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Wednesday, 11 March, 2026
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भारत-बांग्लादेश संबंध पटरी पर—सैन्य खुफिया प्रमुख की यात्रा के बाद दूत पहुंचे आर्मी वॉर कॉलेज

भारत में हाई कमिश्नर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पहली बार, रियाज हामिदुल्लाह ने JOCAP को संबोधित किया, जिसमें तीनों सेनाओं के अधिकारी शामिल थे, जब नई दिल्ली और ढाका संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें तेज कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: भारत में बांग्लादेश के दूत रियाज हामिदुल्लाह ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में 180 भारतीय सैन्य अधिकारियों को संबोधित किया. भारत में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पहली बार यहां भाषण दिया, जब नई दिल्ली और ढाका खराब हुए संबंधों को सामान्य बनाने के तरीके और उपाय तलाश रहे हैं.

हामिदुल्लाह ने एक्स पर एक बयान में कहा, “@ia_awc (आर्मी वॉर कॉलेज, महू) आकर खुशी हुई. कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने स्वागत किया. #AWC (आर्मी वॉर कॉलेज) की लंबी विरासत के बारे में जाना. (भारतीय) तीनों सेनाओं के हायर कमांड कोर्स के 180 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ #Bangladesh | #India संबंधों की स्थिति पर अपने विचार साझा किए, मुद्दों और चुनौतियों से निपटने के तरीके और साझा हितों में आगे का रास्ता बताया,” .

आर्मी वॉर कॉलेज ने अपने बयान में बताया कि हामिदुल्लाह ने जॉइंट कैप्सूल (JOCAP) को “द्विपक्षीय संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव जो दोनों देशों के भविष्य को आकार दे रहे हैं” विषय पर संबोधित किया.

रक्षा सूत्रों ने कहा कि राजनयिकों की यात्राएं एक सामान्य प्रक्रिया होती हैं और पिछले बांग्लादेश हाई कमिश्नर ने भी 2024 में आर्मी वॉर कॉलेज का दौरा किया था.

सूत्रों ने कहा कि कुछ राजनयिक सीधे आकर भाषण देते हैं, जबकि समय की कमी के कारण कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हैं. एक सूत्र ने कहा, “हमारे यहां वैश्विक स्तर की भागीदारी है, क्योंकि विदेशी अधिकारी जूनियर कमांड, सीनियर कमांड और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर कोर्स में हिस्सा लेते हैं.”

हामिदुल्लाह को ढाका की ओर से भारत में हाई कमिश्नर के रूप में पिछले अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था, जिसका नेतृत्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस कर रहे थे. उन्होंने कई बार दोनों देशों के संयुक्त सैन्य और सांस्कृतिक इतिहास को उजागर करने की कोशिश की है. यह उस समय हो रहा है जब अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के राजनीतिक संबंध खराब हो गए थे.

नवंबर 2025 में, राष्ट्रीय राजधानी में हाई कमिशन द्वारा आयोजित बांग्लादेश सशस्त्र बल दिवस के कार्यक्रम के दौरान हामिदुल्लाह ने 1971 के मुक्ति युद्ध में जान गंवाने वाले 1,668 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी. नवंबर के इस कार्यक्रम में भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा भी मौजूद थे.

दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट किया था, बांग्लादेश के दूत की आर्मी वॉर कॉलेज यात्रा उस समय हुई है जब ढाका के डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने एक हफ्ते पहले नई दिल्ली का दौरा किया था और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) प्रमुख पराग जैन तथा अपने भारतीय समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन से मुलाकात की थी.

2 मार्च को जैन और चौधरी के बीच हुई निजी डिनर बैठक नई दिल्ली और ढाका द्वारा संचार चैनल खोलने के लिए उठाया गया एक कदम था. ये चैनल शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बंद हो गए थे. इस बैठक में यह समझ बनी कि भारत और बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल ऐसे लोगों द्वारा नहीं होने दिया जाएगा जिनके “दुश्मनाना हित” हैं.

चौधरी ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की और खुफिया अधिकारियों की एक राउंडटेबल बैठक में भी शामिल हुए. यह बैठक हर साल भारत द्वारा रायसीना डायलॉग से पहले आयोजित की जाती है.

भारत और बांग्लादेश संबंध सुधारने और सामान्य बनाने के तरीके तलाश रहे हैं, क्योंकि 17 फरवरी को ढाका में तारिक रहमान ने सत्ता संभाली है. चौधरी की भारत यात्रा रहमान की जीत के कुछ ही हफ्तों के भीतर हुई, जो दोनों देशों की ओर से यूनुस काल के दौरान आए संबंधों के ठहराव से आगे बढ़ने का संकेत है.

हालांकि, कई समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिनमें हसीना का भारत में रहना भी शामिल है. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री को पिछले साल इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल बांग्लादेश (ICT-B) ने गैरहाजिरी में मौत की सजा सुनाई थी. यह सजा उनकी सरकार द्वारा जून से अगस्त 2024 के बीच छात्र आंदोलन को दबाने की कार्रवाई के लिए दी गई थी.

रक्षा सूत्रों ने बताया, पिछले साल दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए थे, जिनमें कस्टम जांच बढ़ाना और ट्रांसशिपमेंट की सुविधा रद्द करना शामिल था. हालांकि, मंगलवार को भारत ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर संभावित चुनौतियों के बावजूद वह बांग्लादेश को “व्यावसायिक आधार” पर नुमालीगढ़ रिफाइनरी से डीजल की सप्लाई जारी रखेगा.

एक सूत्र के अनुसार, ईंधन की सप्लाई “इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन” के जरिए जारी रहेगी. बांग्लादेश प्रशासन ने कहा था कि भारत से करीब 5,000 टन डीजल की सप्लाई होने की उम्मीद है.

दोनों देश मतभेद कम करने के दूसरे तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं, क्योंकि कई कूटनीतिक चुनौतियां अभी बाकी हैं. इनमें गंगा जल संधि का नवीनीकरण भी शामिल है, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में खत्म होने वाली है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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