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Saturday, 28 March, 2026
होमडिफेंसभारत में बनी इज़रायली नेगेव LMG की पहली 2,000 की खेप सेना को मिली; इस साल 4,000 और मिलेंगी

भारत में बनी इज़रायली नेगेव LMG की पहली 2,000 की खेप सेना को मिली; इस साल 4,000 और मिलेंगी

अगस्त 2024 में हुए कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारतीय सेना को ऐसी 4,000 और LMG मिलेंगी, जो 5.56x45mm INSAS LMG की जगह लेंगी.

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नई दिल्ली: अडाणी समूह ने शनिवार को इज़रायली नेगेव 7.62×51 लाइट मशीन गन (LMG) की पहली 2,000 यूनिट भारतीय सेना को सौंप दी.

यह सप्लाई अगस्त 2024 में साइन हुए 41,000 हथियारों के कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पुरानी 5.56x45mm INSAS लाइट मशीन गन को बदलना है. इस कार्यक्रम के तहत इस साल अगली खेप में 4,000 और नेगेव दी जाएंगी, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत लागू किया गया है.

हालांकि, नेगेव को मूल रूप से इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज (IWI) ने डिजाइन और बनाया था, अब इसका निर्माण मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अडाणी समूह की फैक्ट्री में हो रहा है. समूह ने PLR सिस्टम्स—जो 2016 से भारत में छोटे हथियारों के निर्माण के लिए IWI का स्थानीय साझेदार था—को खरीदकर अपनी सहायक कंपनी बना लिया.

यह पहली बार नहीं है जब सेना ने नेगेव का इस्तेमाल किया है. 2020 में सेना को आपातकालीन ज़रूरत के तहत फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट (FTP) के जरिए इस LMG की 16,479 यूनिट मिली थीं; उन सभी की डिलीवरी पूरी हो चुकी है.

नई LMG, जिस हथियार की जगह ले रही है, उसके मुकाबले काफी बेहतर क्षमता देती है. बड़ा 7.62x51mm कैलिबर 5.56mm INSAS की तुलना में ज्यादा मारक ताकत देता है, और मैगजीन की जगह बेल्ट से चलने वाली गोलियों की वजह से लगातार फायरिंग संभव होती है, जिससे बार-बार रीलोड करने की ज़रूरत कम हो जाती है.

ऑटोमैटिक मोड में नेगेव प्रति मिनट 700 से ज्यादा गोलियां दाग सकती है.

यह हथियार सिंगल शॉट में भी सटीक निशाना लगा सकता है, जिसकी रेंज 800 मीटर से ज्यादा है. 7.5 किलो वजन के साथ, यह अपनी श्रेणी की सबसे हल्की 7.62mm LMG में से एक है जिसमें सेमी-ऑटोमैटिक मोड है और इसे कई तरह के माउंट, वाहन, हेलीकॉप्टर और नौसैनिक जहाजों से चलाया जा सकता है.

पिकाटिनी रेल और ट्रिटियम नाइट साइट्स से लैस नेगेव को कम रोशनी या रात के ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है और यह NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के मजबूती मानकों के अनुसार बना है.

यह IWI के ARBEL कंप्यूटराइज्ड वेपन सिस्टम के साथ भी काम कर सकता है, जो कंपनी के अनुसार कम समय में दुश्मन पर सटीक निशाना लगाने में मदद करता है और दबाव व थकान की स्थिति में सैनिक की प्रभावशीलता और सुरक्षा बढ़ाता है.

7.62×51 का इस्तेमाल इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) में काफी समय से हो रहा है और इसमें दो फायर मोड होते हैं: नज़दीकी लड़ाई (CQB) के लिए सेमी-ऑटोमैटिक और ज्यादा फायरिंग के लिए फुली ऑटोमैटिक.

हथियार सौंपने की घोषणा करते हुए IWI ने बयान में कहा कि यह डिलीवरी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद की गई है.

IWI के CEO और PLR सिस्टम्स के बोर्ड सदस्य शुकी श्वार्ट्ज ने कहा कि यह डिलीवरी “कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार तय समय पर और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ उन्नत सिस्टम देने की IWI की प्रतिबद्धता को दिखाती है, साथ ही भारत के रक्षा निर्माण तंत्र को मजबूत करती है”.

अलग से, PLR सिस्टम्स को भारत को 170,000 IWI क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है, जिसकी पहली 18,000 यूनिट इस साल देने की योजना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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