Wednesday, 25 May, 2022
होमसमाज-संस्कृति'बलात्कार के बाद मेरे आँसू पोछे और नौकरी दिलाने की बात कही' — उन्नाव पीड़िता

‘बलात्कार के बाद मेरे आँसू पोछे और नौकरी दिलाने की बात कही’ — उन्नाव पीड़िता

Text Size:

जैसा कि जांच शुरू हो चुकी है, पीड़िता ने कहा है कि उसके पिता की मौत ने उसकी सारी उम्मीदों को समाप्त कर दिया है, लेकिन पुलिस ने इस सब पर कुछ गड़बड़ी का संदेह जताया है।

उन्नाव: पीड़िता कहती है कि वह जानती थी कि यह कोई मासूम स्पर्श नहीं है जब पहली बार उसके साथ ऐसा हुआ, तब वह 11 साल की थी और तब भी उसके आरोपी निर्दोश नहीं थे। हांलाकि उन्नाव की पीड़िता किशोरी के अनुसार, जिसने उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया है, आरोपी विधायक द्वारा उसे उनके खिलाफ ना बोलने के लिए बहुत समय तक डरा धमका कर रखा। एक आदमी जिसे वह ‘दद्दु’ कह कर पुकारती थी, उसके पिता ने उसके लिए काम किया था, जो 15 साल से भी अधिक समय से विधायक रहा है और इसके साथ ही उसे एक सर्वशक्तिमान के रूप में माना जाता था।

रिपोर्टों के अनुसार वह उसे सामाजिक अराजक लोगों से बचाने के बहाने की आंड़ में स्कूल जाने से रोकता था और अक्सर उसे अपने कमरे में घंटों के लिए बंद कर देता था। जैसे ही वह घर से बाहर निकलती थी उसके आदमी उसके पीछे लग जाते थे। इस छेड़छाड़ से परेशान होकर आखिकार उसने कक्षा 8 से अपनी पढ़ाई छोड़ दी। जब उसने अपनी मां से यह सब घटनाएं बताने की कोशिश की, तो उसकी मां ने उसकी एक ना सुनी और उसकी सभी बातों को अनदेखा करते हुए उसे चुप रहते हुए सब कुछ सहन करने के लिए कहा

4 जून 2017 को, सेंगर ने उसे कथित रूप से घर बुलाया, उसे अपने कमरे में बुला कर उसका बलात्कार किया, जबकि उसका एक साथी बाहर बैठा रहा। वह सिर्फ 16 साल की थी। हालांकि सेंगर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके उपर लगाए गए सभी आरोप आधारहीन हैं और यह उनकी छवि को धूमिल करने की साजिश है, पीड़िता ने कहा कि इस तरीके के बयानों ने उसे बहुत ज्यादा प्रोत्साहित किया और एक ऐसे आदमी के खिलाफ बोलने की हिम्म्त दी जो एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है।

लेकिन अब वह चाहती है कि काश उसने ऐसा ना किया होता।

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

हिरासत में मौत

पीड़िता के बालात्कार का मामला पिछले सप्ताह में तब से राष्ट्रीय सुर्खियों में छाया हुआ है, जब पीड़िता ने पुलिस के द्वारा उचित कार्यवाही ना किए जाने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निवास के बाहर आत्मदाह करने की धमकी दी।

इस सब से एक महीने पहले, पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया गया था कि विधायक के भाई अतुल और उसके सहयोगियों ने परिवार को अपनी शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर किया था। इस विवाद के कारण पुलिस को दो शिकायतें प्राप्त हुईं थी, एक पीड़िता के परिवार वालों की तरफ से और दूसरी शिकायत कथित हमलावरों की तरफ से दर्ज की गई थी। हालांकि जब पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किया गया था, कथित तौर पर तब तक तो विधायक का भाई आजाद घूम रहे थे।

इसके बाद भी बहुत कुछ हुआ है: चार बार विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर ने अपने आपको बेगुनाह बताया, कथित तौर पर लगातार हुए हमलों की बजह से उन्नाव की पीड़िता के पिता की मौत हो गई, इस मामले के राष्ट्रीय संज्ञान में आने से कथित हमले के आरोपी अतुल की गिरफ्तारी हुई और इस मामले में यूपी पुलिस की विशेष जांच दल (एस आई टी) का गठन किया गया और साथ ही में इस मामले कि निष्पक्ष जांच के लिए एक मैजिस्ट्रेट को आदेशित किया गया है।

हालांकि, जांच शुरू हो चुकी है, पीड़िता ने कहा है कि उसके पिता की मौत ने उसकी सभी उम्मीदों को समाप्त कर दिया है। पीड़िता ने कहा कि “पुलिस मेरे पिता को अस्पताल ले जाने के बजाय गिरफ्तार करके ले गई और पुलिस हिरासत में ही उनकी मौत हो गई। मैं इस लड़ाई में मैं खुद को हारा हुआ महसूस करती हूँ“। “मैं अपनी हार स्वीकार करती हूँ। मुझे लगता है कि मुझे इस आदमी के खिलाफ आवाज नहीं उठानी चाहिए थी। कम से कम आज मेरे पिता तो जीवित होते।“

संदिग्ध आदमी

सेंगर का माखी में पैतृक घर के रूप में एक आलीशान बंगला है, वह 16 सालों से विधायक रहे हैं, भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में बांगड़मऊ के लिए उनका मौजूदा कार्यकाल विधायक के रूप चौथा कार्यकाल है। 2002 में जब उन्हें बसपा के टिकट पर नौ सदर के लिए विधायक चुना गया था इसके बाद से उन्होंने तीन पार्टियां बदली हैं। 2007 और 2012 में, वह सपा के टिकट पर क्रमशः बांगड़मऊ एवं भगवंतनगर से चुने गए थे।

सेंगर के लिए राजनीति वास्तव में एक परिवारिक पेशा है: विधायक की मां चिन्नी देवी 50 से अधिक सालों तक ग्राम पंचायत की अध्यक्षता की है; उनकी पत्नी संगीता उन्नाव की जिला अध्यक्ष हैं; और अतुल की पत्नी यानी उनकी भाभी, माखी की प्रधान हैं।

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि “वह बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है। वह अपनी पुश्तैनी सत्ता को अभी तक संभाले हुए है और यहाँ पर उससे कोई भी सवाल जवाब नहीं करता।”

एक स्थानीय व्यक्ति ने आगे बताया कि “वह एक रेत खनन व्यवसाय चलाता है और दो घाटों का मालिक भी है। हालांकि, वह बार-बार निर्वाचित किया जाता है क्योंकि वह लोगों की माँगों को सुनता है और उनके लिए काम करता है।”
हालांकि उसका भाई, कई कुप्रसिद्ध उपद्रवों,खासकर स्थानीय महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न और कई अपराधिक मामलों का सामना कर रहा है।

‘बलात्कार’

किशोरी ने बताया कि सेंगर ने, 4 जून 2017 को उसे नौकरी का झांसा देकर अपने घर पर बुलाया। पीडिता ने कहा, कि जब वह उसके घर पहुँची तो वह उसे अपने कमरे में ले गया और वहाँ उसके साथ रेप करना शुरू कर दिया, जबकि एक सहापराधी, पहरेदार के रूप में दरवाजे पर देख-रेख कर रहा था।

पीडिता ने कहा, “मैं जोर-जोर से चिल्लाई। मुझे पता था कि लोग दरवाजे के बाहर बैठे हैं, लेकिन वहाँ पर मेरी मदद करने के लिए कोई भी नहीं आया। मेरे साथ बलात्कार करने के बाद उसने मुझसे घर जाने के लिए कहा और कहा कि मैं सीधे घर ही जाऊँ। “मैं रो रही थी। वह मेरे आँसुओं को पोछते हुए मुझसे कह रहा था कि वह मुझे एक अच्छी नौकरी देगा। जब मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हारे खिलाफ शिकायत करूँगी, तो उसने मेरे पिता और मेरे चार साल के भाई को जान से मारने की धमकी दी।“

पीडिता ने कहा,”मैं घर वापस चली गई और चुप रही, मुझे दर्द हो रहा था।” मेरी माँ ने मुझसे पूछा क्या हुआ बेटी, तुम ठीक हो ना। मेरी बहनों ने मुझसे पूछा कि आप क्यों नहीं मुस्कुरा रही, लेकिन मैं चुप रही।”

‘अपहरण, बेहोशी, सामूहिक बलात्कार’

पीडिता ने कहा, “घटना के सात दिन बाद जब वह अपने घर से बाहर निकलकर प्लंबर को बुलाने जा रही थी, तो एसयूवी में तीन आदमियों ने मिलकर उसका अपहरण कर लिया। अगले नौ दिनों तक, कथित तौर पर नशा देकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और वो अपराधी बार-बार उसे विभिन्न स्थानों पर ले गए।“

पीडिता ने कहा, “दर्द होने पर, वो लोग मुझे दर्द निवारक दवाइयाँ खिलाते रहे… एक बार जब मैंने भागने की कोशिश की तो उन लोगों ने मुझे दुबारा पकड लिया। उसने कहा, उन लोगों ने एक बार फिर मेरे साथ बलात्कार किया। मैं उनमें से दो लोगों को पहचानती थी, वे सेंगर के आदमी थे क्योंकि मैंने उन लोगों को सेंगर के घर के आस-पास देखा था।

पीडिता ने कहा, “तीनों ने मुझे बेचने की कोशिश की। एक आदमी ने मेरी कीमत 60,000 रूपये लगाई। हालांकि वो मुझे बेच नहीं पाए क्योंकि पुलिस उन्हें ढूंढ़ रही थी।“

उसकी माँ ने उसके अपहरण होने की सूचना पुलिस को थी, इसलिए पुलिस उसकी तलाश जारी कर दी थी । जब अपहरणकर्ताओं को पता चला कि पुलिस उनकी तलाश कर रही है तो उन लोगों ने उसे घर पर छोड़ दिया। बाद में 20 जून को एक मामला दर्ज किया गया और तीन संदिग्ध हमलावरों – शुभम सिंह, ब्रिजेश यादव और अवध नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था।

किशोरी की माँ ने कहा, उसने इस घटना की जानकारी पुलिस को कई दिन पहले ही दे दी थी, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था और लापता की तरह मामले को दर्ज किया । पीडिता की माँ ने कहा, पुलिस ने मुझसे कहा कि वह किसी के साथ भाग गई होगी और मुझसे कहा कि मैं घर लौट जाऊँ। उसने कहा कि मैंने लगतार नौं दिनों तक पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाती रही, लेकिन किसी ने मेरी एक ना सुनीं और ना ही मेरा केस दर्ज किया गया।

हालांकि पुलिस इन आरोपों को गलत बता रही है। पुलिस ने कहा,”हमें पहले (अपहरण की) शिकायत नहीं मिली थी।उन्नाव पुलिस अधीक्षक पुष्पांजली देवी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण) और 366 (विवाह के लिए उसे मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण) के तहत माखी पुलिस स्टेशन में 20 जून को शिकायत दर्ज की गई थी।

उसने कहा कि “जाँच के बाद हमने आईपीसी की धारा 376 डी (सामूहिक बलात्कार) और पीओसीएसओ अधिनियम की धारा 3 और 4 को भी इसमें जोड दिया है। आरोप पत्र अदालत में भी पेश किया गया है।

हैरानी की बात तो यह है, कि किशोरी की मेडिकल जाँच, बलात्कार होने के पाँच दिन बाद शुरू हुई। हालांकि पुलिस ने कहा कि किशोर बचाव के पांच दिन बाद उसकी चिकित्सा जांच की गई। हालांकि पुलिस ने कहा कि पीड़िता कि हालत ऐसी नहीं थी कि तुरन्त उसकी मेडिकल जाँच की जाए, उसने दावा किया कि मेडिकल जाँच के लिए उससे कभी कहा ही नहीं गया था।

मामले को वापस लेने की धमकी

दिल्ली में, उसने अपनी आंटी को बलात्कार के बारे में बताया। जब उसने इस बारे में अपने पति को बताया, तब वह क्रोधित हो गया और तुरंत ही अपने भाई, किशोरी के पिता से बात करी।

किशोरी की बहन ने कहा कि, “पापा अत्यन्त क्रोधित थे। सबसे पहले तो वह इस मामले पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि सेंगर ऐसा भी कुछ कर सकता था। वह सीधे सेंगर के घर गए लेकिन उससे मिल नहीं सके।”

उसने यह भी कहा कि “उसने अपनी बहन से उन्नाव लौटने और पुलिस के साथ एक शिकायत दर्ज करने के बारे में कहा। उस दिन के बाद से उसने सेंगर के घर जाना बंद कर दिया।”

किशोरी अगस्त में उन्नाव लौटी, लेकिन जब वह शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास गई तब पुलिस ने कथित रूप से उसकी शिकायत को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उसने सेंगर के खिलाफ बलात्कार के मामले को दर्ज कराने के लिए पुलिस को निर्देश देने की मांग को लेकर कोर्ट की ओर रुख किया। आठ महीने बीत जाने बाद भी अभी तक एक मामला भी पंजीकृत नहीं हो पाया है।

किशोरी ने कहा, “हमें प्रार्थना पत्र वापस लेने के लिए धमकियाँ मिल रही हैं।” उसने कहा, “मुझे इतना परेशान किया गया था कि मैं स्वयं को अग्नि के हवाले करने की कोशिश कर बैठी। 6 अप्रैल को सेंगर के भाई अतुल सिंह और उनके साथियों ने मेरे पिता को क्रूरता से इसलिए पीटा क्योंकि उन्होंने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रशासन के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।

प्रयास की तारीख के बारे में रिपोर्टों को लेकर कई भेद हैं: जबकि पुलिस का दावा है कि यह 3 अप्रैल को हुआ, लेकिन परिवार की रिपोर्ट के अनुसार यह 3 से 6 अप्रैल के बीच बारी-बारी से हुआ है, इस एक तथ्य जिसने पुलिस के मध्य और भी संदेह उत्पन्न कर दिया है।

सेंगर ने कथित रूप से अपने चाचा से संपर्क किया, जिन्होंने विधायक से कॉल की कथित रिकॉर्डिंग को दिप्रिंट के साथ शेयर किया था। टेप पर, जैसा कि चाचा ने बताया एक आदमी कि आवाज़ है जो कि विधायक है, यह कह रहे हैं कि “अपने उन लोगों को रोको, जो मेरे खिलाफ इन आवेदनों को पेश कर रहे हैं। क्या तुम मेरे भाई नहीं हैं? तुमने काफी लंबे समय से मेरे लिए काम किया है, तुम ऐसा कैसे कर सकते हैं? लड़की को समझाओ कि मैं उसकी शादी कर दूँगा। लड़की की मां को मेरे घर पर चाय के लिए लेकर आओ।

अभी तक विधायक के खिलाफ मामला क्यों नहीं दर्ज हुआ?

यह घोषणा करते हुए कि एक एसआईटी “मामले के सभी पहलुओं” पर विचार करेगी, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) आनंद कुमार ने कहा, कानून के अनुसार यदि बलात्कार की घटना और शिकायत के मध्य तीन महीने का अंतराल है तो ऐसी स्थिति में मामले की एक जाँच की जानी चाहिए, इस तरह की जाँचों को अंजाम देने के लिए ही एसआईटी का गठन किया गया है।” उन्होंने कहा, “एसआईटी निष्पक्ष दृष्टि से आरोपों का आकलन कर रही है। जब यह पता चला कि स्थानीय पुलिस ने सेंगर के भाई (हमले के लिए) के खिलाफ अभी तक कोई भी मामला दर्ज नहीं किया था, तब उन्होंने दोषी अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दे दिया।

उन्होंने कहा कि किशोरी के बयान में कई विसंगतियां थीं। कुमार ने कहा कि “कई शिकायतों, विवरणों और तिथियों का उल्लेख किया गया है। वास्तव में, एक शिकायत में उल्लिखित एक ही घटना की दो अलग-अलग तिथियां बताई गई हैं। इन सभी को ध्यान में रखने की आवश्यकता है क्योंकि ये गंभीर आरोप हैं।

किशोरी का यह मानना है कि इस मामले को सीबीआई के हवाले कर देना आवश्यक है। उसने कहा कि मेरे पिता को जान से मार देने की धमकी दी गई थी लेकिन ये मेरे लिए गर्व की बात है कि मैंने साहस के साथ एक व्यक्ति का सामना किया। मेरा परिवार नष्ट हो गया है, लेकिन वह अभी भी खुलेआम घूम रहा है सिर्फ इसलिए क्योंकि वह एक अमीर व्यक्ति होने के साथ सत्ता में है जबकि हम गरीब हैं? क्या मैं वास्तव में इस प्रशासन से न्याय की अपेक्षा कर सकती हूं? “

share & View comments