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Friday, 6 February, 2026
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योगी के आदेश पर FIR होने के बाद नेटफ्लिक्स ने ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर हटाया

नेटफ्लिक्स फिल्म के टाइटल ने कई ग्रुप्स में गुस्सा पैदा कर दिया है, और कई संतों ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर उनसे इस मामले को देखने की गुजारिश की है.

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नई दिल्ली: शुक्रवार को लखनऊ में आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करने के आरोप में उनके और फिल्म की टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटे बाद ही निर्देशक नीरज पांडे ने कहा कि वह फिल्म का प्रचार सामग्री हटा रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह फिल्म किसी भी जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करती.

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस निर्देश के तहत की गई है, जिसमें धार्मिक या जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सार्वजनिक शांति भंग करने की किसी भी कोशिश पर सख्त कदम उठाने को कहा गया है.

नेटफ्लिक्स पर दिखाई जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. यह केस फिल्म के निर्देशक, निर्माता और पूरी टीम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 196, 299, 352, 353 और आईटी एक्ट की अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

नीरज पांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कहा कि नेटफ्लिक्स की यह फिल्म एक “काल्पनिक रचना” है और “यह किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती और न ही उसका प्रतिनिधित्व करती है.”

मनोज बाजपेयी अभिनीत इस नेटफ्लिक्स फिल्म को लेकर कई संगठनों में नाराजगी देखी गई. कई साधु-संतों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की मांग की और आरोप लगाया कि फिल्म ब्राह्मण समुदाय को नीचा दिखाती है और गलत रोशनी में पेश करती है.

पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी फिल्म की आलोचना की और केंद्र सरकार से इस “जातिवादी” फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की.

एक्स पर पोस्ट करते हुए मायावती ने कहा कि यह बेहद दुख और चिंता की बात है कि हाल के समय में न सिर्फ उत्तर प्रदेश में, बल्कि अब फिल्मों में भी ‘पंडित’ को रिश्वतखोर आदि के रूप में दिखाया जा रहा है. इससे पूरे देश में उनका अपमान हो रहा है और इस समय पूरे ब्राह्मण समाज में भारी गुस्सा फैल गया है.

उन्होंने लिखा, “हमारी पार्टी भी इसकी कड़ी निंदा करती है. केंद्र सरकार को ऐसी जाति आधारित फिल्म (वेब सीरीज) ‘घूसखोर पंडत’ पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए, यही बीएसपी की मांग है. साथ ही, इस मामले में लखनऊ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करना एक उचित कदम है.”

केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री के कदम की सराहना करते हुए कहा, “निर्देशक नीरज पांडे द्वारा बनाई जा रही उस फिल्म को हटाने का फैसला, जिसका उद्देश्य ब्राह्मण समाज का अपमान और बदनाम करना था, बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक है. यह फिल्म रचनात्मकता के नाम पर ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाने और उसकी छवि खराब करने की एक और कोशिश थी, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.”

उन्होंने आगे कहा कि फिल्मों और वेब सीरीज में “पंडित समाज को जानबूझकर अपराधी, साजिशकर्ता और नकारात्मक रूप में दिखाने की जो गंदी परंपरा चल रही है, उसे अब यहीं रोका जाना चाहिए. यह सिर्फ एक समाज पर हमला नहीं है, बल्कि जातिगत नफरत फैलाने की साजिश है, जो देश की सामाजिक एकता को तोड़ने का काम करती है.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा राष्ट्र निर्माण, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को दिशा दी है और “उसे बार-बार निशाना बनाना किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” उन्होंने कहा, “इस त्वरित और सख्त फैसले के लिए मैं उत्तर प्रदेश के सफल मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन को दिल से धन्यवाद और बधाई देता हूं.”

इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने नेटफ्लिक्स को पत्र लिखकर फिल्म के शीर्षक की आलोचना की थी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कार्रवाई की मांग की थी.

एक्स पर पोस्ट करते हुए बंसल ने लिखा, “प्रिय @NetflixIndia यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. सीरीज के नाम के जरिए आप न सिर्फ हमारे हिंदू समाज के सबसे सम्मानित वर्ग पर हमला कर रहे हैं, बल्कि देश में नफरत और अशांति फैलाने की कोशिश भी कर रहे हैं. इसे तुरंत बंद करें और माफी मांगें, वरना हिंदू समाज आपकी ऐसी बार-बार की जा रही कोशिशों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से कार्रवाई करने को मजबूर होगा. @CPMumbaiPolice @HMOIndia @MIB_India कृपया इस पर ध्यान दें.”

फिल्म का टीजर रिलीज होने के तुरंत बाद ही दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी और इसके शीर्षक और कंटेंट को ब्राह्मणों के लिए मानहानिकारक, अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया था.

इस बीच, फिल्म के निर्देशक ने कहा कि ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है.

उन्होंने लिखा, “कहानी एक व्यक्ति के कामों और उसके फैसलों पर केंद्रित है और यह किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी नहीं करती और न ही उनका प्रतिनिधित्व करती है. एक फिल्मकार के तौर पर मैं अपने काम को पूरी जिम्मेदारी के साथ करता हूं, ताकि ऐसी कहानियां कही जा सकें जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई गई हों. यह फिल्म, मेरे पिछले कामों की तरह, पूरी ईमानदारी से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है.”

पांडे ने आगे कहा, “हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है और हम उन भावनाओं को ईमानदारी से स्वीकार करते हैं. इन्हीं चिंताओं को देखते हुए हमने फिलहाल फिल्म की सारी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखकर और कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि अधूरी झलकियों के आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा, “हम जल्द ही दर्शकों के साथ फिल्म साझा करने को लेकर उत्सुक हैं.”

अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी एक बयान जारी किया और कहा कि जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, “लोगों ने जो भावनाएं और चिंताएं साझा की हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं. जब किसी काम से, जिसमें आप शामिल हों, कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर सुनने पर मजबूर करता है… यह किसी भी समुदाय के बारे में कोई बयान देने के लिए नहीं बनाया गया था.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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