नई दिल्ली: पंजाब के गुरदासपुर में बुधवार को पुलिस मुठभेड़ में एक किशोर की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. उसके परिवार ने पुलिस की कहानी को खुलेआम चुनौती दी है. पुलिस का कहना है कि वह भागने की कोशिश करते समय पहले गोली चलाने लगा और जवाबी फायरिंग में मारा गया. परिवार का आरोप है कि क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी CIA ने उसे हिरासत में मार दिया और बाद में “फर्जी” मुठभेड़ दिखा दी.
बॉर्डर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस संदीप गोयल ने बुधवार को प्रेस से बात करते हुए कहा कि 19 साल के रंजीत सिंह को उस समय मुठभेड़ में मार गिराया गया जब वह बुधवार को पुलिस हिरासत से भाग गया था. उन्होंने पुष्टि की कि उसे पिछले हफ्ते असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड जवान अशोक कुमार की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. यह घटना पाकिस्तान सीमा से लगे गुरदासपुर जिले के अधियां गांव में हुई थी. पुलिस 19 वर्षीय रंजीत सिंह को उस जगह ले जा रही थी जहां उसने कथित तौर पर दोनों पुलिसकर्मियों की हत्या में इस्तेमाल हथियार छिपाने की बात कबूल की थी. इसी दौरान वह कथित तौर पर भाग निकला.
दूसरी ओर, रंजीत सिंह के चाचा हरविंदर सिंह मल्लि ने फोन पर दिप्रिंट से बात करते हुए पुलिस की कहानी को खारिज किया. उन्होंने कहा, “हमारे बेटे को पुलिस हिरासत में मार दिया गया और अपने गैरकानूनी काम को छिपाने के लिए पूरी मुठभेड़ की कहानी गढ़ी गई.”
मुठभेड़ के कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान और आतंकियों के सरपरस्त जो पंजाब को भारत का “गेटवे” बनाना चाहते हैं, उन्हें पहले पंजाब पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सेना का सामना करना होगा.
“गुरदासपुर की घटना में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित तीन लोग शामिल थे, जिसमें हमारे दो बहादुर जवान शहीद हुए. इसका मकसद पंजाब पुलिस में डर और आतंक फैलाना था. उनमें से एक ने गोली चलाने की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया.” मान ने बुधवार को जालंधर में पंजाब आर्म्ड पुलिस परिसर में पासिंग आउट परेड के दौरान यह बात कही.

परिवार का कहना है कि किशोर को मंगलवार शाम घर से उठाया गया था, जो मुख्यमंत्री और डीआईजी के गिरफ्तारी और फरार होने के दावों से अलग है. अब विपक्ष ने मुठभेड़ की सच्चाई और 22 फरवरी की हत्याओं की जांच के तरीके पर सवाल उठाए हैं.
जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने एक्स पर लिखा, “19 वर्षीय रंजीत सिंह के परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए कि यह एक सुनियोजित या फर्जी मुठभेड़ थी, मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी पंजाब पुलिस को विश्वसनीय सबूतों के साथ साफ और पारदर्शी जवाब देना चाहिए. रंजीत सिंह को कथित तौर पर घर से उठाया गया और बाद में दो पंजाब पुलिस कर्मियों की हत्या से जोड़ा गया, फिर उसे एक ‘मुठभेड़’ में मार दिया गया.”
उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग से स्वतः संज्ञान लेकर समयबद्ध न्यायिक जांच कराने की मांग की. “जब शासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और पंजाब पुलिस राज्य की ओर बढ़ता दिख रहा है, ऐसे मुठभेड़ों की बढ़ती घटनाएं स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करती हैं.” परगट सिंह ने लिखा.

उनकी पार्टी के नेता सुखपाल सिंह खैरा अधियां गांव में रंजीत सिंह के घर पहुंचे और मुठभेड़ की सच्चाई पर सवाल उठाए.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के शासन में यह 42वीं संदिग्ध और स्टेज मैनेज्ड मुठभेड़ है, जिसमें सिर्फ पीड़ित जैसे रंजीत सिंह मारे जाते हैं और पुलिस को मामूली और खुद पहुंचाई गई चोटें लगती हैं.”
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया भी रंजीत सिंह के घर पहुंचे और सीबीआई जांच की मांग की. खैरा ने भी स्वतंत्र जांच को जरूरी बताया.
पिछले एक साल में हथियार बरामदगी के दौरान पंजाब पुलिस की कई मुठभेड़ें हुई हैं. यह मामला उसी कड़ी की ताजा घटना है.
इस मामले में पुलिस का दावा है कि डोरांगला थाना प्रभारी बनारसी दास रंजीत सिंह को उस जगह ले जा रहे थे जहां उसने 22 फरवरी की हत्याओं में इस्तेमाल हथियार छिपाने की बात कबूल की थी. तभी वह भाग गया और पीछा करने के दौरान मुठभेड़ में मारा गया.
‘काव्यात्मक न्याय’
पिछले रविवार अधियां गांव के चेकपोस्ट पर दोनों पुलिसकर्मियों के शव मिले थे. जांच में पता चला कि शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी. डीआईजी गोयल ने बताया कि उस समय मौके पर सिर्फ गुरनाम सिंह और अशोक कुमार ही तैनात थे.
गुरदासपुर पुलिस चेकपोस्ट अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब दो किलोमीटर दूर है और बीएसएफ चौकी के पास है.
डीआईजी गोयल ने बताया कि जांच में तीन संदिग्धों के नाम सामने आए, जिनमें रंजीत सिंह, दिलावर सिंह और 21 वर्षीय इंदरजीत सिंह शामिल हैं. दिलावर और रंजीत उसी गांव के रहने वाले हैं जबकि इंदरजीत अली नंगल गांव का है. उन्होंने कहा कि विदेशी हैंडलरों ने तीनों को कुल दो से चार लाख रुपये देने का लालच दिया था. दिलावर को उसके 20 हजार रुपये में से 3 हजार रुपये मिल चुके थे.

गोयल ने कहा, “रंजीत सिंह और दिलावर सिंह पाकिस्तान स्थित आईएसआई हैंडलरों के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर काम कर रहे थे. उन्होंने उसी गांव के होने का फायदा उठाकर पुलिस चेकपोस्ट की रेकी की और हत्या को अंजाम दिया.”
डीआईजी ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद रंजीत सिंह ने कबूल किया कि उसने एक हथियार बेहरामपुर थाना क्षेत्र में छिपाया है. इसलिए डोरांगला के एसएचओ दास उसे बरामदगी के लिए वहां ले जा रहे थे.
रास्ते में गहलरी गांव के पास घने कोहरे और खराब सड़क के कारण पुलिस वाहन पलट गया. डीआईजी ने कहा कि इसी मौके का फायदा उठाकर रंजीत सिंह भाग निकला.
एसएचओ दास ने तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी. पूरे गुरदासपुर जिले में अलर्ट जारी किया गया और नाके लगाए गए. आरोपी की तस्वीर और कपड़ों की जानकारी भी अलग अलग टीमों को भेजी गई.
सुबह करीब 3 बजे मुकेरियां गुरदासपुर रोड पर पुराना शाला के पास एक चेकपोस्ट पर सीआईए टीम ने कथित तौर पर रंजीत सिंह को बाइक पर देखा. डीआईजी ने कहा कि उसने फिर भागने की कोशिश की और बाइक मोड़ दी, लेकिन बाइक फिसल गई.
गोयल ने कहा, “पुलिस से बचने के लिए उसने बिना उकसावे के पुलिस पार्टी पर गोली चलाई. आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें वह घायल हुआ. उसे नजदीकी सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.” उन्होंने कहा कि मुठभेड़ में सीआईए इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह घायल हुए और रंजीत के पास से 32 बोर की पिस्तौल बरामद की गई है.
रंजीत के परिवार की कहानी पुलिस के दावे से पूरी तरह अलग है.

मल्लि ने द प्रिंट को बताया कि मंगलवार शाम करीब 4 बजे पुलिस की एक टीम उनके भतीजे को घर से उठाकर ले गई. उन्होंने कहा, “रात 10 बजे वे फिर लौटे और गांव के सारे सीसीटीवी कैमरे, यहां तक कि गांव के गुरुद्वारे के कैमरे भी ले गए ताकि उनकी योजना रिकॉर्ड न हो सके.” उन्होंने बताया कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 1.30 बजे डोरांगला के एसएचओ दास ने उन्हें फोन किया और कहा कि किसी को थाने भेजकर रंजीत को घर ले जाएं.
मल्लि ने कहा, “हमें कहा गया कि थाने आकर रंजीत को घर ले जाएं. एसएचओ ने मुझे फोन पर कहा कि वह निर्दोष है और सुबह उसे परिवार को छोड़ दिया जाएगा. लेकिन इससे पहले कि हम उसे लेने जाते, मैंने लोकल चैनलों पर खबर देखी कि रंजीत को गोली मार दी गई.”
उन्होंने आरोप लगाया, “जिस सीआईए टीम ने हमारे बेटे को पकड़ा, उसी ने उसे हिरासत में मार दिया और बाद में अपनी बर्बरता छिपाने के लिए मुठभेड़ की कहानी बना दी.”
चाचा ने बताया कि रंजीत ने गुरदासपुर में स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी और हाल ही में सरकारी कॉलेज में बीए में दाखिला लिया था. उसके पिता पिछले दस साल से सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी कर रहे हैं और गांव में परिवार का खर्च चला रहे हैं.
खैरा ने अपने पोस्ट में लिखा, “रंजीत सिंह को मंगलवार शाम 4 बजे परिवार और गांव वालों की मौजूदगी में घर से ले जाया गया. अगर वह दोषी होता तो क्या घर पर पुलिस का इंतजार करता. उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वह अनुशासित लड़का था. अगर पुलिस ने कुछ गलत नहीं किया तो रात 10 बजे गांव के सारे डीवीआर क्यों ले गए और सीसीटीवी कैमरे क्यों तोड़े.”
उन्होंने और भी सवाल उठाए.
“अगर पुलिस की कहानी सही है तो जब जीप पलटी तो सिर्फ पुलिसकर्मी ही घायल क्यों हुए. रंजीत को चोट क्यों नहीं लगी जबकि वह हथकड़ी में था. वह हथकड़ी लगे होने के बावजूद कैसे भाग गया और रात 3 बजे के अंधेरे में उसे बाइक और बंदूक कैसे मिल गई. अगर वह आईएसआई एजेंट था तो उसे एक ही जीप में क्यों ले जाया जा रहा था. ज्यादा फोर्स क्यों नहीं थी और आधी रात को ही क्यों ले जाया गया. एक तरफ हम कहते हैं कि आईएसआई हथियार, ड्रग्स और पैसा सप्लाई करती है और भारत के अहम ठिकानों को निशाना बनाती है, तो फिर एक होम गार्ड जवान और एक एएसआई की हत्या से भारत जैसा मजबूत देश कैसे अस्थिर हो सकता है,” खैरा ने पूछा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पूछा गया कि हिरासत से भागने के कुछ ही घंटों में बाइक और हथियार कैसे सामने आ गए, तो डीआईजी गोयल ने कहा कि जांच “पेशेवर” और “पारदर्शी” रही है. उन्होंने कहा, “जो आरोपी पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर के साथ मिलकर उनके दिए गए काम से अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा था, उसे काव्यात्मक न्याय मिला है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: लद्दाख में सेना को ज़िम्मेदारी लेनी थी, राजनीतिक नेतृत्व पर बोझ नहीं डालना था
