Monday, 8 August, 2022
होमडिफेंस‘दबदबा बढ़ाना नई रणनीति’—वायुसेना प्रमुख चौधरी ने साइबर, स्पेस डोमेन को ‘नया युद्धक्षेत्र’ करार दिया

‘दबदबा बढ़ाना नई रणनीति’—वायुसेना प्रमुख चौधरी ने साइबर, स्पेस डोमेन को ‘नया युद्धक्षेत्र’ करार दिया

भारतीय वायुसेना के पहले वारफेयर एंड एयरोस्पेस स्ट्रेटजी प्रोग्राम पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि ‘एक सैन्य रणनीतिकार को प्राथमिक उद्देश्य यानी युद्ध लड़ने’ से नजर नहीं हटानी चाहिए.

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नई दिल्ली: लद्दाख में पिछले दो साल से अधिक समय से जारी सीमा गतिरोध और यूक्रेन में छिड़ी लंबी जंग के बीच एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने शुक्रवार को कहा, ‘दबदबा बढ़ाना नई रणनीति है जिसमें साइबर, इंफॉर्मेशन और स्पेस डोमेन नए युद्ध क्षेत्र बन रहे हैं.’

राष्ट्रों के बीच टकरावों के नए स्वरूपों की ओर इशारा करते हुए भारतीय वायु सेना (आईएएफ) प्रमुख ने कहा, ‘कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सूचनाएं संघर्ष का प्राइमरी टूल बन रही हैं और सैन्य उपकरणों को डिटरेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.’

नई दिल्ली में आईएएफ के पहले वारफेयर एंड एयरोस्पेस स्ट्रेटजी प्रोग्राम (डब्ल्यूएएसपी) के कैपस्टोन सेमिनार को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल (एसीएम) चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते परिदृश्य पर भी चर्चा की, जो एक ‘जटिल बहुध्रुवीय’ संरचना के उभार का संकेत देता है.

वायु सेना प्रमुख का तर्क था कि बहुध्रुवीय संरचना के भीतर एक नई दुनिया विकसित हुई है जिसमें ‘नियमों या भू-राजनीतिक स्तर पर परस्पर जुड़ाव की पारंपरिक प्रक्रियाओं के मायने थोड़े-बहुत ही रह गए हैं या फिर नहीं के बराबर हैं. इसलिए, हमें अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं का फिर से मूल्यांकन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के इंतजाम करने चाहिए कि हम पीछे न रहें.

डब्ल्यूएएसपी का उद्देश्य बताते हुए चौधरी ने कहा, ‘इसे हमारे अधिकारियों के बीच रणनीतिक विचार और समझ पैदा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. इस कोर्स का अंतिम उद्देश्य एक ऐसी संस्कृति विकसित करना है जो पढ़ने, गहन विश्लेषण की समझ विकसित करने और अच्छी तरह दस्तावेज तैयार करने की क्षमता को बढ़ावा देती हो.’

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डब्ल्यूएएसपी का आयोजन तेलंगाना में कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर ने किया था, जो वायु शक्ति अध्ययन के लिए आईएएफ का प्रमुख संस्थान है.

शिक्षण अधिकारी ‘कैसे सोचें’ पर ध्यान दें ‘क्या सोचें’ पर नहीं

चीफ ऑफ एयरस्टाफ (सीएएस) ने कहा, ‘अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारतीय वायुसेना अधिकारियों के बीच गहन मंथन की प्रक्रिया को पुनर्गठित करना, उनकी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाना है और साथ ही उन्हें ‘क्या सोचना है’ के बजाय ‘कैसे सोचना है’ सिखाना है.’

इस कोर्स में सैन्य और वायु शक्ति सिद्धांत, रणनीति, राष्ट्रीय शक्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कक्षाएं शामिल थीं. चौधरी ने कहा, कार्यक्रम का सार ‘21वीं सदी के परिप्रेक्ष्य में हमारे हितों के अनुरूप इन अवधारणाओं को संदर्भित करना’ था.

पाठ्यक्रम के दीर्घकालिक लक्ष्यों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह ‘हमारे मध्यम स्तर के अधिकारियों को ज्ञान हासिल करने के लिए तैयार करने और उनके भारतीय वायुसेना के लिए बेहतरीन संचालन योजनाएं तैयार करने में योगदान देने’ के इर्द-गिर्द केंद्रित है.

प्राथमिक उद्देश्य तो युद्ध लड़ना ही है

युद्ध के पीछे के विज्ञान, सिद्धांत और दर्शन की गहन समझ विकसित करने पर जोर देते हुए चौधरी ने कहा कि ‘एक सैन्य रणनीतिकार को कभी प्राथमिक उद्देश्य से नजर नहीं हटानी चाहिए, और वह है युद्ध लड़ना.’

आईएएफ प्रमुख ने कहा, ‘इस प्रकार मूल बात यह है कि ऑपरेशनल स्तर की महत्वपूर्ण सोच और रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना है.’

चौधरी ने कहा कि डब्ल्यूएएसपी कोर्स का लाभ उठाने और इसे भारतीय वायुसेना की संरचना और कार्यप्रणाली में शामिल करने के उद्देश्य से वे ‘डब्ल्यूएसपी क्वालीफाइड अधिकारियों को अन्य पदों के अलावा मंत्रालय में महत्वपूर्ण प्रतिनियुक्तियों, ऑपरेशनल कमांड, थिंक टैंक, ट्राई-सर्विस के महत्वपूर्ण पदों, प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में डायरेक्टिंग स्टाफ और आईएएफ प्रवक्ता के तौर पर तैनात किए जाने का इंतजार कर रहे हैं.’

चौधरी ने कहा, ‘आपको याद रखना चाहिए कि अच्छी तरह से तैयार रणनीति सफलता की गारंटी नहीं दे सकती, लेकिन एक सुसंगत और टिकाऊ रणनीति का अभाव निश्चित तौर पर विफलता का कारण बन सकता है.’

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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