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Wednesday, 11 February, 2026
होमदेशअडाणी मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को 1 साल की जेल, ‘जिम्मेदार रिपोर्टिंग’ पर कोर्ट ने क्या कहा

अडाणी मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को 1 साल की जेल, ‘जिम्मेदार रिपोर्टिंग’ पर कोर्ट ने क्या कहा

यह मामला अडाणी एंटरप्राइजेज की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया कि नायर ने एक्स पर अडाणी ग्रुप को निशाना बनाते हुए ‘स्कैंडलस, मानहानिकारक’ पोस्ट किए, साथ ही adaniwatch.org पर भी.

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नई दिल्ली: यह कहते हुए कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का अर्थ यह नहीं है कि बिना जांचे-परखे आरोप लगाकर किसी व्यक्ति या कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जाए, गुजरात की एक अदालत ने मंगलवार को पत्रकार रवि नायर को एक वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया.

अडाणी ग्रुप ने पत्रकार के खिलाफ उनके सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य प्रकाशनों को लेकर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था.

55 पन्नों के आदेश में मानसा की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट दामिनी दीक्षित ने कहा कि “रिकॉर्ड में मौजूद सबूत बताते हैं कि प्रकाशित सामग्री में शिकायतकर्ता कंपनी के खिलाफ ऐसे आचरण का आरोप लगाया गया है, जिस पर विश्वास किया जाए तो उसकी नैतिक और व्यावसायिक साख कम हो सकती है.”

जज ने कहा कि “ये आरोप केवल सामान्य तथ्यों की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सिर्फ घटनाओं का वर्णन करने से आगे जाते हैं” और “इस्तेमाल की गई भाषा अनुमान या जांच जैसी नहीं, बल्कि साफ तौर पर आरोप लगाने वाली है.”

अदालत ने कहा, “आरोपी मिस्टर रवि नायर को भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत दोषी ठहराया जाता है, जो धारा 500 के तहत दंडनीय है.” इस तरह कोर्ट ने नायर को मानहानि का दोषी माना.

बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि ये प्रकाशन उचित आलोचना या राय की अभिव्यक्ति हैं. अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी में आलोचना का अधिकार शामिल है, लेकिन यह कानून की सीमा के भीतर होना चाहिए.

जज ने नायर की प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी, जिसमें अच्छे आचरण के आधार पर सज़ा से राहत देने की बात होती है. उन्होंने कहा कि प्रोबेशन उन लोगों के लिए होता है जिनकी गलती अज्ञानता, कम उम्र या पल भर की चूक से हुई हो, न कि सोच-समझकर किए गए काम के लिए.

आदेश में कहा गया, “इस मामले में आरोपी एक परिपक्व व्यक्ति हैं, जिन्हें अपने काम के कानूनी परिणामों की पूरी जानकारी है. उनके पेशे की वजह से उन पर ज्यादा जिम्मेदारी की अपेक्षा भी होती है.”

अदालत ने कहा कि प्रोबेशन देकर नरमी दिखाना कानून के डर को कम करेगा और ऐसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को गलत संदेश देगा. जब सख्त न्यायिक कार्रवाई होती है, तभी समाज को यह संदेश जाता है कि ऐसे उल्लंघन पर कड़ा कदम उठाया जाएगा.

मामले पर एक नज़र

अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज ने नायर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि उन्होंने अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच अपने एक्स हैंडल पर कंपनी को निशाना बनाते हुए कई “स्कैंडलस, भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक” पोस्ट किए.

अदालत के आदेश के अनुसार, कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि नायर ने www.adaniwatch.org
पर मानहानिकारक लेख प्रकाशित किए, जिसका शिकायतकर्ता कंपनी या अदानी ग्रुप की किसी भी इकाई से कोई संबंध नहीं है.

कंपनी ने कहा कि इन सभी प्रकाशनों का कुल असर यह हुआ कि वैश्विक निवेशकों और आम लोगों के बीच उसकी छवि खराब हुई. कंपनी और अडाणी ग्रुप को ऐसे दिखाया गया जैसे वे गलत राजनीतिक संरक्षण के लाभार्थी हों, कानूनों से खेलते हों और अनैतिक, अवैध या गलत कारोबारी तरीकों में शामिल हों. कंपनी ने कहा कि नायर ने ज़रूरी सावधानी और जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों का पालन नहीं किया.

बचाव में, नायर के वकीलों ने शिकायत की वैधता, अदालत के क्षेत्राधिकार, सही अधिकृत अनुमति की कमी और शिकायत में बुनियादी खामियों पर सवाल उठाए.

अदालत ने कहा कि नायर लंबे समय से खुद को पत्रकार और सार्वजनिक टिप्पणीकार के रूप में पेश करते रहे हैं, इसलिए वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित बयानों के असर, पहुंच और परिणाम से अनजान होने की बात नहीं कह सकते.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “रिपोर्टिंग या टिप्पणी करने वाले व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह अपनी भूमिका की जिम्मेदारी समझे, खासकर तब जब वह किसी की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले सीधे आरोप लगा रहा हो.”

अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूत दिखाते हैं कि ये प्रकाशन केवल नीतियों की सामान्य आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि अडाणी ग्रुप पर सीधे आरोप लगाए गए थे.

अदालत ने कहा कि बार-बार ऐसे प्रकाशन करना, उनका साफ आरोप लगाने वाला लहजा और व्यापक पहुंच वाले प्लेटफॉर्म पर उन्हें साझा करना यह दिखाता है कि आरोपी को पता था, या कम से कम उसे समझना चाहिए था, कि इससे कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा.

इसके अलावा, अदालत ने कहा कि नायर ने अपने बचाव में सच्चाई, सद्भावना या जनहित के आधार पर अपने कदमों को सही ठहराने के लिए कोई ठोस सामग्री पेश नहीं की, जो मानहानि के मामलों में बचाव के आधार होते हैं.

अडाणी ग्रुप ने अदालत से कहा कि विभिन्न उद्योगों में उसकी बड़ी साख है और उसके खिलाफ कोई भी झूठा, लापरवाह या दुर्भावनापूर्ण आरोप निवेशकों, शेयरधारकों, वित्तीय संस्थानों, नियामक संस्थाओं, व्यापार भागीदारों, कर्मचारियों और आम जनता के बीच उसकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

अदालत ने साफ किया कि समानता और जीवन का अधिकार किसी को भी, यहां तक कि कंपनियों के खिलाफ भी, मानहानिकारक बयान देने का अधिकार नहीं देता. अदालत ने कहा, “जब ऐसे बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित किए जाते हैं, तो वे निवेशकों, नियामकों, व्यापार भागीदारों और समाज के जिम्मेदार लोगों की नजर में शिकायतकर्ता कंपनी की प्रतिष्ठा कम कर सकते हैं.”

अदालत ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में व्यक्ति को आलोचना और असहमति का अधिकार है, लेकिन अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण नहीं है और इसका इस्तेमाल किसी की मानहानि करने के लिए नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा, अदालत ने कहा कि नायर ने अदानी ग्रुप की कारोबारी वृद्धि को भ्रष्टाचार, पक्षपात और गैरकानूनी तरीकों का नतीजा दिखाने की कोशिश की. अदालत ने कहा, “इन आरोपों की प्रकृति और भाषा से उन्हें उचित टिप्पणी या स्वीकार्य राय नहीं माना जा सकता.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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