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Monday, 15 July, 2024
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भारत बायोटेक ने कहा- ऑक्सफोर्ड का ट्रायल ‘घटिया’, हम इस साल 70 करोड़ कोवैक्सिन खुराक के साथ तैयार होंगे

भारत बायोटेक के एमडी डॉ. कृष्णा इल्ला का कहना है कि उन्होंने लगभग 25,000 प्रतिभागियों पर परीक्षण से जुड़ा उत्कृष्ट सेफ्टी डाटा दिया है और इसका प्रभावकारिता संबंधी डाटा फरवरी-मार्च तक उपलब्ध होगा.

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नई दिल्ली: हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने सोमवार को कहा कि वह अपनी स्वीकृत हो चुकी कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सिन की इस वर्ष 70 करोड़ खुराक तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की तरफ से रविवार को मंजूरी पाने वाली दूसरी वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड है, जिसे पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार किया है.

भारत बॉयोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा इल्ला ने एक वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन परीक्षण के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें वालंटियर को साइड-इफेक्ट्स से बचाने के लिए ‘पैरासिटामोल की खुराक’ दी जाती है.

प्रभावकारिता संबंधी डाटा पर इल्ला ने कहा कि उनकी कंपनी ने ‘लगभग 25,000 प्रतिभागियों पर परीक्षण का उत्कृष्ट सेफ्टी डाटा दिया है. साथ ही कहा कि वह ‘50 प्रतिशत के निर्धारित मानक से ऊपर प्रभावकारिता पाए जाने के प्रति आश्वस्त हैं.’ उन्होंने कहा कि प्रभावकारिता यानी एफिकेसी डाटा फरवरी-मार्च तक उपलब्ध होगा.

उनकी यह टिप्पणी इस विवाद के मद्देनजर आई है कि स्वदेशी वैक्सीन को बिना किसी प्रभावकारिता डाटा के मंजूरी दे दी गई है.

‘वैक्सीन कभी भी जारी करने के लिए तैयार’

इल्ला ने बताया कि कंपनी ने हैदराबाद और बेंगलुरु में स्थित अपनी चार फैसिलिटी में इसकी खुराक का उत्पादन करने की योजना बनाई है.

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास अभी 20 मिलियन (2 करोड़) खुराक हैं. हम 2021 में (वार्षिक क्षमता के अनुसार) 700 मिलियन (यानी 70 करोड़) खुराक का निर्माण कर सकते हैं.’

दवा नियामक की तरफ से वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले ही कंपनी ने एक करोड़ खुराक के स्टॉक तैयार कर लिया था. ये खुराक अगले महीने तक उपयोग में लाए जाने के लिए उपलब्ध होंगी.

प्रेस कांफ्रेंस में कंपनी की तरफ से दिए गए प्रेजेंटेशन में कहा गया है, ‘10 मिलियन (1 करोड़) खुराक फरवरी 2021 तक उपलब्ध होंगी.’

इल्ला ने कहा, ‘यदि भारत सरकार अनुमति देती है तो हम किसी भी समय रोलआउट करने के लिए तैयार हैं. मैं तो इसे कल ही रोल आउट करना चाहूंगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कंपनी ने 50 लाख खुराक देश की शीर्ष लैब सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी, कसौली में परीक्षण के लिए भेजी हैं.’ किसी भी टीके को इस्तेमाल के लिए जारी किए जाने से पहले इसका सीडीएल, कसौली में परीक्षण अनिवार्य होता है.

उन्होंने कहा कि ‘शुरुआत में, वैक्सीन की लागत थोड़ी अधिक हो सकती है लेकिन जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, कीमत में कमी आती जाएगी और इसे बाजार द्वारा निर्धारित किया जाएगा.’

‘हम दूसरों की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर’

इल्ला ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दवा नियामक और विषय विशेषज्ञ समिति को ‘बंदरों और हैम्स्टर पर एक्सीलेंट एनिमल चैलेंजिंग डाटा मुहैया कराया था, जो भारतीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित आंकड़ों की तुलना के साथ दिया गया है.’

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘लेकिन हमें तो भरोसा ही नहीं है, हम चाहते हैं कि ब्रिटेन के लोग हमारे डाटा को प्रकाशित करें…

इल्ला ने कहा, ‘हमने लगभग 25,000 प्रतिभागियों पर परीक्षण का एक्सीलेंट सेफ्टी डाटा भी दिया है.’ साथ ही जोड़ा. ‘इम्यूनोजेनेसिटी डाटा भी दिया गया था.’

उन्होंने कहा, ‘यह डाटा प्रभावकारिता से संबंधित है. लेकिन मैं यहां प्रभावकारिता का दावा नहीं कर रहा हूं. इस डाटा में हम दूसरों की तुलना में कहीं बेहतर हैं.’

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के ट्रायल पर निशाना साधते हुए इल्ला कहा, ‘60, 70 या 90. कोई भी प्रभावकारिता नहीं जानता है. हाई डोज लो डोज… डीसीजीआई ने तो गुणवत्ता के मुद्दे पर कंपनी को बंद ही कर दिया होता (यदि यह ट्रायल कोई भारतीय कंपनी कर रही होती).’

कंपनी ने कहा कि वह अपनी वैक्सीन की प्रभावकारिता दर काफी अच्छी होने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है.

उन्होंने कहा, ‘हम 50 प्रतिशत के निर्धारित बेंचमार्क से ऊपर प्रभावकारिता होने के प्रति आश्वस्त हैं…हमें फरवरी-मार्च तक प्रभावकारिता संबंधी डाटा मिलेगा.’

म्यूटेड वायरस के खिलाफ बेहतर काम करने की संभावनाओं को देखते हुए डीसीजीआई की तरफ से वैक्सीन को मंजूरी दे दी गई थी. इसके बारे में इल्ला ने बताया कि वैक्सीन स्ट्रेन को बदलकर काम कर सकती है, जैसा आमतौर पर हर साल फ्लू के टीके में किया जाता है.

उन्होंने कहा, ‘वैक्सीन में स्ट्रेन बदल जाता है लेकिन निर्माण प्रक्रिया वही रहती है. हम उसी वैक्सीन को नियामक अधिकारियों की उचित अनुमति के बाद फिर से इस्तेमाल के लिए तैयार कर सकते हैं.’

‘ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन का ट्रायल घटिया’

इल्ला ने ब्रीफिंग के दौरान कई बार ऑक्सफोर्ड ट्रायल को निशाना बनाया. यह दावा करते हुए कि कोवैक्सिन ने सबसे कम दुष्प्रभाव दिखाए हैं, इल्ला ने बताया कि कंपनी ने ट्रायल के दौरान 10 प्रतिशत से प्रतिकूल प्रतिक्रिया देखी है.

क्लीनिकल ट्रायल करने के ऑक्सफोर्ड के पैटर्न पर निशाना साधते हुए इल्ला ने कहा, ‘आप (मीडिया) कभी ब्रिटेन के परीक्षण पर सवाल नहीं उठाते हैं. प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं को दबाने के लिए प्रतिभागियों को चार ग्राम पैरासिटामोल की खुराक दी गई. हमने ऐसी कोई चीज नहीं दी है… हम चाहते थे कि लोग किसी भी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की सूचना दें. हमने रीयल टाइम पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया को नोट किया है.

उन्होंने कहा, ‘क्या भारत में इस तरह का ट्रायल चलेगा… यह खुराक, वह खुराक.’

उन्होंने कहा, ‘भारत में अब तक हुए ट्रायल में एक सबसे बड़े, और संभवत: विकासशील देशों में भी, परीक्षण के बाद भी हम आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं.’ साथ ही जोड़ा भारतीय औषधि नियामक किसी भी कंपनी को इतने ‘घटिया’ ढंग से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति नहीं देगा.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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