Tuesday, 5 July, 2022
होमहेल्थरूस के RDIF ने कहा- स्पूतनिक वी COVID वैक्सीन अगले माह से आपूर्ति के लिए उपलब्ध हो सकती है

रूस के RDIF ने कहा- स्पूतनिक वी COVID वैक्सीन अगले माह से आपूर्ति के लिए उपलब्ध हो सकती है

स्पूतनिक वी को रूस और भारत का एक साझा प्रयास बताते हुए आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दमित्रिव ने दिप्रिंट को बताया कि रूस कोविड के टीके विकसित करने पर अन्य देशों के साथ भी सहयोग का इच्छुक है.

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नई दिल्ली: रूस के प्रत्यक्ष निवेश फंड (आरडीआईएफ) के शीर्ष अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया है कि स्पूतनिक वी कोविड वैक्सीन अगले महीने तक आपूर्ति के लिए उपलब्ध हो सकती है.

आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दमित्रिव ने कहा, ‘हम नियामकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि जनवरी 2021 की शुरुआत में नियामक मंजूरी भी मिल जाएगी. हम इसी समयसीमा के भीतर इस वैक्सीन की आपूर्ति एक व्यापक आबादी के बीच करने के लिए भी तैयार हैं.’

स्पूतनिक वी वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा देश के संप्रभु धन कोष यानी रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के सहयोग से विकसित किया जा रहा है.

स्पूतनिक-वी वेबसाइट के मुताबिक, इसे 11 अगस्त को रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से पंजीकृत किया गया था. इसके साथ ही यह ‘बाजार में सबसे पहले पंजीकृत कोविड-19 वैक्सीन’ बन गई थी.

‘भारत कोल्ड चेन सिस्टम मजबूत करे, पुख्ता योजना की जरूरत’

भारत में वैक्सीन के वितरण पर दमित्रिव ने कहा कि हालांकि, भारत के पास देश में टीकाकरण अभियान चलाने का अनुभव है, लेकिन ‘बड़े पैमाने पर कोविड-19 टीकाकरण शुरू करने से पहले उसके पास पुख्ता योजना होनी चाहिए.’

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दमित्रिव ने कहा, ‘जैसा हम समझते हैं, देश की सरकार एक विशेष कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम पर काम कर रही है जिसमें मौजूदा यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) की पूरी प्रक्रिया, प्रौद्योगिकी और नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘कोल्ड चेन सिस्टम मजबूत करना और टीके को सुरक्षित रखना सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती टीकाकरण प्रक्रिया की व्यापक सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी. एक अन्य अहम बात है टीकाकरण में सबसे पहले स्वास्थ्य पेशेवरों के अलावा सामाजिक-जनसांख्यिकीय समूहों को प्राथमिकता मिलना.’

भारत और रूस का संयुक्त प्रयास

दमित्रिव ने कहा कि स्पूतनिक वी भारत और रूस का एक साझा प्रयास है, उन्होंने कहा, ‘भारत में स्थानीय स्तर पर वैक्सीन के उत्पादन के लिए हमारे पास अभी चार मैन्यूफैक्चरिंग पार्टनर हैं. काफी हद तक यह टीका हम दो देशों के बीच एक संयुक्त प्रयास है क्योंकि अधिकांश उत्पादन भारत में होगा. सही बात यह है कि हम भारतीय फार्मा उद्योग की विशेषज्ञता और क्षमता के कायल हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जैसा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई मौकों पर कह चुके हैं, रूस कोविड-19 टीके विकसित करने पर अन्य देशों के साथ सहयोग के लिए बहुत उत्सुक है. जाहिर बात है कि इसमें खासकर भारत और ब्रिक्स के साथी देश शामिल हैं.’

उन्होंने कहा, ‘भारत वैक्सीन उत्पादन में ग्लोबल लीडर है, जिसकी दुनियाभर में निर्मित सभी टीकों में लगभग 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. यह देश एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग हब है और इसे व्यापक स्तर पर देशव्यापी टीकाकरण कार्यक्रमों का खासा अनुभव भी है.

सितंबर में आरडीआईएफ ने भारत में स्पूतनिक वी के क्लीनिकल ट्रायल के संचालन और स्थानीय स्तर पर इसके वितरण के लिए साथ मिलकर काम करने के उद्देश्य से डॉ. रेड्डीज के साथ एक करार किया था. इस सौदे के तहत भारत में नियामक मंजूरी पर वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक डॉ. रेड्डी को उपलब्ध कराई जाएंगी.


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उन्होंने कहा, ‘चूंकि देश के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने हमें अपने टीके के एडॉप्टिव फेस-2 और फेस-3 ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी है, हमें पूरा भरोसा है कि हम भारत में वैक्सीन वितरण संबंधी जरूरी नियामक मंजूरी भी हासिल कर लेंगे.

उन्होंने बताया, ‘भारत की प्रमुख फार्मा कंपनियों में से एक और एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी हीटेरो के साथ 27 नवंबर को घोषित हमारे करार के मुताबिक कंपनी 2021 से ही हर साल स्पूतनिक वी वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक का उत्पादन शुरू कर देगी.’

कोवाक्स पोर्टफोलियो

अपनी वैक्सीन के सुरक्षित और प्रभावी होने का दावा करते हुए दमित्रिव ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि स्पूतनिक वी विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीकों के कोवाक्स पोर्टफोलियो का हिस्सा बने.’

उन्होंने कहा, ‘हम इस पहल को विश्व स्तर पर टीकों के वितरण में काफी अहम मानते हैं खासकर उन देशों तक पहुंचाने में जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है. दुनिया के लिए कोविड-19 टीकों का पूरा पोर्टफोलियो जरूरी है और हमें इनका उत्पादन करने और हर जरूरतमंद तक इन्हें सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है.’

कोवाक्स 172 देशों की भागीदारी वाला वैश्विक गठबंधन है, जिसका नेतृत्व साझे तौर पर गावी, द कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेअर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई) और डब्ल्यूएचओ करते हैं. इसका उद्देश्य वैक्सीन के विकास और निर्माण में तेजी लाना और निम्न और मध्यम आय वाले देशों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना है.

विश्व स्तर पर आरडीआईएफ को 50 से अधिक देशों से वैक्सीन की 120 करोड़ से अधिक खुराक के लिए आवेदन मिले हैं.

पहले ही हो चुके समझौतों के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2021 से हर साल 50 करोड़ लोगों के लिए वैक्सीन का निर्माण किया जाएगा. दमित्रिव ने कहा, ‘मौजूदा समय में हम कई अन्य देशों से मिले आवेदनों पर विचार कर रहे हैं और इस पर जिस तरह रुचि दिखाई जा रही है उसे देखते हुए उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है.’

टीकों की गहन स्क्रुटनी होनी चाहिए

ब्रिटेन में हाल में एक कंडीडेट पर कथित प्रतिकूल प्रतिक्रिया के बाद एस्ट्रा जेनेका का टेस्ट रोके जाने के मामले में टिप्पणी करते हुए दमित्रिव ने कहा, ‘स्पूतनिक के विपरीत एस्ट्रा जेनेका द्वारा विकसित टीके में एक चिंपैंजी के एडेनोवायरस का उपयोग किया गया है. यह तकनीक दीर्घकालिक अध्ययनों में मानव एडेनोवायरल वैक्सीन के समान सुरक्षित नहीं हैं जो दशकों से चल रही हैं.’

उन्होंने कहा, ‘नियमत: सभी टीकों की वैज्ञानिक समुदाय के साथ-साथ नियामकों द्वारा भी बेहद कड़ी जांच की जानी चाहिए. इसके बाद ही उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद की गारंटी होगी.’ साथ ही जोड़ा कि अब तक स्पूतनिक वी को लेकर साइड-इफेक्ट का कोई मामला सामने नहीं आया है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )

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