नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीदों के मुताबिक रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है. रक्षा पूंजी बजट को 21.8 प्रतिशत बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ कर दिया गया है, जिसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी विमान और एयरो इंजन के लिए की गई है.
कुल रक्षा बजट में भी 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यह बढ़कर 6.81 लाख करोड़ से 7.84 लाख करोड़ हो गया है. रक्षा पेंशन का प्रावधान 1.71 लाख करोड़ रखा गया है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के 1.60 लाख करोड़ से अधिक है. कुल मिलाकर रक्षा बजट अब जीडीपी का 1.99 प्रतिशत है.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए भी बजट बढ़ाया गया है. वर्ष 2026-27 में इसके लिए 17,250 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में यह 14,923 करोड़ था.
पूंजी बजट में की गई यह बढ़ोतरी अगले वित्त वर्ष में होने वाले कई बड़े रक्षा सौदों को ध्यान में रखकर की गई है. इनमें भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों का प्रस्तावित करार भी शामिल है. हालांकि इन सौदों का भुगतान किस्तों में होगा, लेकिन अनुबंध पर हस्ताक्षर के समय कुल राशि का 4 से 10 प्रतिशत तक अग्रिम भुगतान किया जाएगा.
पिछले साल फरवरी में चालू वित्त वर्ष के लिए 1.80 लाख करोड़ का पूंजी बजट तय किया गया था, जिसे संशोधित कर 1.86 लाख करोड़ कर दिया गया था.
विमान और एयरो इंजन के लिए चालू वित्त वर्ष में 48,614.06 करोड़ का प्रावधान था, जिसे संशोधित कर 72,780.15 करोड़ किया गया. नए बजट में इसके लिए 63,733.94 करोड़ रखे गए हैं.
राजस्व बजट में भी इजाफा हुआ है. चालू वर्ष में 3.11 लाख करोड़ का प्रावधान था, जिसे संशोधित कर 3.49 लाख करोड़ किया गया. अगले वित्त वर्ष के लिए राजस्व बजट 3.65 लाख करोड़ रखा गया है. इसमें से 1.18 लाख करोड़ भारतीय सेना के वेतन और भत्तों के लिए, 20,536 करोड़ वायुसेना के लिए और 9,662.50 करोड़ नौसेना के लिए निर्धारित हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के कुल पूंजीगत खर्च के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है.
उन्होंने कहा, “इस बजट का सबसे अहम पहलू तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण है. इसके लिए 1.85 लाख करोड़ रखे गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 24 प्रतिशत अधिक है. इससे हमारी सैन्य क्षमता और मजबूत होगी.”
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