Sunday, 3 July, 2022
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भारत पहुंचे दो अमेरिकी सुपर हॉर्नेट, नौसेना सौदे के लिए अपनी ताकत का करेंगे प्रदर्शन के साथ

नौसेना अपने विमानवाहक पोत के लिए लगभग 26 मल्टी-रेल डेक-आधारित लड़ाकू विमानों की तलाश में जुटी है. सुपर हॉर्नेट्स भारत पहुंच गए हैं. और उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में प्रतिद्वंद्वी डसॉल्ट एविएशन का राफेल एम भारत में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है.

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नई दिल्ली: अमेरिकी नौसेना से लीज पर दो बोइंग एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट, गोवा स्थित आईएनएस हंस नेवल बेस पर पहुंच गए हैं. दिप्रिंट को पता चला है कि ये लड़ाकू विमान सोर बेस्ड ट्रायल फैसिलिटी (एसबीटीएफ) पर अपनी स्की-जंप का प्रदर्शन करने और भारतीय विमान वाहक से संचालित करने की अपनी क्षमताओं को दिखाने के लिए भारत भेजे गए हैं.

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने सोमवार को कहा कि दोनों विमान 20 मई को पहुंचे और इस सप्ताह से शुरू होने वाले अभ्यासों की एक श्रृंखला से गुजरेंगे.

दो विमानों को बोइंग ने अमेरिकी नौसेना से उधार लिया है और प्रदर्शन के लिए इनमें मकैनिकल और सॉफ्टवेयर बदलाव किए गए हैं.

नौसेना को प्रभावित करने के लिए सुपर हॉर्नेट को भारत लाया गया है और उसकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में प्रतिद्वंद्वी डसॉल्ट एविएशन का राफेल एम भारत में आकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर चुका है. नौसेना अपने विमान वाहक के लिए लगभग 26 मल्टी- रोल डेक- बेस्ड लड़ाकू विमानों की तलाश में जुटी है.

नौसेना वर्तमान में आईएनएस विक्रमादित्य से मिग-29 के को संचालित करती है. नौसेना का इरादा नए लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने का है. भारत का पहला स्वदेशी विमान वाहक इस साल अगस्त में अधिकृत रूप से नौसेना में शामिल हो जाएगा.

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स्की-जंप क्षमता के अलावा, बोइंग के अधिकारी भारतीय नौसेना के अधिकारियों को विमान की क्षमताओं- विशेष रूप से राफेल के साथ तुलना करते हुए- के बारे में जानकारी देंगे.

विमान बिना पेलोड के स्की-जंप टेक-ऑफ करेगा. पेलोड में दो डमी हार्पून मिसाइलें शामिल होंगी.

बोइंग ने पहली बार यूएस में ट्रायल देते हुए 2020 में भारतीय नौसेना के लिए STOBAR (शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टिड रिकवरी) जंप का प्रदर्शन किया था.

कैरियर बेस्ड लड़ाकू विमान मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में आते हैं – STOVL (शॉर्ट टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग), STOBAR और CATOBAR (कैटापल्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टिड रिकवरी)

STOBAR, STOVL और CATOBAR ऐसे सिस्टम हैं जिनका इस्तेमाल एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक से एयरक्राफ्ट के लॉन्च और रिकवरी के लिए किया जाता है.

STOBAR कैरियर के पास ऊंचे डेक होते हैं, जिन्हें ‘स्की-जंप’ कहा जाता है. इससे विमान को उड़ान भरने में मदद मिलती है. CATOBAR एक कैटापल्ट-वेस्ड लॉन्च सिस्टम है जो कैरियर को ज्यादा टेक-ऑफ दर और वेग की अनुमति देता है. ये STOBAR सिस्टम से ज्यादा एडवांस है.

जबकि अमेरिकी वाहक CATOBAR का इस्तेमाल करते हैं. INS विक्रमादित्य और निर्माणाधीन स्वदेशी वाहक STOBAR सिस्टम का उपयोग करते हैं. इसलिए नौसेना द्वारा STOBAR क्षमता का सत्यापन एक बुनियादी जरूरत है.


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बोइंग के पास राफेल से बेहतर क्या है

सूत्रों ने बताया कि बोइंग का तर्क है कि इसके सिंगल-सीटर और ट्विन-सीटर दोनों ही एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन करने में सक्षम हैं. जबकि इसके विपरीत राफेल एम ट्विन-सीटर सोर से संचालित होता है.

एक अन्य पहलू जिस पर बोइंग जोर दे रहा है वह है इंटरऑपरेबिलिटी. इस अमेरिकी फर्म का कहना है कि सुपर हॉर्नेट उन सिस्टम और प्लेटफार्मों के अनुकूल हैं जिन्हें भारतीय नौसेना पहले से ही संचालित करती है या हासिल कर चुकी है. मसलन MH-60 रोमियो एंटी-सबमरीन हेलीकॉप्टर, P-8I पोसीडॉन लंबी दूरी के समुद्री विमान.

बोइंग ने कहा है कि राफेल एम की तुलना में अधिक एंटी-शिप मिसाइल ले जाने में सक्षम विमान है. इससे ऑपरेशन के दौरान तकनीकी समन्वय और व्यापक क्षेत्र पर नजर रखने की क्षमता बढ़ जाएगी

सूत्रों ने बताया कि दोनों विमानों – राफेल एम और सुपर हॉर्नेट – के प्रदर्शन के आधार पर नौसेना उस एक की तरफ जाएगी, जो उसकी भविष्य की जरूरतों के सबसे अधिक अनुकूल होगा.

2020 में तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा था कि फोर्स IAF के साथ लड़ाकू विमानों के संयुक्त रूप से खरीदने की तरफ जा सकता है.

उनका ये बयान राफेल के पक्ष में काम करता है, क्योंकि राफेल पहले से ही भारतीय वायु सेना में शामिल है. सूत्रों ने कहा कि चूंकि भारतीय वायुसेना अधिक लड़ाकू विमानों की तलाश कर रही है, इसलिए बल और नौसेना द्वारा संयुक्त अधिग्रहण के परिणामस्वरूप एक सस्ता सौदा होगा.

सुपर हॉर्नेट भारतीय वायुसेना के ओरिजनल मीडियम मल्टी- रोल कमबैट एअरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) के दावेदारों में से एक था, जिसे अंत में राफेल ने जीता था.

बोइंग अब 114 मल्टी-रोल कमबैट एअरक्राफ्ट (एमआरएफए) हासिल करने की भारतीय वायुसेना की योजना के लिए अपने नए और उन्नत एफ-15 ईगल II की पेशकश करने की योजना बना रहा है. ये कुछ ऐसा है जिस इस पर डसॉल्ट एविएशन ने भी नजरें गड़ाई हुई है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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