Wednesday, 25 May, 2022
होमडिफेंसSC ने केंद्र से पूछा-NDA में महिला कैंडिडेट्स की संख्या 2022 में भी 2021 के बराबर ही क्यों तय की गई?

SC ने केंद्र से पूछा-NDA में महिला कैंडिडेट्स की संख्या 2022 में भी 2021 के बराबर ही क्यों तय की गई?

दिसंबर 2021 में यूपीएससी द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार एनडीए परीक्षा का पहला चरण अप्रैल 2022 में होना निर्धारित किया गया है. इस अधिसूचना में कहा गया है कि अंतिम रूप से सफल होने वाले 400 उम्मीदवारों में सिर्फ 19 महिला उम्मीदवारों का ही चयन किया जाएगा.

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा है कि नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के लिए 2022 में होने वाले पहली वार्षिक प्रवेश परीक्षा के माध्यम से शामिल होने वाली महिला कैंडिडेट्स की संख्या – कुल मिलाकर 19 – 2021 के दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित संख्या के समान ही क्यों होगी.

बता दें कि एनडीए के लिए भर्ती परीक्षा हर साल दो बार – अप्रैल और सितंबर में – आयोजित की जाती है.

सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित किया था जिसमें इसने महिलाओं को भी एनडीए भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी. हालांकि, यह बताए जाने के बाद कि एनडीए में महिला कैंडिडेट्स के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी है. इसने सरकार को महिला कैंडिडेट्स की संख्या को सीमित करने की भी अनुमति दे दी थी.

इसके बाद जब नवंबर 2021 में एनडीए की दूसरी वार्षिक परीक्षा हुई तो महिला उम्मीदवारों ने भी परीक्षा दी और मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले 400 उम्मीदवारों में से 19 महिलाएं थीं.

22 दिसंबर 2021 को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा जारी परीक्षा अधिसूचना के अनुसार 2022 के लिए एनडीए परीक्षा का पहला चरण 10 अप्रैल को होना है. इसी अधिसूचना द्वारा यह भी घोषणा की गई है कि 2022 के लिए भी 400 सफल उम्मीदवारों की संख्या में केवल 19 महिला उम्मीदवारों को ही चुना जाएगा.

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जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष यूपीएससी की दिसंबर 2021 की इस अधिसूचना को रखते हुए याचिकाकर्ता कुश कालरा ने कहा कि 2021 की परीक्षा के दौरान महिला उम्मीदवारों का प्रवेश केवल 19 की संख्या तक इसलिए सीमित किया गया था क्योंकि अदालत ने यह देखते हुए उन्हें (सरकार को) छूट दी थी कि एकेडमी महिला कैंडिडेट्स को प्रशिक्षित करने के लिए पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं थी.’

याचिकाकर्ता के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता चिन्मय प्रदीप शर्मा ने बेंच को बताया कि अदालत ने एक आपातकालीन उपाय के रूप में सफल महिला उम्मीदवारों की संख्या को सीमित रखने का सुझाव दिया था. हालांकि, शर्मा ने इस परीक्षा संबंधी सूचना पर अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि यूपीएससी की यह अधिसूचना केंद्र सरकार के इस अंडरटेकिंग के एकदम विपरीत है कि एनडीए और अधिक महिला उम्मीदवारों को शामिल करने के लिए बुनियादी ढांचे के हिसाब से पूरी तरह से सुसज्जित होगा.

शर्मा द्वारा पेश की गई दलीलों पर ध्यान देते हुए अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी से इनका जवाब मांगा और उनसे तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा. इस दस्तावेज़ में यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित होना चाहिए कि एनडीए में प्रवेश के लिए महिलाओं की संख्या को 2022 के लिए भी 19 ही क्यों तय किया गया है?

बता दें कि कालरा की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2021 में केंद्र सरकार को महिला कैंडिडेट्स को एनडीए में शामिल होने की अनुमति देने का आदेश दिया था.

19 की संख्या एक आपातकालीन उपाय‘ था

बेंच ने भट्टी से कहा कि ‘अंतिम बार की परीक्षा (नवंबर 2021 की) थोड़े से धक्के (अदालत की तरफ से) के तहत हुई थी’.

पीठ का कहना था, ‘आपने कहा था कि पिछले साल उनकों (महिलाओं को) प्रवेश दिए जाने में समस्या थी. हम चाहते थे कि प्रवेश शुरू हो और इसलिए हमने (आपको) छूट दी लेकिन आपने पूरी निश्चय से कहा था कि मई तक आप पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे. लेकिन ऐसा लगता है कि आपने 2021 की परीक्षा के लिए तय की गई संख्या को प्रवेश के अंतिम आंकड़े के रूप में तय कर दिया है.’

इसके बाद लॉ ऑफिसर ने यह निवेदित किया कि महिला कैंडिडेट्स का प्रवेश सिर्फ एकेडमी में उपलब्ध बुनियादी ढांचे से ही जुड़ा नहीं है बल्कि सैन्य बलों की आवश्यकता से भी जुड़ा है.

लेकिन अदालत ने उन्हें याद दिलाया कि 19 का आंकड़ा एक ‘आपातकालीन उपाय’ के रूप में अपनाया गया था. जस्टिस कौल ने कहा, ‘तो, आपको इसे समझाने की जरूरत है (कि 2022 के लिए संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई?). आपका कार्यक्रम क्या है? कितनों को शामिल किया जाएगा? मुझे लगता है कि यह चरणबद्ध तरीके से होगा.’

एडवोकेट शर्मा ने रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए इच्छुक महिला उम्मीदवारों से मिली भारी सकारात्मक प्रतिक्रिया को जाहिर करने के लिए एनडीए 2021 परीक्षा के दूसरे चरण को पास करने वाले उम्मीदवारों की संख्या से जुड़े आंकड़ें भी दिखाए. सुप्रीम कोर्ट के 18 सितंबर के आदेश के अनुसार, यूपीएससी ने उन अविवाहित महिलाओं से आवेदन आमंत्रित किए थे जो इस प्रवेश परीक्षा के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करती हैं.

इस परीक्षा के लिए मिले 5.75 लाख से अधिक आवेदनों में 1.77 लाख महिलाओं के थे. अंतिम परीक्षा के लिए क्वालिफाइड करने वाले कुल 8,009 उम्मीदवारों में से 1,002 महिलाएं थीं.

प्रगति का चरणबद्ध तरीका

यूपीएससी की अधिसूचना में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार नवंबर 2021 की परीक्षा में चुने गए सभी 400 कैंडिडेट्स को अंततः रक्षा सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा. थल सेना के लिए आवश्यक 208 अधिकारियों में से 10 महिलाएं होंगी जबकि 42 में से तीन ऐसी महिला कैंडिडेट्स होंगी जिनका चयन नौसेना के लिए किया जाएगा.

वायु सेना में शामिल होने वाले 120 कैंडिडेट्स में से छह महिलाएं होंगी. दो फ्लाइंग डिवीजन (उड़ान दस्ते)  में और चार ग्राउंड ड्यूटी (जमीनी सेवा), तकनीकी और गैर-तकनीकी विभागों में दो-दो के लिए चुनी जाएंगीं.

अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2022 की परीक्षा के लिए दिसंबर में जारी यूपीएससी की अधिसूचना में रक्षा बलों में महिलाओं के प्रवेश का इसी तरह का ब्रेक-अप दिया गया है.

इस पर बेंच ने कहा ‘इन बलों के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाएगा. महिलाओं को किस हद तक प्रवेश देना है, इसके आधार पर सीटें तय करनी पड़ेंगी. जब तक आपके पास उपलब्ध सभी क्षेत्र पूरी तरह से महिलाओं के लिए खुले नहीं होंगे तब तक आपके पास समान संख्या में पुरुषों और महिलाओं को शामिल करने जैसा परिदृश्य नहीं हो सकता है. ऐसा अभी नहीं हो रहा है. यह प्रगति का चरणबद्ध तरीका है. वे (सरकारी पक्ष) भविष्य की कार्रवाई के बारे में अपना रुख स्पष्ट करेंगे.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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