नई दिल्ली: संसद की एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप पाने वाले अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों की संख्या 2025-26 में घटकर 36.07 लाख रह गई, जबकि लक्ष्य 76.55 लाख था—यानी उपलब्धि 50 प्रतिशत से भी कम रही. यह रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति ने 2026-27 के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि एससी, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य हाशिए पर रहने वाले छात्रों के लिए बनाई गई कई स्कॉलरशिप और शैक्षणिक सहायता योजनाओं में लगातार कमजोर प्रदर्शन दिख रहा है.
पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के तहत पैसा सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजा जाता है. इस योजना के तहत 2023-24 में 47.38 लाख और 2024-25 में 48.04 लाख छात्रों को लाभ मिला था.
लेकिन 2025-26 में यह संख्या घटकर 36.07 लाख रह गई, जबकि लक्ष्य बढ़ाकर 76.55 लाख कर दिया गया था.
इस योजना के लिए परिवार की सालाना आय की सीमा 2.5 लाख रुपये है. मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि 2026-27 से शुरू होने वाले अगले वित्त आयोग चक्र में इसे बढ़ाकर 4.5 लाख रुपये किया जाए.
एक पुरानी समस्या स्कॉलरशिप मिलने के समय को लेकर है. ज्यादातर राज्यों में स्कॉलरशिप पोर्टल जून-जुलाई में खुलते हैं और नवंबर-दिसंबर में बंद हो जाते हैं. इसके बाद राज्यों को सत्यापन और प्रक्रिया पूरी करने में करीब दो महीने लगते हैं.
इस वजह से अधिकतर छात्रों को पैसा फरवरी और मार्च में मिलता है—यानी शैक्षणिक साल के आखिर में. समिति ने कहा कि वह कई बार सिफारिश कर चुकी है कि स्कॉलरशिप उसी शैक्षणिक साल के अंदर दी जानी चाहिए.
मंत्रालय ने समिति को बताया कि वह दिशानिर्देशों में बदलाव कर रहा है ताकि नवीनीकरण वाले मामलों में साल के पहले चार-पांच महीनों में ही भुगतान हो सके.
समिति ने यह भी कहा कि 2022-23 से 2024-25 के बीच बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में लाभार्थियों की संख्या कम हुई है.
20 साल से फेलोशिप की सीमा नहीं बदली
एससी छात्रों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप योजना, जो पीएचडी शोध के लिए फंड देती है, 2005-06 में शुरू हुई थी. तब से इसमें 2,000 फेलोशिप की सीमा तय है. दो दशक बीत गए, लेकिन यह सीमा अभी तक नहीं बदली गई.
समिति ने कहा कि 2023-24 और 2024-25 में इस योजना पर खर्च बजट अनुमान से ज्यादा रहा, जिससे पता चलता है कि इसकी मांग अच्छी है.
समिति ने मंत्रालय से कहा कि वह पिछले तीन साल के आवेदन आंकड़ों का अध्ययन करे और फेलोशिप की संख्या बढ़ाने पर विचार करे. हालांकि मंत्रालय ने ऐसा करने का कोई स्पष्ट वादा नहीं किया.
फ्री कोचिंग योजना लगभग ठप
एससी और ओबीसी छात्रों के लिए फ्री कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और पेशेवर संस्थानों के प्रवेश टेस्ट की तैयारी के लिए मदद दी जाती है.
2023-24 में इस योजना के तहत 3,500 छात्रों का लक्ष्य था, लेकिन केवल 223 छात्रों तक ही यह पहुंच पाई. 2024-25 में 2,136 छात्रों को लाभ मिला.
2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 431 रह गई.
खर्च का पैटर्न भी इसी तरह रहा. 2023-24 में 47 करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले केवल 7.76 करोड़ रुपये खर्च हुए.
2024-25 में बजट घटाकर 35 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिसमें से 17.09 करोड़ रुपये खर्च हुए.
2025-26 में बजट और घटाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिसमें से केवल 7.11 करोड़ रुपये खर्च हुए.
मंत्रालय ने कहा कि खराब प्रदर्शन का कारण केंद्रीय विश्वविद्यालयों की कम भागीदारी और प्रस्तावों में देरी है. लेकिन समिति ने कहा कि वह इस जवाब से संतुष्ट नहीं है.
इस योजना के लिए सालाना आय सीमा 8 लाख रुपये है, जिसे अभी तक नहीं बदला गया है. समिति ने कहा कि हो सकता है कि इसी वजह से कई पात्र छात्र आवेदन नहीं कर पा रहे हों. उसने मंत्रालय से पात्रता मानदंडों की फिर से समीक्षा करने को कहा.
टॉप क्लास एजुकेशन और विदेश स्कॉलरशिप
टॉप क्लास एजुकेशन योजना के तहत IIT, IIM और AIIMS सहित 274 प्रमुख संस्थानों में पढ़ने वाले एससी छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाती है.
सरकार ने फैसला किया है कि 2026-27 से इस योजना के लिए कोई तय लक्ष्य नहीं रखा जाएगा और बजट उपलब्धता के आधार पर सभी पात्र छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाएगी.
समिति ने कहा कि 2026-27 के लिए बजट 120 करोड़ रुपये है, जबकि 2024-25 में वास्तविक खर्च 103.26 करोड़ रुपये था. इससे अतिरिक्त छात्रों को शामिल करने की गुंजाइश बहुत कम बचती है.
परिवार की आय सीमा 8 लाख रुपये, जो 2020-21 में तय की गई थी, अभी तक नहीं बदली गई है.
इस साल सरकार ने एससी छात्रों के लिए राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना के तहत सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 250 कर दी है. यह फैसला समिति की पिछले साल की सिफारिश के बाद लिया गया.
लेकिन 2026-27 के लिए बजट अनुमान वही रखा गया है जो 2025-26 में था, जब सीटें सिर्फ 125 थीं. समिति ने कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि 125 सीटों के बजट में 250 स्कॉलरशिप कैसे दी जाएंगी.
समिति ने यह भी कहा कि विदेश स्कॉलरशिप योजना में डीनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों, भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगरों के लिए जो सीटें आरक्षित हैं, वे कई सालों से खाली पड़ी हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
