नई दिल्ली: फाइजर कंपनी दो एंटीवायरल दवाओं निर्मालट्रेलवीर और रिटोनवीर की मिलाकर पैक्सलोविड ब्रांड नाम से दवा बना रही है और एक क्लीनिकल ट्रायल में पता चला है कि यह कंबाइड ड्रग कोविड-19 की गंभीरता का जोखिम 89 प्रतिशत तक घटा सकती है.
ट्रायल के नतीजे बुधवार को द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं.
फाइजर के शोधकर्ताओं की एक टीम ने बिना टीकाकरण वाले ऐसे कोविड मरीजों के बीच 2/3 क्लीनिकल ट्रायल किया, जिनमें बीमारी के लक्षण थे लेकिन वे अस्पताल में भर्ती नहीं हुए और उनकी स्थिति गंभीर होने का जोखिम ज्यादा था.
ट्रायल में कुल 2,246 कोविड पॉजिटिव मरीजों को शामिल किया गया था, जिनमें से 1,120 मरीजों को 300 मिलीग्राम निर्मालट्रेलवीर और 100 मिलीग्राम रिटोनवीर दिया गया और 1,126 को पांच दिनों तक हर 12 घंटे में प्लेसीबो (एक नकली गोली) दी गई.
इसके बाद टीम ने 28 दिनों तक वायरल लोड और कोविड के कारण मौत या अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ने पर नजर रखी.
लक्षण दिखने शुरू होने के तीन दिनों के भीतर जिन मरीजों का इलाज शुरू किया गया उनमें प्लेसीबो समूह की तुलना में निर्मालट्रेलवीर समूह में कोविड के कारण मौत या अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ने की घटनाएं कम हुईं.
टीम ने अध्ययन में पाया कि इलाज शुरू होने के पांचवें दिन उन लोगों में वायरल लोड कम था, जिन्हें प्लेसीबो की तुलना में निर्मालट्रेलवीर के साथ रिटोनवीर दिया गया था.
प्लेसीबो समूह में 13 मरीजों की कोविड के कारण मौत हुई, जबकि निर्मालट्रेलवीर समूह में कोई मौत नहीं हुई.
उपचार अवधि के दौरान उभरने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं दोनों ही समूहों में समान थीं.
टीम ने निष्कर्ष निकाला कि पांच दिनों तक हर 12 घंटे में रिटोनवीर (100 मिलीग्राम) के साथ निर्मालट्रेलवीर (300 मिलीग्राम) की खुराक देने से 28 दिनों तक कोविड के कारण मौत या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ने का खतरा 89.1 प्रतिशत घट जाता है.
टीम ने अपने अध्ययन में लिखा है, ‘पूर्ण विश्लेषण में पाया गया कि लक्षण स्पष्ट तौर पर दिखने के तीन और पांच दिनों के भीतर इलाज शुरू करने की स्थिति में कोविड की गंभीरता का जोखिम क्रमश: 88.9 प्रतिशत और 87.8 फीसदी तक कम पाया गया. प्लेसीबो समूह में 13 मरीजों की तुलना में निर्मालट्रेलवीर और रिटोनवीर पाने वाले समूह में कोविड के कारण कोई मौत नहीं हुई.’
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पैक्सलोविड को दिसंबर में यूएसएफडीए की मंजूरी मिली
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) ने पिछले साल दिसंबर में 12 वर्ष से अधिक उम्र के और कम से कम 40 किलोग्राम वजन वाले मरीजों में कोविड-19 के हल्के से मध्यम लक्षणों के उपचार के लिए पैक्सलोविड के एक इमरर्जेंसी यूज ऑथराइजेशन (ईयूए) जारी किया था.
निर्मालट्रेलवीर और रिटोनवीर दोनों को प्रोटीज इनहिबिटर के तौर पर जाना जाता है, जिसका मतलब है कि वे कोरोनावायरस में विशिष्ट प्रोटीज के साथ बंधते हैं और उसकी प्रतिक्रिया को बाधित करते हैं. प्रोटीज एंजाइम होते हैं जो वायरस में मौजूद प्रोटीन को छोटी-छोटी इकाइयों में तोड़ने में मददगार होते हैं जिसके जरिये वायरस को किसी कोशिका को संक्रमित करने में मदद मिलती है.
फाइजर द्वारा ही विकसित निर्मालट्रेलवीर सार्स-कोव-2 प्रोटीन पर भी असर डालती है जिससे वायरस को नया रूप लेने से रोकने में मदद मिलती है, जबकि रिटोनवीर की वजह से निर्मालट्रेलवीर के बेअसर होने की गति धीमी हो जाती है जिससे यह लंबे समय तक शरीर में सक्रिय तौर पर अपना काम करती रहती है.
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