Friday, 27 May, 2022
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भारत के संभावित सैन्य ऑपरेशन का सामना करने के लिए अपने क्षेत्र में पैंगोंग त्सो पर पुल बना रहा चीन

यह निर्माणाधीन पुल रुडोक के रास्ते चीन के खुर्नक से पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट तक के बीच 180 किलोमीटर लंबे लूप को घटा देगा.

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नई दिल्ली: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अपने क्षेत्र में पैंगोंग त्सो झील पर एक पुल बना रही है. दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक यह निर्माण खुर्नक क्षेत्र में किया जा रहा है जो झील का सबसे संकरा रास्ता है.

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भविष्य में भारतीय सेना के अगस्त 2020 जैसे किसी ऑपरेशन—जिसमें पैंगोग त्सो के दक्षिणी किनारे पर स्थित ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया गया था—का मुकाबला करने के लिए पूर्व-निर्मित ढांचे के साथ पुल का निर्माण किया जा रहा है.

सूत्रों ने कहा कि यह निर्माणाधीन पुल रुडोक के रास्ते खुर्नक से दक्षिणी तट तक के बीच 180 किलोमीटर लंबे लूप को घटा देगा.

उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह होगा कि खुर्नक से रुडोक तक का मार्ग 40-50 किलोमीटर रह जाएगा न कि पहले की तरह लगभग 200 किलोमीटर लंबा.

पहाड़ी क्षेत्र से घिरी 135 किलोमीटर लंबी पैंगोंग त्सो आंशिक रूप से लद्दाख क्षेत्र में और तिब्बत में है, जो मई 2020 में भारत और चीन के बीच सैन्य टकराव की गवाह बनी है.

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चीन और ज्यादा सड़कें बना रहा

सूत्रों ने बताया कि पीएलए ने पुल से आने-जाने के लिए सड़कें बनाने का काम भी शुरू कर दिया है और सैनिकों और साजो-सामान की त्वरित तैनाती के उद्देश्य से एक नया मार्ग भी इससे जोड़ेगा.

सूत्रों के मुताबिक, ‘हमने अगस्त 2020 में दक्षिणी किनारे पर उनके सुरक्षा कवच में खामी का फायदा उठाया. चीनी तेज गति के साथ आगे बढ़ने और हमारे सैन्य जमावड़े से हतप्रभ थे. पहले 24-48 घंटों के बाद वे आगे बढ़े और मुकाबले की क्षमता भी हासिल कर ली लेकिन तब तक उनके लिए हमारा प्रतिरोध करना कठिन हो चुका था.

चीनी सेना द्वारा यहां नई सड़कें और पुल क्यों बनाए जा रहे हैं? इसका कारण स्पष्ट करते हुए एक सूत्र ने कहा, ‘उन्होंने शायद सबक सीख लिया है और चूंकि वे किसी समस्या का उपाय खोजने में माहिर हैं इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं कि उस क्षेत्र में उनकी आवाजाही तेज हो और बड़े पैमाने पर तैनाती की क्षमता भी हासिल हो जाए.’

सूत्रों ने यह भी बताया कि सितंबर 2020 से 2021 के मध्य तक उस क्षेत्र में गतिरोध जारी रहने के बीच चीनियों ने भारतीय सैनिकों की नजरों से बचने और गोपनीय तरीके से अपने कब्जे वाली पहाड़ियों पर सैन्य उपकरण तैनात करने के उद्देश्य से मोल्दो गैरीसन के लिए एक नई सड़क बनाने में कामयाबी हासिल कर ली थी.

भारतीय और चीनी सैनिकों ने पिछले साल फरवरी में दक्षिणी तटों से सैन्य वापसी को अंजाम दिया था.

एक तीसरे सूत्र ने कहा, ‘चीन ने गतिरोध के दौरान सड़क पर शुरुआती काम किया था और 2021 के मध्य में ब्लैक टॉपिंग को पूरा कर लिया.’

सूत्रों ने कहा कि नए निर्माण के साथ पीएलए का लक्ष्य भविष्य में दक्षिणी बैंकों में भारतीय बलों के किसी भी संभावित अभियान का मुकाबला करने के लिए कई रास्ते बनाना है.

जैसा दिप्रिंट ने पूर्व में बताया था, चीन ने गतिरोध के दौरान ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने बुनियादी ढांचे का निर्माण तेज कर दिया था. इसमें नई सड़कों का निर्माण, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की साइट, हेलीपोर्ट, आवास आदि बनाना शामिल हैं.

भारत ने भी एलएसी के नजदीक नई सड़कों, सुरंगों, भूमिगत गोला-बारूद डिपो के निर्माण के साथ नए युद्धक उपकरणों के लिहाज से बुनियादी ढांचे की मजबूती पर काफी तेजी से काम किया है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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