुलिस की इस कार्रवाई को मनगढ़ंत बताया और आशंका व्यक्त की कि पुलिस हिरासत में उन्हें और नुकसान हो सकता है.

पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ ‘मुठभेड़’ में गाय की तस्करी/ हत्या के संदिग्धों के घायल होने के कई मामले सामने आए हैं.

पिछले साल नवंबर में, गाज़ियाबाद पुलिस गोहत्या के एक कथित मामले में सात लोगों के पैरों में गोली मारने के लिए आलोचनाओं के घेरे में आ गई थी. इस मार्च और अप्रैल में भी दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः बरेली और गोंडा में कथित पशु तस्करों को गोली मारकर घायल कर दिया गया था.

ज्यादातर मामलों में पुलिस ने आत्मरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताते हुए, अपनी कार्रवाई को जायज ठहराया है.


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क्या कहती है एफआईआर और पुलिस

दिप्रिंट के पास दर्ज एफआईआर की एक प्रति है. एफआईआर में लिखा गया है, संदिग्ध एक एसयूवी में एक गाय को लेकर जा रहे थे. पुलिस ने उनका पीछा करना शुरू किया. प्राथमिकी में कहा गया है कि जब पुलिस टीम ने इन लोगों से गाड़ी रोकने के लिए कहा, तो वह तेजी से गाड़ी भगाने लगे. उन्होंने एक कीचड़ वाली सड़क पर कार को उतार दिया और इससे गाड़ी पर उनका नियंत्रण खो गया और वह एक पेड़ से टकरा गई.

एफआईआर में पुलिस पक्ष की तरफ से कहा गया, ‘पुलिस ने उन तीनों से आत्मसमर्पण करने के लिए कहा. लेकिन वे खेतों की ओर भागने लगे और फायरिंग शुरु कर दी. एक गोली एक कांस्टेबल के हाथ में लगी. पुलिस ट्रेनिंग में बताए अनुसार, हमने आत्मरक्षा में उन पर गोलियां चलाईं.’ पुलिस के मुताबिक, तीन संदिग्धों पर छह गोलियां चलाई गईं थी.

गाजियाबाद पुलिस ने एक बयान में कहा कि आरोपियों के पास से तीन पिस्तौल, जिंदा कारतूस, नशीला पदार्थ, रस्सी, कुल्हाड़ी और सिरिंज बरामद किए गए हैं. एफआईआर के अनुसार गाय, एसयूवी के पिछले हिस्से से बरामद की गई थी.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, ‘इन लोगों की योजना गाय को किसी सुनसान जगह पर ले जाकर उसे नशे का इंजेक्शन देने और फिर उसकी हत्या करने की थी. उसके बाद वह गौ मांस को दिल्ली ले जाकर अलग-अलग जगह पर बेच देते.’

एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि, पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ मार्च और मई में गोमांस तस्करी करने की बात भी कबूली है.

आरोपियों को जिन पुराने मामलों में फंसाया जा रहा है, उन पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा: ‘जीशान पर 2018 में बिजली चोरी का मामला दर्ज किया गया है और साथ ही 2015 में दर्ज गौ हत्या रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा उस पर हत्या और धोखाधड़ी के प्रयास का भी आरोप है.’

उन्होंने कहा, ‘सद्दाम के खिलाफ 2016 में गौ वध रोकथाम अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज हैं. साथ ही साथ आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत झूठी संपत्ति के निशान का उपयोग करने और बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने के लिए एनडीपीएस अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज हैं.’

‘उन्हें लड़कों को गोली क्यों मारनी पड़ी?’

कासिम और सद्दाम दोनों एक ही गाजियाबाद इलाके में रहते हैं. यह मुस्लिम बहुल इलाका है और यहां अधिकांश परिवारों का ताल्लुक निम्न-मध्यम वर्ग से है.

उनके परिवार के सदस्यों और कुछ पड़ोसियों ने दिप्रिंट को बताया कि दोनों युवक बुधवार की रात ‘नशे’ की हालत में घर से निकले थे. अगले ही दिन उनकी गिरफ्तारी की खबर मिली. इलाके के कुछ लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए.

दीवारों से झांकती ईंटें और जर्जर हो चुका ये घर सद्दाम का है. यहां रह रहे उसके परिवार वाले सद्दाम को गोली लगने की खबर मिलने के बाद से खासे परेशान हैं.

उसकी चाची फूल मुजरा ने कहा, ‘उन्होंने लड़कों को गोली क्यों मारी? हम गरीब हैं, पढ़े-लिखे भी नहीं हैं. लेकिन पुलिस को उन सभी को गोली मारने से पहले मामले के बारे में अच्छे से पता लगाना चाहिए था. सद्दाम के माथे में भी चोट लगी है’ वह आगे कहती हैं, ‘पुलिस ने उनका पीछा किया और कार का एक्सीडेंट हो गया. गोली कहीं और लग जाती तो कौन इसका जिम्मेदार होता?’

गाजियाबाद में सद्दाम का घर । बिस्मी तसकीन । दिप्रिंट

परिवार के अनुसार, सद्दाम मजदूरी करता है और उसे हथियार रखने की आदत नहीं थी.

उसकी भाभी ने बताया, ‘बुधवार की रात में उसका अपनी दूसरी पत्नी के साथ झगड़ा हुआ, जो पांच महीने की गर्भवती है. वह नशे में था और गुस्से में घर से बाहर निकल गया. लेकिन हम इतना जानते हैं कि उसके पास कभी भी बंदूक नहीं थी.’

सद्दाम की पत्नी रिजवाना ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने उन्हें फंसाया है. ‘पुलिस ने उनके पास बंदूकें होने की कहानी जानबूझकर बनाई है. हमें गाय के बारे में नहीं पता… लेकिन गाय सुरक्षित थी न? फिर उनके साथ इतनी बेरहमी क्यों?’

उनके खिलाफ दर्ज पिछले मामलों के बारे में पूछे जाने पर, उनके परिवार ने कहा, ऐसे किसी भी मामले के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

सद्दाम के घर से महज 80 मीटर दूर ही कासिम का घर है. उनकी पत्नी गुलाफ्शां ने कहा कि वह बुधवार रात करीब 9.30 बजे यह कहकर कि वह आधी रात तक वापस आ जाएंगे, ‘घूमने’ के लिए घर से निकले थे.

उसने गाय की तस्करी के बारे में कुछ भी जानने से इनकार किया और कहा कि पुलिस की ये मुठभेड़ फर्जी थी. वह आरोप लगाते हुए कहती हैं, ‘उन्होंने गाय को पेड़ से बांधा, वीडियो बनाया, मीडिया में लीक किया और मेरे पति को गोली मार दी.’

कासिम की मौसी खेर-उन-निसा ने दिप्रिंट को बताया कि वह एक कारखाने में काम करता है और ऐसे मामलों से दूर ही रहता है.

वह कहती हैं, ‘पूरे मोहल्ले से पूछ लो कि कासिम कैसा है. उसने कभी भी बड़ों को पलट कर जवाब तक नहीं दिया और न ही किसी के साथ बुरा बर्ताव किया. जब वह अगले दिन काम पर नहीं गया तो उसके कारखाने के मालिक का फोन आया और उसके बारे में पूछताछ की… तभी मैंने खबरों में आई उन तस्वीरों को देखा जिसमें वह जमीन पर पड़ा है और उसके पैरों से खून बह रहा था.’

दोनों परिवारों ने कहा कि उन्हें डर है कि युवकों का हिरासत में सही तरह इलाज नहीं किया जाएगा.

(इस खबर को अंग्रेजी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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