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Saturday, 3 January, 2026
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चीन का दावा: भारत-पाकिस्तान तनाव खत्म कराया, लेकिन मई में पाकिस्तान ने चीनी हथियार चलाए

चीन के विदेश मंत्री ने दावा किया कि 2025 में कई संघर्षों को खत्म कराने में बीजिंग ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. पिछले 5 साल में पाकिस्तान के आयात किए गए कुल सैन्य साजो-सामान का 81% से ज्यादा चीन से आया.

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नई दिल्ली: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष खत्म कराने में बीजिंग ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. यह दावा ऐसे समय में किया गया है, जब मई में हुए संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने नई दिल्ली के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया था.

वांग यी ने बीजिंग में ‘अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेश संबंध’ पर आयोजित संगोष्ठी में कहा, “स्थायी शांति बनाने के लिए हमने निष्पक्ष और न्यायपूर्ण रुख अपनाया और समस्या के लक्षणों के साथ-साथ उसकी जड़ पर भी ध्यान दिया. विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस तरीके के तहत हमने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इज़रायल के बीच के मुद्दों, और हाल ही में कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हुए संघर्ष में मध्यस्थता की.”

उन्होंने कहा, “हमारे प्रयासों में दूसरों के आंतरिक मामलों में कोई दखल नहीं था, न कोई उकसावा, न पक्षपातपूर्ण हेरफेर और न ही कोई स्वार्थ था. इसमें सिर्फ ईमानदारी और सद्भावना थी. हमारे सिद्धांत और मेहनत इतिहास की कसौटी पर खरे उतरेंगे.”

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. हालांकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि इस साल पाकिस्तान के साथ 87 घंटे तक चले संघर्ष का अंत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत के जरिए हुआ था, खासतौर पर दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच.

वांग यी ने मंगलवार को कहा, “इस साल स्थानीय युद्ध और सीमा-पार संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी समय से ज्यादा भड़के. भू-राजनीतिक अस्थिरता फैलती रही. शांति या युद्ध का सवाल कई लोगों के मन पर भारी पड़ा रहा.”

उन्होंने कहा, “एक ऐसे परेशान विश्व का सामना करते हुए, जहां शांति खतरे में है, चीन ने स्थिरता के लिए एक आधार की भूमिका निभाई. सदी में एक बार होने वाले बदलाव तेज़ हो रहे हैं, उथल-पुथल के बीच अंतर्राष्ट्रीय संबंध नए सिरे से आकार ले रहे हैं और बड़े देशों के बीच संघर्ष या टकराव का खतरा साफ तौर पर बढ़ रहा है.”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 7 मई से 10 मई तक चले संघर्ष में विराम का श्रेय खुद को दिया है. भारत ने हालांकि, अमेरिका के इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि संघर्ष का अंत द्विपक्षीय था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी.

वांग यी ने यह भी दावा किया है कि चीन ने कई संघर्षों को खत्म कराने में मध्यस्थता की, जिनमें इज़रायल और हमास के बीच, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच, और ईरानी परमाणु मुद्दा शामिल है. ये वही संघर्ष हैं, जिनमें ट्रंप भी संघर्षविराम कराने का दावा करते रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति इस साल की शुरुआत में मलेशिया दौरे के दौरान बैंकॉक और फ्नोम पेन्ह के बीच संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर होते समय मौजूद थे और उन्होंने तेल अवीव और हमास के बीच संघर्षविराम के समझौते को देखने के लिए मिस्र का भी दौरा किया था.

यह पहली बार है जब बीजिंग ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराने में अपनी किसी भूमिका का दावा किया है. यह दावा ऐसे समय आया है, जब विडंबना यह है कि इस्लामाबाद ने भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया था. पीएल-15 मिसाइल से लेकर जे-10 विमान तक, पाकिस्तान ने चीनी सैन्य उपकरणों पर भारी निर्भरता दिखाई.

सेना के उप प्रमुख (क्षमता विकास और रखरखाव) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने जुलाई में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को “पूरा समर्थन” दिया. उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान को चीन के ज़रिए भारतीय सैन्य ठिकानों की लाइव रणनीतिक जानकारी मिल रही थी.

सिंह के अनुसार, बीजिंग के लिए ऑपरेशन सिंदूर भारत के खिलाफ अपने उपकरणों को परखने की एक “लाइव लैब” था, जिसमें तुर्की के सैन्य उपकरण भी शामिल थे. उप सेना प्रमुख के अनुसार, पिछले पांच साल में पाकिस्तान के 81 प्रतिशत से ज्यादा सैन्य उपकरण चीन से आए हैं.

2025 में भारत और चीन के रिश्तों में सकारात्मक गति देखी गई है. दोनों पक्षों ने कई कदम उठाए, जिनमें सीधी हवाई उड़ानों की बहाली, वीज़ा सेवाएं और कैलाश मानसरोवर यात्रा शामिल हैं.

वांग अगस्त में भारत आए थे और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे.

लेकिन इस सकारात्मक माहौल के बावजूद, रिश्तों में कई अड़चनें बनी हुई हैं, जिनमें सीमा विवाद पर सहमति का अभाव और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस्लामाबाद को बीजिंग का लगातार समर्थन शामिल है. बीजिंग ने इस साल पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक त्रिपक्षीय बैठक के जरिए दक्षिण एशिया में अपनी भागीदारी बढ़ाने की भी कोशिश की है.

भारत और चीन, दोनों ने म्यांमार में सत्ता संभाले सेना शासकों से 2021 के तख्तापलट के बाद शुरू हुए गृहयुद्ध को खत्म करने के लिए समाधान खोजने की अपील की है. न्यिप्यिडॉ ने रविवार को आम चुनाव के पहले चरण का आयोजन किया, जबकि दूसरा और तीसरा चरण क्रमशः 11 जनवरी और 25 जनवरी को होना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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