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2018 में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का प्रवाह जारी है। दिप्रिंट.इन
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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले का साल 2018 फ़र्ज़ी खबरों के लिए एक भयावह साल साबित हुआ है. राजनेता, एक्टिविस्ट और यहां तक कि कुछ पत्रकार भी इस साल झूठी खबरें शेयर करने से खुद को रोक नहीं पाए. आइये देखते हैं कि कौन सी दस झूठी ख़बरों ने इस साल खूब सुर्खियां बटोरीं…

1. सिद्धू की रैली में लगे पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की राजस्थान में एक चुनावी रैली में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगने वाला फ़र्ज़ी वीडियो खूब वायरल हुआ. दिसंबर में हुई इस रैली के इस वीडियो को हज़ारों लोगों ने शेयर किया. ज़ी न्यूज़ और कई अन्य समाचार पोर्टलों ने इस फ़र्ज़ी वीडियो के आधार पर खबर चलाई. लेकिन असली वीडियो से यह साबित हो गया कि लोगों ने ज़िंदाबाद नहीं, मुर्दाबाद के नारे लगाए थे.

2. केरल बाढ़ में मदद कर रहे संघ कार्यकर्ताओं की फोटो

इस साल अगस्त में केरल ने 1924 के बाद सबसे भयानक बाढ़ का सामना किया. बाढ़ पीड़ितों की मदद करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की तस्वीरें खूब वायरल हुईं, जब इन्हें संघ के समर्थकों ने बढ़ चढ़कर शेयर किया. हालांकि यह पाया गया कि ये तस्वीरें केरल की नहीं, बल्कि गुजरात की थीं  जहां 2017 के मानसून में भारी बारिश हुई थी. संघ ने केरल के कार्यकर्ताओं की फोटो भी डाली थी, लेकिन वह इतनी वायरल नहीं हो सकी.

3. शेफाली वैद्य, योगी और श्री श्री की तिकड़ी की फोटो

मई के महीने में गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी ने एक फ़र्ज़ी फोटो ट्वीट की, जिसमें दक्षिणपंथी लेखिका शेफाली वैद्य को फोटोशॉप के ज़रिये श्री श्री रविशंकर और योगी आदित्यनाथ की एक फोटो में फिट कर दिया. यह फोटो 2012 में आई फिल्म ‘ओह माय गॉड’ के एक सीन की तरह दिख रही थी. इसके जरिये इन तीनों का मज़ाक उड़ाने की कोशिश की गई. बाद में मेवानी ने इस कृत्य के लिए माफ़ी मांगी और अपने ट्वीट को डिलीट भी किया, लेकिन इसके बावजूद वे शेफाली वैद्य को उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने से नहीं रोक पाए. शेफाली ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) और आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत मामला दर्ज कराया.

4. दिव्या स्पन्दना का दावा, मोदी हाईस्कूल तक ही पढ़े हैं

कांग्रेस सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना ने 1998 में मोदी और राजीव शुक्ला के बीच हुए एक इंटरव्यू का आधा अंश ट्वीट किया, जिसमें प्रधानमंत्री अपनी शिक्षा के बारे में बात करते हुए नज़र आ रहे हैं. स्पंदना ने इस वीडियो का केवल वह भाग शेयर किया जिसमें वे हाईस्कूल तक पूरी की गयी पढ़ाई की बात कर रहे थे. दिव्या ने इस वीडियो के उस भाग को काट दिया जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के द्वारा एमए की परीक्षा पास की थी. हालांकि उन्होंने अपनी गलती को कबूला, लेकिन उन्होंने अपने वीडियो वाले ट्वीट को डिलीट नहीं किया.

5. मोदी ने पहनी मुसलमानों की टोपी

इस साल सितंबर में प्रधानमंत्री दाऊदी बोहरा समुदाय के लोगों को संबोधित करने इंदौर गए थे. इसी के बाद मोदी की एक फोटो वायरल हो गयी जिसमें उनके सिर पर मुसलमानों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी लगी हुई थी. इस फोटो को देखकर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे डालीं. हालांकि प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गयीं असली तस्वीरों ने साबित किया कि उन्होंने ऐसी कोई टोपी नहीं पहनी थी और वायरल तस्वीर फ़र्ज़ी थी.

6. किसान क़र्ज़ माफ़ी पर राहुल गांधी का यू-टर्न

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की. सत्ता में आने से पहले राहुल गांधी ने वादा किया था कि वे मध्य प्रदेश के किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर देंगे. एक अन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि क़र्ज़ माफ़ी से मदद तो ज़रूर मिलेगी पर यह किसानों की दुविधा का निवारण नहीं है. सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वीडियो को क्लिप किया और दावा किया कि राहुल गांधी सत्ता में आते ही अपने वादे से मुकर गए. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ लेने के बाद ही 2 लाख रुपये तक के क़र्ज़ में डूबे किसानों का क़र्ज़ माफ़ कर दिया.

7. सिग्नेचर ब्रिज की ‘आप’ की तस्वीरें

सालों के लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा हुआ और इसी साल नवंबर में प्रदेश की आम आदमी पार्टी ने इसका उद्घाटन भी किया. पार्टी ने इसका जश्न तो मनाया लेकिन विवादों में फंसे बिना नहीं रह सकी. आप के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने ब्रिज के निर्माण कार्य पूरा होने की ख़ुशी ट्वीट के ज़रिये जाहिर की लेकिन इसके लिए वे दिल्ली की बजाय नीदरलैंड्स के रॉटरडैम स्थित इरैस्मस ब्रिज की फोटो डाल बैठे. इसके लिए ट्विटर पर उनकी कड़ी आलोचना हुई लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने इस ट्वीट को डिलीट नहीं किया.

8. कांग्रेस दुनिया की दूसरी सबसे भ्रष्ट राजनीतिक पार्टी है

सितंबर में फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री और आरिन कैपिटल के फॉउन्डर मोहनदास पाई ने एक लिस्ट भरा लेख शेयर किया जिसमें कांग्रेस पार्टी को दुनिया की दूसरी सबसे भ्रष्ट पार्टी घोषित किया था और इसको और भी ज़्यादा विश्वसनीय बनाने के लिए इस पर बीबीसी का टैग भी दिया गया जिसे बीबीसी की ऑनलाइन एडिटर ने सिरे से नकार दिया.

9. टीपू सुल्तान एक भिखारी था

इस साल नवंबर में जब कर्नाटक सरकार ने फैसला किया कि वे टीपू जयंती धूम-धाम से मनाएंगे, एक भिखारी जैसी वेषभूषा वाले व्यक्ति की फोटो खूब वायरल हुई. दावा यह था कि यह भिखारी व्यक्ति ही टीपू सुल्तान है और जो हीरो स्कूल की पुस्तकों में दिखाया जाता था वह टीपू नहीं है. भाजपा प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय के साथ-साथ कई लोगों ने इस फोटो को शेयर भी किया. खैर, यह भिखारी जैसा दिखने वाला आदमी दरअसल 1800 ईस्वी का एक ग़ुलामों का व्यापारी था जिसका नाम रुमालिज़ा था. यह फोटो आधुनिक तंज़ानिया के तटीय इलाके ज़ांज़ीबार का है. आपको यह भी बता दें कि जब दुनिया के पहले आधुनिक कैमरे ने फोटो खींची थी, तब तक टीपू सुल्तान जीवित नहीं थे.

10. शेहला रशीद ने कठुआ पीड़ित के लिए चंदा हड़प लिया

इस साल जनवरी में जम्मू कश्मीर के बक्करवाल समुदाय की एक आठ साल की लड़की का बलात्कार करने के ​बाद उसकी हत्या कर दी गयी. लड़की के मां बाप इतने गरीब थे कि वे इन्साफ पाने के लिए खर्च नहीं उठा सकते थे. इसी साल अप्रैल में क्राउड फंडिंग करने वाली ऑनलाइन कंपनी crowdnewsing ने चंदा इकठ्ठा किया जिसको शेहला ने बढ़ चढ़कर प्रमोट किया था.

इस साल नवंबर में दक्षिणपंथियों ने आरोप लगाना शुरू किया कि शेहला रशीद इस इकट्ठे किये चंदे को डकार गयी. ज़ी न्यूज़ एडिटर सुधीर चौधरी ने इसका एक प्राइम टाइम भी किया, लेकिन ऑल्ट न्यूज़ द्वारा किये गए एक फैक्ट चेक में पता चला कि पैन कार्ड की कमी की वजह से परिवार को पैसा निकवाने में दिक़्क़त हो रही थी लेकिन पैसे परिवार के अकाउंट में ही डलवाए गए थे शेहला के अकाउंट में नहीं.

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


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