सीबीआई दफ्तर का फाइल फोटो
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कई गतिरोधों का सामना करने के बाद सीबीआई ने पहली बार लिनियेज टेस्टिंग नामक प्रक्रिया से कथित तौर पर बलात्कारी अनिल कुमार को धर दबोचा .

नई दिल्लीः यह क्रोमोसोम, उस महिला के योनि स्राव से निकाला गया था जिसके साथ 6 जुलाई 2017 को हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में बलात्कार किया गया और इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी, जिसने अंततः कांगड़ा में कथित बलात्कार करने वाले और स्वयं उस व्यक्ति के लिए जांचकर्ताओं का नेतृत्व किया।

यह क्रोमोसोम लिनियेज टेस्टिंग (वंश परीक्षण) नामक प्रक्रिया,भारत में पहली बार उपयोग की गई,के माध्यम से निकाला गया था।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को,राज्य पुलिस द्वारा की जाने वाली जाँच का पर्दाफाश करते हुए कहा कि लड़की के बलात्कार और हत्या के मामलें में हिमाचल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पाँच संदिग्धों का इस मामले से कोई लेना देना नहीं था,क्योंकि उनका डीएनए नमूना बलात्कारी से मेल नहीं खा रहा था, इस मामले का असली गुनहगार तो लकड़हारा अनिल कुमार था।

पीड़िता स्कूल से अपने घर के लिए करीब 4.30 बजे बैंकुफ्फर क्षेत्र से निकली थी। जैसा ही वह हलाइला के जंगल को पार कर रही थी, एक संदिग्ध आदमी उसे छेड़ने लगा और फिर उसने लड़की के साथ बलात्कार करके उसे मौत के घाट उतार दिया।

दिप्रिंट ने कई फोरेंसिक विशेषज्ञों से बात की कि यह वंशावली परीक्षण क्या है और वीर्य के नमूने और क्रोमोसोम ने संदिग्ध बलात्कारी को खोजने में कैसे जांचकर्ताओं की मदद की।

वंशावली परीक्षण क्या है?

वंशावली परीक्षण, जिसे पारिवारिक खोज के रूप में भी जाना जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जो इन मामलों में – डीएनए प्रोफाइल या नमूने का विश्लेषण करती है, वीर्य – जो किसी व्यक्ति की वंशावली, नस्ल और प्रजाति का पता लगाने का यंत्र है।

यह प्रक्रिया, जिसका उपयोगअमेरिका सहित इसके राज्यों जैसे वर्जीनिया, कोलोराडो, टेक्सास, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा तथा मिशिगन में बलात्कार और हत्या के मामलों में जैविक सबूत से जाँच की ओर बढ़ने के लिए किया जाता है।

फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, वंशावली परीक्षण का इस्तेमाल पहली बार 1983 में लीसेस्टरशायर, ब्रिटेन में किया गया था, जहाँ पर दो लड़कियों के साथ गैंग रेप हुआ था।जांचकर्ताओं ने योनि स्राव से बलात्कारियों का डीएनए लिया, लेकिन यह गिरफ्तार किए गए किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के डीएनए के साथ मेल नहीं खाया था।

पहले यह परीक्षण उस नस्ल को पहचानने के लिए किया गया जिसे दोषी ठहराया गया था।इसके बाद, उस वंशावली से 100 से अधिक पुरुषों के डीएनए नमूने एकत्र किए गए ताकि अंततः अपराधी का पता लगाया जा सके, इसके बाद मुख्य आरोपी को पकड़ लिया गया था।

“तब से यह परीक्षण विकसित हुआ। अब यह और अधिक सटीक हो गया है। हालांकि, भारतीय एजेंसियां इसे संचालित नहीं करती हैं, क्योंकि इसमें शामिल मंजूरी का सवाल है।एक फोरेंसिक विशेषज्ञ ने कहा कि हो सकता है कि एक व्यक्ति नमूना देने का इच्छुक न हो, या मजिस्ट्रेट पूरी वंशावली के लिए नमूनों को इकट्ठा करने के आधिकारिक आदेश नहीं दे सकता हो,इसलिए यह प्रक्रिया अक्सर संघर्षमय दिखती रहती है।”

कोटखाई मामले का खुलासा करने में कैसे सहायक हुई यह प्रक्रिया

क्रोमोसोम निकालना

पोस्टमॉर्टम के दौरान, विशेषज्ञों द्वारा लड़की की योनि में हो रहे रिसाव का परीक्षण किया गया और इसमें वीर्य की उपस्थिति पाई गई। हालांकि, वीर्य को योनि के रिसाव से अलग नहीं किया जा सकता था, इसलिए बलात्कारी की डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए वाई क्रोमोसोम या पुरुष क्रोमोसोम निकाला गया।

“यौन उत्पीड़न के मामलों में, योनि स्त्राव जैसे साक्ष्य दोनों के शारीरिक संपर्क की वजह से महिला और पुरुष डीएनए दोनों शामिल होते हैं।इस मामले में, निर्वहन में एक्स और वाई क्रोमोसोम दोनों शामिल थे।एम्स में फोरेंसिक विशेषज्ञ अभिषेक यादव ने कहा, “बलात्कारी के डीएनए को पाने और उसकी पहचान करने के लिए, दोनों को क्रोमोसोम निकालना और फिर इसका विश्लेषण करके अलग करना महत्वपूर्ण था।”

“एक बार क्रोमोसोम निकाला गया और वाई-एसटीआर नामक प्रक्रिया का उपयोग करके इसका विश्लेषण किया गया, इसमें डीएनए की व्याख्या विस्तार से की गई थी और एक प्रोफाइल बनाई गई थी। “एम्स में फोरेंसिक विशेषज्ञ अभिषेक यादव ने कहा।

परिवार की पहचान:

एक बार डीएनए की रिपोर्ट तैयार हो जाने के बाद, अगली चुनौती संदिग्ध की पहचान करना था।

इस प्रक्रिया में, सीबीआई ने 400 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए और 2,000 अन्य लोगों से पूछताछ की, और अंततः 250 संदिग्धों की एक सूची बनाई, जो बगीचे में नियमित रूप से मौजूद रहते थे जहां लड़की का मृत शरीर पाया गया था।

उन शंकित 250 लोगों के रक्त के नमूने एकत्रित करने के बाद बलात्कारी के डीएनए से मिलाये गए , लेकिन इससे कोई भी मामले को लेके कोई भी बढत नहीं मिली।

आम तौर पर एक रिपोर्ट में कई तथ्य होते हैं जिनके नमूने को आरोपी के साथ मिलाया जाता है। यदि 14 तथ्य रिपोर्ट में मिलते है तो यह एकदम सही मेल है, लेकिन अगर केवल 8 या 9 तथ्य मिलते है, तो यह आंशिक रूप से ही रिपोर्ट को पूरा कर पाते है। इस मामले में, सभी 250 पुरुषों(आरोपीओ) को छोड़ दिया गया क्योंकि उनके खिलाफ आंशिक रूप से भी सबूत नहीं थे, “एक जांचकर्ता ने कहा।

पाए गए डीएनए का वंश परीक्षण और वाई-एसटीआर की जांच बलात्कारी के वंश, जाति और आयु की पहचान के लिए एकत्रित किए गए थे।

हमारे शरीर में हर कोशिका में डीएनए होता है। यह एक बहुत लंबा अणु है जिसमें हमारी सभी अनुवांशिक जानकारी होती है। ऐसे मामलों में, एक बार डीएनए की रिपोर्ट बनाई गई जाती है जो कि व्यक्ति की जाति, लक्षण, वंश और उम्र की पहचान करने में मदद कर सकती है। डीएनए को देखकर, कोई भी तथ्यो से जानकारी ले सकता है और बता सकता है कि व्यक्ति किस वंश से संबंधित है और उसके पूर्वजों कौन थे, “यादव ने कहा एक बार परीक्षण होने के बाद, जांचकर्ताओं ने कांगड़ा परिवार की ओर ध्यान केन्द्रित किया।

आरोपी की मांग:

“परीक्षण ने हमें उस परिवार की पहचान करने में मदद की जिसका बलात्कारी सदस्य था। उस आदमी की पहचान करने के लिए, जांच को उस गांव की तरफ विस्थापित कर दिया गया और नमूने को एक और जांच के लिये भेज दिया गया। आखिरकार, डीएनए के नमूने की जांच पितृत्व और मात्र्तव वंश व् उसकी जाति का पता लगाने के लिये अलग से की गई , जिसके बाद हमें परिणाम मिला, “एक सीबीआई अधिकारी ने कहा।

जांच से सीबीआई ने इलाके के 25 वर्षीय लकडहारे अनिल कुमार को तलब किया, जिसे पहले हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद, उसके डीएनए को बलात्कारी के प्रोफाइल से मिलाया गया था और यह पूरी तरह से मेल खाता था, एक अधिकारी ने समझाया।


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