Monday, 24 January, 2022
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अचानक बादल आने से गिरा था CDS का चॉपर, रिपोर्ट में ख़ुलासा, तकनीकी ख़ामी या तोड़फोड़ से इनकार

ट्राई सर्विस जांच में हादसे के बहुत सारे पहलुओं पर ग़ौर किया गया, जिनमें हेलिकॉप्टर के ढांचे, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की जांच शामिल थी.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को पता चला है कि अचानक घने बादल आ जाने को, जिसकी वजह से कंट्रोल्ड फ्लाइट इंटु टिरेन (सीएफआईटी) की स्थिति पैदा हो गई, पिछले महीने हुए हेलिकॉप्टर हादसे का कारण माना गया है, जिसमें भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जन. बिपिन रावत समेत, 14 लोगों की ज़िंदगियां ख़त्म हो गईं.

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने, ट्रेनिंग कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह के साथ, जिन्होंने तमिलनाडु के जंगलों में कुनूर के पास हुए हादसे की ट्राई-सर्विस जांच की अगुवाई की, बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जांच के बारे में ब्रीफ किया.

रक्षा सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि जांच में हादसे के पीछे किसी भी तकनीकी ख़राबी, तोड़फोड़ या किसी भी तरह के मिसाइल हमले की संभावना को ख़ारिज कर दिया गया है.

जांच में हादसे के बहुत सारे पहलुओं पर ग़ौर किया गया, जिनमें हेलिकॉप्टर के ढांचे, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की जांच शामिल थी, जिन दोनों को मिलाकर विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ कहा जाता है.

सूत्रों ने कहा कि एफडीआर और सीवीआर के डेटा से पता चला, कि ऐसा कुछ नहीं था जिससे पायलटों- विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान और स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह- की स्थिति में किसी तरह के भटकाव का संकेत मिलता.

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एक सूत्र ने कहा, ‘वो एक सीएफआईटी था जो अचानक बादलों के आ जाने से पैदा हो गया था’.

अमेरिका की फेडरल एविएशन सेफ्टी में सीएफआईटी को इस तरह से परिभाषित किया गया है, ‘अनजाने में पृथ्वी के किसी हिस्से (ज़मीन, कोई पहाड़, जल स्रोत, या किसी बाधा) से हुई टक्कर, जब विमान पॉज़िटिव कंट्रोल में हो’.

उसमें आगे कहा गया है कि अकसर होता ये है कि पायलट या क्रू आने वाली तबाही से अनजान रहता है, जब तक बहुत देर हो जाती है और ये सबसे ज़्यादा किसी उड़ान की अप्रोच या लैंडिग के समय होता है.


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ग्राउंड स्टेशन पर सहायता के लिए कोई कॉल नहीं

जैसा कि दिप्रिंट ने पहले ख़बर दी थी, जांच टीम ने पर्यटकों के एक समूह द्वारा शूट किए गए एक वीडियो का भी विश्लेषण किया, जिसमें हादसे से कुछ सेकंड पहले ही, हेलिकॉप्टर को बादलों में ग़ायब होते देखा जा सकता है.

सूत्रों ने समझाया कि कुछ मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपीज़) होती हैं, जिनका पायलट को मौसम में आए अचानक बदलाव की स्थिति में पालन करना होता है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने ख़बर दी कि जांच रिपोर्ट में कहा गया कि क्रू ने तय किया कि ‘लैंड करने की प्रक्रिया में किसी चट्टान से टकराने की बजाय’ वो बादलों से गुज़र जाएंगे. ग्राउंड स्टेशन पर आपात स्थिति के लिए सहायता के लिए कोई सूचना नहीं दी गई, जिससे अंदाज़ा होता है कि पायलट्स नियंत्रण में थे.

एएनआई ने आगे कहा कि दोनों पायलट ‘मास्टर ग्रीन’ श्रेणी के थे, जिसका मतलब है कि विंग कमांडर चौहान, जो सुलूर स्थित हेलिकॉप्टर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे और उनके को-पायलट स्क्वॉड्रन लीडर सिंह के पास कम दृष्यता की स्थिति में उड़ने की स्वीकृति और अनुभव दोनों थे.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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